रतलाम/ इंदौर। वैवाहिक विवाद के बीच तीन महीने के बेटे की कस्टडी को लेकर पुलिस विभाग में कार्यरत मां-बाप के बीच के विवाद में हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है।
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी मां को सौंपते हुए कहा कि बच्चे का सर्वोत्तम हित मां के पास रहने में है। हालांकि पिता को हर शनिवार और रविवार सुबह 10 से शाम 4 बजे तक बेटे को अपने साथ रखने का अधिकार दिया गया है।
शनिवार-रविवार मिलने का होगा अधिकार
हाईकोर्ट में मासूम बच्चे की मां ने ये हेबियस कॉर्पस की याचिका दायर की थी। जिसमें बताया गया था कि बच्चे के पिता से उनका वैवाहिक विवाद चल रहा है और तलाक का केस भी नीमच फैमिली कोर्ट में लंबित है। कोर्ट में मौजूद रिकॉर्ड में बताया गया था कि मां ने पहले फैमिली कोर्ट में सहमति दी थी कि बच्चा पति के पास रहेगा और उसे शनिवार-रविवार मिलने का अधिकार होगा। हाईकोर्ट में उसने दावा किया कि यह बयान उससे दबाव में दिलवाया गया था।
इसलिए दिया यह फैसला
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों से बातचीत के बाद कहा कि दोनों की ड्यूटी लगभग समान है, लेकिन मां जरूरत पडऩे पर बच्चे को अपने साथ ड्यूटी स्थल पर रख सकती है। इसका उसे अतिरिक्त लाभ है। कोर्ट ने माना कि मां नौकरी करने के साथ बच्चे की देखभाल करने में सक्षम है। चूंकी वो खुद भी नौकरी पेशा है ऐसे में बच्चे की देखरेख कर सकती है। ऐसे में बच्चे के हित में उसकी कस्टडी मां को देना उचित है।
कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी मां को सौंप दी
कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी मां को सौंप दी। साथ ही पति को शनिवार और रविवार को बच्चे से मिलने का अधिकार और उसे अपने साथ ले जाने का अधिकार भी कोर्ट ने दिया। हालांकि अपने आदेश में कोर्ट ने ये भी साफ कर दिया कि यह व्यवस्था निचली अदालत के उनके बीच चल रहे केस के अंतिम आदेश तक ही रहेगी।

