Suresh Oberoi recalls 2004 BJP stint: दिग्गज अभिनेता सुरेश ओबेरॉय ने राजनीति से अपने छोटे जुड़ाव, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के लिए सम्मान और राजनीति को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि 2004 में भाजपा से जुड़ने के बाद उन्हें जल्द ही राजनीतिक माहौल असहज लगने लगा था। सुरेश ओबेरॉय ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के प्रति सम्मान रखते हैं, लेकिन एक्टिव राजनीति उनके लिए कभी ठीक नहीं रही।
सुरेश ओबेरॉय कैसे हुए थे राजनीति में शामिल?
सुरेश ओबेरॉय ने वरिष्ठ पत्रकार निधि वासंदानी संग खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि हैदराबाद के उनके एक कॉलेज मित्र ने उन्हें भाजपा से जुड़ने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा, “एक दिन वह घर आया और बोला, ‘यह भाजपा है, तुम्हें इसमें शामिल हो जाना चाहिए।’ यह बात 2004 की है।” इसके बाद वह अपने दोस्त के साथ गए और उनकी मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी से हुई थी।
उन्होंने बताया कि इस दौरान वह पार्टी के लिए प्रचार भी करते रहे और कल्चरल सेल से भी जुड़े। इसके बाद जब वह अपने आध्यात्मिक गुरु से मिले, तो उन्होंने सुरेश ओबेरॉय को राजनीति में न जाने की सख्त हिदायत दी थी।
सुरेश ओबेरॉय ने बताया क्यों बनाई थी राजनीति से दूरी?
सुरेश ओबेरॉय बोले, “मेरे गुरु ने मुझे बहुत डांटा और कहा- ‘सावधान रहना, कभी राजनीति में मत जाना और इन लोगों से संपर्क भी मत रखना।’ भले ही मैं शुरू में जुड़ा रहा, लेकिन मुझे वहां पॉजिटिव एनर्जी महसूस नहीं हो रही थी। मुझे लगता था कि राजनीति देश सेवा के लिए होती है, लेकिन बाद में समझ आया कि ज्यादातर लोग सिर्फ पैसा कमाने में लगे हैं।”
सुरेश ओबेरॉय ने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और कुछ दूसरे नेताओं को लेकर उन्हें कोई परेशानी नहीं है। लेकिन टॉप लीडर्स के आसपास मौजूद कई लोगों का व्यवहार उन्हें स्वाभाविक नहीं लगा। इसी वजह से उनका राजनीति से मोहभंग हो गया था और उन्होंने इससे दूरी बना ली।
मोहन भागवत के फैन हैं सुरेश ओबेरॉय
RSS प्रमुख मोहन भागवत से अपने रिश्तों पर बात करते हुए सुरेश ओबेरॉय ने बताया कि वह हमेशा से संघ और मोहन भागवत के फैन रहे हैं। उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा सुनाते हुए बताया कि मोहन भागवत एक बार उनके घर नाश्ते पर आए थे, जहां उनकी पत्नी ने उनके लिए खास हलवा बनाया था जो उन्हें बेहद पसंद आया था। इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि वह औपचारिक रूप से संघ के सदस्य नहीं हैं और न ही कभी लाठी लेकर शाखाओं में गए हैं।


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