शिवपुरी के मेडिकल कॉलेज में भर्ती 13 महीने की बच्ची की कथित तौर पर समय पर खून नहीं मिलने के कारण मौत हो गई। बच्ची के पिता ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। जानकारी के अनुसार, राजस्थान के बारा जिले के कस्बाथाना निवासी बबलू जाटव अपनी 13 महीने की बेटी नेहा जाटव को चार दिन पहले इलाज के लिए शिवपुरी मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। नेहा यहां भर्ती थी और उसका इलाज चल रहा था। अचानक बिगड़ी हालत
पिता बबलू जाटव ने बताया कि सोमवार शाम से लेकर मंगलवार सुबह तक बच्ची की हालत सामान्य थी। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे वह खाना लेने गए थे। लगभग 10:30 बजे डॉक्टरों ने उन्हें बुलाकर बताया कि बच्ची के शरीर में खून की कमी है और उसे तत्काल AB पॉजिटिव ब्लड की आवश्यकता है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में नहीं मिला ब्लड बबलू जाटव डॉक्टरों द्वारा दिया गया पर्चा लेकर पहले मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक पहुंचे, लेकिन वहां AB पॉजिटिव ब्लड उपलब्ध नहीं था। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल के ब्लड बैंक भेजा गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर भी उन्हें आवश्यक ब्लड नहीं मिल सका। “बदले में खून देने को भी तैयार था मैं” पिता का आरोप है कि वह बदले में खून देने के लिए भी तैयार थे, लेकिन कहीं से भी ब्लड की व्यवस्था नहीं हो पाई। इसी दौरान दोपहर करीब 12 बजे उन्हें बेटी नेहा की मौत की सूचना दी गई। पीड़ित पिता का कहना है कि जब तक वह बच्ची के पास थे, उसकी हालत स्थिर थी। उनके बाहर निकलते ही अचानक खून की जरूरत बताई गई। मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला अस्पताल तक चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें AB पॉजिटिव ब्लड नहीं मिला और उनकी बेटी की जान चली गई। प्रबंधन ने माना- दोनों ब्लड बैंक में नहीं था AB पॉजीटिव ब्लड
मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. आशुतोष चौऋषि का कहना है कि बच्ची की हालत बेहद नाजुक थी और उसे आईसीयू में भर्ती किया गया था। बच्ची को ब्लीडिंग हो रही थी, जिसके चलते तत्काल AB पॉजिटिव ब्लड की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने स्वीकार किया कि मेडिकल कॉलेज में यह ब्लड ग्रुप उपलब्ध नहीं था और जिला अस्पताल में भी ब्लड नहीं मिल सका। स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल जांच में यह भी सामने आया है कि घटना के समय मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल, दोनों ही ब्लड बैंकों में AB पॉजिटिव ब्लड उपलब्ध नहीं था। इस मामले ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


