Saudi Arabia-Houthi Conflict: सऊदी अरब यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन का मुख्य मकसद बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और उसके आसपास के तटीय इलाकों पर फिर से नियंत्रण हासिल करना है। तैयारियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस अभियान में 1,00,000 से अधिक यमनी लड़ाके शामिल हो सकते हैं, जिन्हें सऊदी वायु सेना से सीधे हवाई मदद मिलेगी।
बाब अल-मंदेब पर हूती नियंत्रण को खत्म करना है मकसद
इस सैन्य अभियान का लक्ष्य पिछले महीने लाल सागर तट पर हूती विद्रोहियों द्वारा हासिल की गई बढ़त को खत्म करना है। हूती विद्रोहियों ने हाल ही में तेजी से आगे बढ़ते हुए बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर कब्जा कर लिया था। यह जलमार्ग भूमध्य सागर और एशिया के बीच वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए जीवन रेखा का काम करता है। संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए इस वैकल्पिक रास्ते का महत्व काफी बढ़ गया है।
सऊदी अरब में अमेरिका के पूर्व राजदूत माइकल रैटनी ने रॉयटर्स से कहा कि 2015 के हस्तक्षेप की तुलना में इस ऑपरेशन का दायरा सीमित हो सकता है। इसका मुख्य मकसद पूरे यमन में हूती विद्रोहियों को हराने के बजाय तटीय इलाकों को वापस लेना और सामान्य समुद्री आवाजाही को बहाल करना होगा।
खुफिया जानकारी मुहैया करा रहा अमेरिका
रियाद के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीनी सेनाओं का आपस में बंटा होना है। हूती विद्रोहियों से लड़ने वाली सेनाएं कोई एक संयुक्त राष्ट्रीय सेना नहीं हैं, बल्कि वे अलग-अलग गुट हैं जिन्हें सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से फंडिंग मिलती है और हर गुट के अपने क्षेत्रीय और राजनीतिक हित हैं।
इस बीच, सऊदी अरब के मुख्य सहयोगी अमेरिका ने सीधे सैन्य दखल से दूरी बनाए रखी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और हवाई हमलों के लिए सऊदी अरब के अनुरोधों को ठुकरा दिया था। हालांकि, अमेरिका सऊदी अरब के अभियानों में मदद के लिए सैन्य सलाहकार, खुफिया जानकारी और टारगेट से जुड़ी जानकारी मुहैया करा रहा है।
मक्का रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान और तुर्किए का रोल
सऊदी अरब की सुरक्षा को मजबूती देने के लिए 7 अगस्त को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता‘ हुआ था, जिसके तहत किसी एक पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान ने यमन में सीधे लड़ाकू सैनिक भेजने से परहेज किया है। इसके बजाय, इस्लामाबाद ने एयर डिफेंस सिस्टम, हल्की तोपें और एंटी-ड्रोन उपकरण मुहैया कराए हैं, जबकि सीमा सुरक्षा और मिसाइल को रोकने के काम के लिए 30,000 से 40,000 पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब में तैनात हैं।
तुर्किए भी ड्रोन और सैन्य उपकरण मुहैया करा रहा है, जबकि फ्रांस ने सऊदी बंदरगाह यानबू की सुरक्षा के लिए डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए तीनों देशों के सैन्य प्रमुखों ने 25 सितंबर को बैठक की थी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री के अनुसार, अगले हफ़्ते रियाद में एक आपातकालीन त्रिपक्षीय बैठक होने वाली है।


SAUDIS PLAN MAJOR OFFENSIVE TO BREAK HOUTHI GRIP ON RED SEA CHOKEPOINT
