12 साल से गायब ड्राइवर को कोर्ट ने मृत माना:फरीदाबाद में 2014 में घर से निकला,तलाश के बाद भी नहीं मिला, संपत्ति अधिकार अटके

12 साल से गायब ड्राइवर को कोर्ट ने मृत माना:फरीदाबाद में 2014 में घर से निकला,तलाश के बाद भी नहीं मिला, संपत्ति अधिकार अटके

फरीदाबाद के तिगांव निवासी बस चालक महेश के परिवार को करीब 12 साल बाद बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने लंबे समय से लापता महेश को कानूनी तौर पर मृत घोषित कर दिया है। हालांकि, उसकी संपत्ति और बैंक खातों पर परिवार का मालिकाना हक अभी तय नहीं हुआ है। महेश रेडिएंट पब्लिक स्कूल में बस चलाता था। 24 मार्च 2014 को वह घर से निकला था, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटा। परिवार ने रिश्तेदारों, दोस्तों और आसपास के इलाकों में काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। महेश के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। तिगांव थाना पुलिस ने 22 मार्च 2015 को मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की। काफी प्रयासों के बाद भी जब महेश का पता नहीं चला तो पुलिस ने 20 दिसंबर 2015 को अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी। 2024 में अदालत का दरवाजा खटखटाया करीब नौ साल बाद महेश की पत्नी सुषमा ने अपने दो नाबालिग बेटों और सास माया देवी के साथ अदालत में याचिका दायर की। परिवार ने महेश को मृत घोषित करने के साथ उसकी संपत्ति, बैंक खाते, एफडीआर और एलआईसी पॉलिसी पर अधिकार देने की मांग की। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने आम लोगों से आपत्ति मांगी। इसके लिए सार्वजनिक सूचना भी जारी की गई, लेकिन किसी ने कोई दावा या आपत्ति पेश नहीं की। महेश को भी अदालत की ओर से नोटिस भेजा गया, लेकिन वह सामने नहीं आया। 2014 में निकला था घर से सुषमा और माया देवी ने अदालत में बयान देकर बताया कि 2014 में घर से जाने के बाद महेश की कोई जानकारी नहीं मिली। परिवार ने पुलिस की एफआईआर, अनट्रेस रिपोर्ट और दूसरे दस्तावेज भी अदालत में जमा किए। इन सबूतों के आधार पर अदालत ने माना कि महेश के बारे में सात साल से ज्यादा समय से कोई जानकारी नहीं है। कानून के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के जीवित होने की जानकारी उन लोगों को सात साल तक नहीं मिलती, जो सामान्य परिस्थितियों में उसके संपर्क में रहते, तो उसकी मृत्यु की कानूनी धारणा बनाई जा सकती है। इसी आधार पर अदालत ने महेश की सिविल डेथ घोषित कर दी। संपत्ति को लेकर अधिकारी नही मिला लेकिन संपत्ति के मामले में परिवार को राहत नहीं मिली। अदालत ने साफ किया कि किसी व्यक्ति को मृत घोषित करने का मतलब यह नहीं है कि उसकी संपत्ति अपने आप उसके परिजनों के नाम हो जाती है। इसके लिए उत्तराधिकार और संपत्ति पर अधिकार के अलग से पर्याप्त प्रमाण जरूरी हैं। परिवार की ओर से संपत्ति पर अपना अधिकार साबित करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्र दस्तावेज पेश नहीं किए गए। इसलिए अदालत ने महेश की संपत्ति, बैंक खातों, एफडीआर और एलआईसी पॉलिसी का मालिक या एकमात्र कानूनी वारिस घोषित करने की मांग खारिज कर दी।

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