गोपालगंज। सिविल कोर्ट परिसर स्थित हनुमान मंदिर एक अनोखे प्रेम विवाह का साक्षी बना। इस शादी में न तो बैंड-बाजे का शोर था और न ही बारातियों की भीड़। तीन साल के प्रेम संबंध के बाद एक जोड़े ने परिवार के विरोध के बावजूद एक-दूसरे को अपना जीवनसाथी चुना। यह कहानी मांझा थाना क्षेत्र के डोमाहाता गांव निवासी भोला यादव और ओलीपुर गांव की राधा कुमारी की है, जो पिछले तीन वर्षों से एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों के बीच लगातार बातचीत होती रही और उनका रिश्ता गहरा होता गया। अधिवक्ता के समझाने-बुझाने के बाद दोनों ने साथ जीने का फैसला किया इसी बीच युवती गर्भवती हो गई, जिसके बाद प्रेमी भोला यादव ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया। तब प्रेमिका राधा और उसके परिजन न्याय के लिए कोर्ट पहुंचे और मामले की जानकारी अधिवक्ता को दी। अधिवक्ता आजाद शत्रु ने दोनों परिवारों से संपर्क किया। शुरुआत में परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे, लेकिन अधिवक्ता के समझाने-बुझाने के बाद दोनों ने साथ जीने का फैसला किया। प्रेमिका की मां लगातार विरोध करती रहीं सिविल कोर्ट परिसर में हुई इस शादी के दौरान प्रेमिका की मां लगातार विरोध करती रहीं, लेकिन राधा पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उसने अपनी मां के सामने ही प्रेमी के गले में वरमाला डाली और मांग में सिंदूर भरवाया। जैसे ही भोला ने राधा की मांग में सिंदूर भरा, मां जमीन पर गिर पड़ीं और विलाप करने लगीं। परिवार के सदस्यों ने दोनों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन युवक और युवती अपने फैसले पर अडिग रहे। इसके बाद कोर्ट परिसर स्थित हनुमान मंदिर में अधिवक्ताओं की मौजूदगी में दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और शादी कर ली। आपसी सहमति से मंदिर में विवाह संपन्न कराया गया अधिवक्ता अजात शत्रु ने बताया कि दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से विवाह किया है। युवती के भविष्य को देखते हुए आपसी सहमति से मंदिर में विवाह संपन्न कराया गया। प्रेमिका राधा ने कहा कि परिवार साथ नहीं है, लेकिन वह अपना जीवन भोला के साथ ही बिताना चाहती है। वहीं भोला ने कहा कि अब वह हर परिस्थिति में राधा का साथ निभाएगा। गोपालगंज। सिविल कोर्ट परिसर स्थित हनुमान मंदिर एक अनोखे प्रेम विवाह का साक्षी बना। इस शादी में न तो बैंड-बाजे का शोर था और न ही बारातियों की भीड़। तीन साल के प्रेम संबंध के बाद एक जोड़े ने परिवार के विरोध के बावजूद एक-दूसरे को अपना जीवनसाथी चुना। यह कहानी मांझा थाना क्षेत्र के डोमाहाता गांव निवासी भोला यादव और ओलीपुर गांव की राधा कुमारी की है, जो पिछले तीन वर्षों से एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों के बीच लगातार बातचीत होती रही और उनका रिश्ता गहरा होता गया। अधिवक्ता के समझाने-बुझाने के बाद दोनों ने साथ जीने का फैसला किया इसी बीच युवती गर्भवती हो गई, जिसके बाद प्रेमी भोला यादव ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया। तब प्रेमिका राधा और उसके परिजन न्याय के लिए कोर्ट पहुंचे और मामले की जानकारी अधिवक्ता को दी। अधिवक्ता आजाद शत्रु ने दोनों परिवारों से संपर्क किया। शुरुआत में परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे, लेकिन अधिवक्ता के समझाने-बुझाने के बाद दोनों ने साथ जीने का फैसला किया। प्रेमिका की मां लगातार विरोध करती रहीं सिविल कोर्ट परिसर में हुई इस शादी के दौरान प्रेमिका की मां लगातार विरोध करती रहीं, लेकिन राधा पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उसने अपनी मां के सामने ही प्रेमी के गले में वरमाला डाली और मांग में सिंदूर भरवाया। जैसे ही भोला ने राधा की मांग में सिंदूर भरा, मां जमीन पर गिर पड़ीं और विलाप करने लगीं। परिवार के सदस्यों ने दोनों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन युवक और युवती अपने फैसले पर अडिग रहे। इसके बाद कोर्ट परिसर स्थित हनुमान मंदिर में अधिवक्ताओं की मौजूदगी में दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और शादी कर ली। आपसी सहमति से मंदिर में विवाह संपन्न कराया गया अधिवक्ता अजात शत्रु ने बताया कि दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से विवाह किया है। युवती के भविष्य को देखते हुए आपसी सहमति से मंदिर में विवाह संपन्न कराया गया। प्रेमिका राधा ने कहा कि परिवार साथ नहीं है, लेकिन वह अपना जीवन भोला के साथ ही बिताना चाहती है। वहीं भोला ने कहा कि अब वह हर परिस्थिति में राधा का साथ निभाएगा।


