समस्तीपुर|सिविल कोर्ट के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार चौबे ने 26 साल पुराने हत्या के मामले में अपना फैसला सुनाते हुए अधिवक्ता नीलम कुमारी, फोटोग्राफर विजय शंकर प्रसाद और रघुनंदन प्रसाद को साक्ष्यों के अभाव में रिहा कर दिया है। यह मामला वर्ष 2000 का है, जब सूचक श्याम नंदन लाल ने नगर थाने में अपनी बहन नीलम कुमारी, भाई रघुनंदन प्रसाद और फोटोग्राफर विजय शंकर प्रसाद के खिलाफ षड्यंत्र रचकर हत्या करने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 26 वर्षों तक चले इस विचारण में बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह की तार्किक बहसों के आधार पर न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को निर्दोष बरी कर दिया। समस्तीपुर|सिविल कोर्ट के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार चौबे ने 26 साल पुराने हत्या के मामले में अपना फैसला सुनाते हुए अधिवक्ता नीलम कुमारी, फोटोग्राफर विजय शंकर प्रसाद और रघुनंदन प्रसाद को साक्ष्यों के अभाव में रिहा कर दिया है। यह मामला वर्ष 2000 का है, जब सूचक श्याम नंदन लाल ने नगर थाने में अपनी बहन नीलम कुमारी, भाई रघुनंदन प्रसाद और फोटोग्राफर विजय शंकर प्रसाद के खिलाफ षड्यंत्र रचकर हत्या करने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 26 वर्षों तक चले इस विचारण में बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह की तार्किक बहसों के आधार पर न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को निर्दोष बरी कर दिया।

