20 Year Old Archaeology Student: किसी पुरातत्व छात्र के लिए पहली खुदाई ही जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि बन जाए, ऐसा मौका बेहद दुर्लभ होता है। लेकिन अमेरिका से ब्रिटेन पहुंची 20 वर्षीय यारा सूजा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। नॉर्थम्बरलैंड में खुदाई शुरू करने के महज 90 मिनट बाद उनके हाथ एक छोटा-सा सुनहरा अवशेष लगा। करीब 1200 साल पुरानी इस वस्तु ने न केवल छात्रा को हैरान किया, बल्कि शोधकर्ताओं को मध्यकालीन ब्रिटेन में धार्मिक गतिविधियों, अभिजात वर्ग और पुराने मार्गों की भूमिका पर दोबारा सोचने का मौका दिया।
1200 year Old Gold Discovery: 90 मिनट में बदल गई पूरी कहानी
न्यूकैसल यूनिवर्सिटी की छात्रा यारा सूजा नॉर्थम्बरलैंड के रेडेसडेल इलाके में अन्य छात्रों के साथ पुरातात्विक खुदाई कर रही थीं। खुदाई शुरू हुए करीब डेढ़ घंटा ही हुआ था कि उन्हें जमीन के भीतर से एक छोटा सुनहरा अवशेष मिला।
करीब 1.5 इंच लंबी इस वस्तु पर सजावटी डिजाइन है और इसके एक सिरे पर खास तरह का फिनियल बना हुआ है। शुरुआती अध्ययन के आधार पर विशेषज्ञ इसे ब्रिटेन के प्रारंभिक मध्यकाल यानी करीब 9वीं सदी से जोड़ रहे हैं।
यारा के लिए यह उनकी पहली खुदाई थी। इसलिए इतने कम समय में हजार साल से भी ज्यादा पुरानी सोने की वस्तु मिलना उनके लिए अविश्वसनीय अनुभव रहा।
आखिर यह सोने की वस्तु इतनी खास क्यों है?
पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक 9वीं सदी के ब्रिटेन में सोना आम लोगों की पहुंच से दूर था। कीमती धातुओं से बनी वस्तुएं आमतौर पर समाज के प्रभावशाली और संपन्न वर्ग से जुड़ी होती थीं।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यह वस्तु किसी धार्मिक या औपचारिक समारोह से संबंधित रही होगी। इसका सजावटी स्वरूप भी इस संभावना को मजबूत करता है कि इसे सामान्य घरेलू इस्तेमाल के लिए नहीं बनाया गया था।
हालांकि इसका वास्तविक उद्देश्य अभी निश्चित नहीं है। वैज्ञानिक और पुरातत्वविद आगे इसकी संरचना, निर्माण तकनीक और आसपास मिले अन्य अवशेषों के साथ तुलना करके इसके बारे में ज्यादा जानकारी जुटाएंगे।
उसी इलाके में पहले भी मिला था सोना
इस खोज को और महत्वपूर्ण बनाने वाली बात यह है कि रेडेसडेल इलाके में इससे पहले भी इसी तरह की एक सुनहरी वस्तु मिल चुकी है। 2021 में मेटल डिटेक्टरिस्ट एलन ग्रे को यहां एक अन्य सोने का अवशेष मिला था।
अब दोनों वस्तुओं के बीच समानता ने विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या दोनों वस्तुएं किसी एक बड़े ऐतिहासिक संदर्भ का हिस्सा थीं।
पुरातत्वविद यह संभावना भी देख रहे हैं कि इन वस्तुओं को जानबूझकर जमीन में छिपाया या दफन किया गया हो। यदि यह बात आगे के अध्ययन में साबित होती है, तो इससे उस समय के धार्मिक विश्वासों, संपत्ति छिपाने की परंपराओं और सामाजिक जीवन को समझने में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है।
जमीन के नीचे छिपा था रोमन दौर से जुड़ा रास्ता
रेडेसडेल की अहमियत सिर्फ सोने की वस्तुओं तक सीमित नहीं है। यह इलाका ऐतिहासिक डेयर स्ट्रीट के करीब है।
डेयर स्ट्रीट रोमन काल का एक महत्वपूर्ण मार्ग था, जिसे रोमन सैनिकों ने ब्रिटेन के उत्तरी हिस्से में अपनी गतिविधियों और प्रशासन को मजबूत करने के लिए विकसित किया था। यह मार्ग आधुनिक इंग्लैंड के यॉर्क क्षेत्र को स्कॉटलैंड के फर्थ ऑफ फोर्थ इलाके से जोड़ता था।
रोमन शासन खत्म होने के बाद भी यह रास्ता पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं हुआ। यही तथ्य नई खोज को खास बनाता है। इससे संकेत मिलता है कि रोमन काल समाप्त होने के कई सदियों बाद भी पुराने मार्ग व्यापार, यात्रा, धार्मिक गतिविधियों और प्रभावशाली लोगों की आवाजाही में इस्तेमाल होते रहे।
दो धार्मिक केंद्रों के बीच था यह इलाका
विशेषज्ञों की नजर में एक और महत्वपूर्ण कड़ी है डेयर स्ट्रीट का जेडबर्ग और हेक्सहम जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों से जुड़ाव।
इन दोनों स्थानों का ईसाई इतिहास कई सदियों पुराना है और 7वीं से 9वीं सदी के दौरान यहां धार्मिक संस्थानों और चर्चों का विकास हुआ। ऐसे में रेडेसडेल से मिले सोने के अवशेषों का धार्मिक गतिविधियों से संबंध होने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के पुरातत्वविद जेम्स जेरार्ड के मुताबिक, डेयर स्ट्रीट रोमन शासन के बाद भी एक महत्वपूर्ण रास्ता बना रहा। इस नई खोज से संकेत मिलता है कि ऊंचे सामाजिक दर्जे वाले लोग भी इस मार्ग का इस्तेमाल करते थे।
छात्रा पहले भी एक बड़ी खुदाई से चूक गई थीं
यारा सूजा के लिए यह खोज इसलिए भी भावनात्मक है क्योंकि इससे पहले वह एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खुदाई में हिस्सा नहीं ले पाई थीं।
बीमारी के कारण वह हैड्रियन वॉल से जुड़े बर्डोसवाल रोमन किले की खुदाई में शामिल नहीं हो सकी थीं। लेकिन रेडेसडेल में मिली इस खोज ने उस निराशा को काफी हद तक बदल दिया।
उनके लिए सबसे रोमांचक बात यह थी कि जिस वस्तु को उन्होंने मिट्टी से बाहर निकाला, उसे शायद एक हजार साल से भी अधिक समय से किसी इंसान ने नहीं देखा था।
अब दोनों कलाकृतियों की होगी गहन जांच
रेडेसडेल से मिले दोनों सोने के अवशेषों का आगे वैज्ञानिक और पुरातात्विक अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद इन्हें ग्रेट नॉर्थ म्यूजियम: हैनकॉक में प्रदर्शित किए जाने की योजना है।
इस परियोजना की एक खासियत यह भी है कि इसमें विश्वविद्यालय के पुरातत्व छात्र, विशेषज्ञ और मेटल डिटेक्टरिस्ट एक साथ काम कर रहे हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि पेशेवर पुरातत्व और जिम्मेदार मेटल डिटेक्शन के बीच सहयोग से जमीन में छिपे अतीत की कई अनकही कहानियां सामने आ सकती हैं।
छोटी वस्तु, बड़ा इतिहास
यारा सूजा की पहली खुदाई से निकला यह छोटा-सा सोने का टुकड़ा आकार में भले ही बेहद छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपे सवाल बहुत बड़े हैं। क्या यह किसी धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा था? क्या इसे किसी अभिजात व्यक्ति ने इस्तेमाल किया था? और क्या 2021 में मिली दूसरी वस्तु के साथ इसका कोई सीधा संबंध है?
इन सवालों के जवाब आने वाले अध्ययनों से मिलेंगे। फिलहाल इतना साफ है कि 1200 साल से मिट्टी के नीचे दबा यह अवशेष ब्रिटेन के प्रारंभिक मध्यकालीन इतिहास का एक नया पन्ना खोल चुका है।

