विदेश में रहकर भी राजस्थान की परंपराओं और संस्कृति से जुड़ाव कायम रखने की मिसाल हांगकांग के माकाऊ शहर में देखने को मिली। यहां गुरुवार को राजस्थान के प्रवासी परिवारों ने स्नेह-मिलन समारोह आयोजित कर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ करवा चौथ मनाया। सिरोही, पाली, उदयपुर और जोधपुर के 10 से अधिक परिवार इस आयोजन में शामिल हुए। महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखा और रात 9:29 बजे चांद दिखाई देने पर छलनी से चांद और पति के दर्शन कर अर्घ्य दिया। इसके बाद पतियों ने पानी पिलाकर उनका व्रत खुलवाया। उस समय भारत में रात के 7:30 बजे थे। राजस्थानी परिधानों में सजीं महिलाएं, गूंजे मंगल गीत समारोह में महिलाएं सुबह से निर्जला उपवास पर रहीं। शाम को वे पारंपरिक राजस्थानी परिधानों में एकत्र हुईं। इस दौरान करवा चौथ की कथा सुनी गई और मंगल गीत गाए गए। आयोजन में शामिल परिवारों को सिरोही, पाली, उदयपुर और जोधपुर के अलग-अलग समूहों में बांटा गया था, जिससे अपने-अपने क्षेत्र के लोगों के साथ मेल-मिलाप का अवसर भी मिला। विदेश में राजस्थान की संस्कृति को सहेजने की पहल सिरोही निवासी शक्ति सिंह मांडानी ने बताया कि समारोह आयोजित करने का उद्देश्य विदेश में रहते हुए भी राजस्थान की जड़ों और मारवाड़-मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखना है। उन्होंने कहा कि करवा चौथ राजस्थान की पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया गया, ताकि विदेश में रहने वाली नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहे। पूजा के बाद परिवारों ने किया स्नेह भोज चांद के दर्शन, पूजा और अर्घ्य की रस्म पूरी होने के बाद परिवारों ने एक साथ स्नेह भोज किया। इस दौरान भारतीय संस्कृति के पारिवारिक मूल्यों, पति-पत्नी के आपसी समर्पण और आस्था के महत्व पर भी चर्चा हुई। प्रवासी परिवारों का यह आयोजन विदेश में अपनी सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक परंपराओं को जीवंत रखने का माध्यम बना।

