हाई अलर्ट पर ईरानी सेना, ग्राउंड फोर्सेज़ के कमांडर ने सभी यूनिट्स को सबसे उच्च स्तर पर युद्ध की तैयारी रखने का दिया निर्देश

हाई अलर्ट पर ईरानी सेना, ग्राउंड फोर्सेज़ के कमांडर ने सभी यूनिट्स को सबसे उच्च स्तर पर युद्ध की तैयारी रखने का दिया निर्देश

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच तनाव की स्थिति बरकरार है। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नज़दीक है और इस बात की संभावना जताई जा रही है कि चुनाव के बाद अमेरिका फिर से ईरान पर हमले शुरू कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) भी कई मौकों पर इस बात का संकेत दे चुके हैं कि मिडटर्म चुनाव के बाद अमेरिका फिर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। इसी बीच ईरानी सेना की ग्राउंड फोर्सेज़ के कमांडर ने सभी यूनिट्स को बड़ा निर्देश दे दिया है।

हाई अलर्ट पर ईरानी सेना

अमेरिका से फिर से जंग शुरू होने की संभावना के बीच ईरानी सेना हाई अलर्ट पर है। ईरानी सेना की ग्राउंड फोर्सेज़ के कमांडर अली जहानशाही (Ali Jahanshahi) ने सभी यूनिट्स निर्देश दिया है कि वो लगातार प्रशिक्षण, अपनी परिचालन क्षमताओं के मूल्यांकन और अन्य यूनिटों के साथ बेहतर तालमेल के ज़रिए सबसे उच्च स्तर पर युद्ध की तैयारी रखें।

थोड़ी सी भी लापरवाही पड़ सकती है बहुत भारी

जहानशाही ने ईरानी सेना को चेताया कि दुश्मन के खिलाफ थोड़ी सी भी लापरवाही बहुत भारी पड़ सकती है। जहानशाही ने सेना की ग्राउंड फोर्सेज़ की एक ब्रिगेड के दौरे के दौरान यह बात कही। इस दौरान कई ईरानी सैन्य अधिकारी भी वहाँ मौजूद रहे।

गंभीर है स्थिति

सेना को हाई-अलर्ट पर रहने का निर्देश ऐसे समय में आया है जब पूरे क्षेत्र में सैन्य स्थिति काफी गंभीर है। ईरान की तरफ से लगातार तैयारियाँ की जा रही हैं, जिससे हर स्थिति में युद्ध के लिए तैयार रहा जा सके। ट्रंप ने भी पिछले कुछ समय में धमकियाँ बढ़ा दी हैं, जिसके बाद फिर से जंग शुरू होने की संभावना काफी बढ़ गई है। ईरानी सेना अपनी ज़मीनी बॉर्डर और रणनीतिक समुद्री मार्गों पर पूरी तरह से रक्षात्मक कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

मिडिल ईस्ट में देशों को ईरान की चेतावनी

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य फदा हुसैन मलेकी (Fada Hossein Maleki) ने मिडिल ईस्ट में सभी देशों को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका के खिलाफ फिर से जंग छिड़ती है और मिडिल ईस्ट के देश इसमें अमेरिका का समर्थन करते हैं, तो इसे ईरान के खिलाफ दुश्मनी का कदम माना जाएगा। मलेकी ने एक इंटरव्यू में यह बात कही। उन्होंने यह भी कहा, “ऐसी स्थिति में, ईरान जो फैसले लेगा, वो सिर्फ उन देशों के सैन्य ठिकानों पर हमले तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन देशों को खुद ही ईरान का दुश्मन देश माना जाएगा।”

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