हाईकोर्ट ने महिला आईओ 4 बजे तक कस्टडी रखा:कोर्ट ने लापरवाही पर 5 हजार जमा करने का निर्देश दिया

हाईकोर्ट ने महिला आईओ 4 बजे तक कस्टडी रखा:कोर्ट ने लापरवाही पर 5 हजार जमा करने का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महिला जांच अधिकारी (आई ओ) को शाम 4 बजे तक कोर्ट की कस्टडी में रहने और आर्मी वेलफेयर फंड में 5 हजार जमा करने का निर्देश दिया।
महिला ने माना कि वह पाक्सो केस में आरोपी का मोबाइल फोन ‘गलती से’ नहीं ले पाई थी। इस मामले में एक नाबालिग लड़की की अश्लील तस्वीर/वीडियो को एडिट करके सोशल मीडिया पर अपलोड करने का आरोप है।
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने आरोपी की ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। आरोपी पर बीएनएस, पाक्सो एक्ट और यूपी धर्मांतरण निषेध एक्ट, 2021 के तहत आरोप हैं। कोर्ट ने पहले कहा था कि हालांकि सेक्शन 183 बीएन एसएस के तहत दर्ज पीड़ित के बयान में सोशल मीडिया पर एडिटेड इमेज/वीडियो अपलोड करने के आरोप थे, लेकिन जांच अधिकारी ने जांच के लिए आरोपी का मोबाइल फोन बरामद नहीं किया था। इसलिए कोर्ट ने कानपुर देहात के मूसा नगर पुलिस स्टेशन की इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर अनीता वर्मा को खुद कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया। आईओ कोर्ट ने सामने पेश हुई आई ओ वर्मा कोर्ट के सामने पेश हुईं और उन्होंने माना कि वह “गलती से आवेदक का मोबाइल फ़ोन लेने में नाकाम रहीं”। उन्होंने आगे कहा कि कोर्ट के ऑर्डर की कॉपी मिलने के बाद, वह एक को-आरोपी की पेंडिंग इन्वेस्टिगेशन के दौरान फोन लेने की कोशिश कर रही थीं। उनके जवाब पर विचार करते हुए, कोर्ट ने पंकज बनाम यूपी राज्य में अपने 2026 के फैसले का ज़िक्र किया , जिसमें राज्य के पुलिस महानिदेशक को ऐसे मामलों में आरोपी का मोबाइल फ़ोन जमा करने के लिए एक सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया गया था। डीपीजी के सकुर्लर का हलावा दिया कोर्ट के आदेश के अनुसार, डीजीपी ने इस साल जुलाई में सभी पुलिस अधिकारियों को एक सर्कुलर जारी किया था। इस बैकग्राउंड में, बेंच ने कहा कि आई ओ की गलती न सिर्फ़ जांच करने में लापरवाही दिखाती है, बल्कि सेक्शन 183 बीएनएसएस के तहत दर्ज पीड़ित के बयान के हिसाब से मोबाइल फ़ोन की अहमियत को देखते हुए ‘कंटेम्प्टस’ भी है। हालांकि, नरम रुख अपनाते हुए, कोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ कोई सख्त टिप्पणी करने से परहेज किया और उनसे भविष्य में सावधान रहने को कहा। लापरवाही पर कोर्ट नाराज हाईकोर्ट ने इस लापरवाही पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की, लेकिन नरम रवैया अपनाते हुए, आई ओ लेडी ऑफिसर होने के नाते कोई सख़्ती नहीं की, बल्कि उसे आर्मी वेलफ़ेयर फ़ंड में 5,000/- खर्च के तौर पर जमा करने और भविष्य में सावधान रहने का निर्देश दिया। कोर्ट ने आगे आदेश दिया कि वह कोर्ट से बाहर नहीं जाएगी और 4 बजे तक कोर्ट की कस्टडी में रहेगी और उसके बाद उसे रिहा कर दिया जाएगा/जाने दिया जाएगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि डिपॉज़िट कन्फ़र्म करने वाली रसीद संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने जमा की जाए।
जांच में हुई चूक को देखते हुए, कोर्ट ने राज राईन की बेल एप्लीकेशन मंज़ूर कर ली। याचिका पर विचार करते समय, कोर्ट ने सेक्शन 180 और 183 बीएनएसएस के तहत दर्ज पीड़ित के बयानों में विरोधाभास, पीड़ित का मेडिकल एग्जामिनेशन करने से इनकार, अपराध की प्रकृति और उसके खिलाफ सबूतों को ध्यान में रखा। आरोपी को निर्देश दिया गया कि वह गवाहों को प्रभावित न करे या सबूतों से छेड़छाड़ न करे, बिना स्थगन मांगे ट्रायल और जांच में सहयोग करे और रिहाई के बाद आपराधिक गतिविधि में शामिल न हो।

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