जामनगर डेंटल कॉलेज में 1.36 करोड़ का घोटाला, मरीजों की ग्रांट से कर्मचारी ने भरा अपना खाता

जामनगर डेंटल कॉलेज में 1.36 करोड़ का घोटाला, मरीजों की ग्रांट से कर्मचारी ने भरा अपना खाता

रोगी कल्याण समिति के फंड में हेराफेरी, 15 चेक से निजी खाते में ट्रांसफर की रकम, पुलिस ने दर्ज किया मामला

जामनगर. शहर के सरकारी डेंटल कॉलेज अस्पताल में नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत रोगी कल्याण समिति की सरकारी ग्रांट में 1.36 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला सामने आया। ठेका आधारित कार्यरत कर्मचारी शोभित गर्ग पर मरीजों के इलाज और कर्मचारियों के वेतन के लिए मिली सरकारी राशि को फर्जी तरीके से अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर करने का आरोप लगा है।
जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी के कारण कई वित्तीय जिम्मेदारियां ठेका आधारित कर्मचारियों को सौंपी गई थीं। शोभित गर्ग को रोगी कल्याण समिति के बैंक रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी का फायदा उठाकर उसने कथित तौर पर चेकों में हेरफेर कर 1.36 करोड़ रुपए निकाल लिए।
पूरा मामला 16 मई को तब उजागर हुआ जब बैंक मैनेजर ने संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सरकारी जीजी हॉस्पिटल के अधिकारियों को दी। जांच में पता लगा कि पिछले छह महीनों में 15 चेक के माध्यम से कुल 1.36 करोड़ रुपए से अधिक शोभित गर्ग के निजी खाते में ट्रांसफर किए गए। इनमें कई ट्रांजैक्शन 20 से 28 लाख रुपए तक के थे।
प्राथमिक जांच में आरोपी संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद बैंक स्टेटमेंट की जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता सामने आई। आरोप है कि चेक की राशि और विवरण बदलकर सरकारी फंड का दुरुपयोग किया गया। इस मामले में डॉ. संजय उमरानिया की शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और दस्तावेजों से छेड़छाड़ सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कराया।

चेक से छेड़छाड़ कर गलत ट्रांजैक्शन किए : डीन

डेंटल कॉलेज अस्पताल की डीन डॉ. नयना पटेल ने कहा कि अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए पेशेंट वेलफेयर कमेटी काम कर रही है, जिसे सरकार से फंड मिलता है। इस कमेटी का रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी शोभित गर्ग की थी। पिछले तीन महीनों में मेरी जानकारी के बिना चेक से छेड़छाड़ करके कई गलत ट्रांजैक्शन किए गए। मामला सामने आते ही हमने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि पेशेंट वेलफेयर कमेटी के चेयरमैन होने के नाते साइन करने का अधिकार मेरे पास है। पहले असली बिलों के साथ साइन लिए गए थे, लेकिन उसके बाद शक है कि काम के बोझ का फायदा उठाकर या भरोसा तोड़कर चेक से छेड़छाड़ की गई। ये सभी साइन सच में मेरे हैं या नहीं, यह बैंक डिटेल्स आने और पुलिस जांच के बाद ही साफ होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *