इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 178 याचियों की ओर से दाखिल याचिका में एक ही पैरोकार के हलफनामे में प्रक्रियात्मक कमी पाते हुए याचिका को खारिज कर दिया और न्यायालय का समय बर्बाद करने व नियमों की अनदेखी के लिए सभी याचियों पर 10-10 रुपये का हर्जाना भी लगाया है।
कोर्ट ने कहा कि यह याचिका खारिज होने योग्य है क्योंकि हलफनामा किसी भी याची द्वारा नहीं बल्कि एक ऐसे पैरोकार द्वारा दिया गया है, जिसका याचियों से संबंध स्पष्ट नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दिया है। सूर्य प्रताप शर्मा व 177 अन्य की याचिका में कोर्ट ने पाया कि याचिका किसी भी मुख्य याची द्वारा सत्यापित नहीं की गई। इसकी बजाय इसे एक पैरोकार की ओर से दाखिल किया गया था, जिसने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह राज्य के विभिन्न जिलों में रहने वाले सभी 178 याचियों को कैसे जानता है।
कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि वकालतनामे पर किए गए हस्ताक्षर ऐसे प्रतीत होते हैं जैसे वे स्वयं याचियों द्वारा नहीं किए गए हों। कोर्ट ने कहा कि इसी तरह की एक याचिका गत सात अप्रैल को एक अन्य बेंच ने खारिज किया था। कोर्ट ने सभी 178 याचियों पर 10-10 रुपये का हर्जाना लगाते हुए यह राशि छह सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति के बैंक खाते में जमा करने का निर्देश दिया है।


