‘हसीन सपने दिखाकर गुमराह कर रही सरकार’:बोधगया विधायक बोले- 20 साल में उद्योग नहीं, अब डोभी में निवेश का सपना दिखाया जा रहा

‘हसीन सपने दिखाकर गुमराह कर रही सरकार’:बोधगया विधायक बोले- 20 साल में उद्योग नहीं, अब डोभी में निवेश का सपना दिखाया जा रहा

बिहार में उद्योग लगाने के दावे किए जा रहे हैं। निवेशकों को बुलाया जा रहा है। गयाजी के डोभी में औद्योगिक विकास की तेजी से उम्मीद जगाई जा रही है। इन सब के बीच बोधगया से आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने सरकार की औद्योगिक नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ निवेश के प्रस्ताव और घोषणाएं बिहार की तस्वीर नहीं बदल सकती। पहले इथेनॉल, अब डोभी कॉरिडोर; पुराने वादों का क्या कुमार सर्वजीत ने आरोप लगाया कि बिहार में पिछले 20 वर्षों से उद्योग लगाने के दावे किए जा रहे हैं। पहले इथेनॉल फैक्ट्रियों के जरिए औद्योगिक विकास की उम्मीद दिखाई गई। अब डोभी कॉरिडोर में निवेश की चर्चा है। लेकिन पुराने उद्योगों की स्थिति पर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इथेनॉल की खरीद बंद होने से इससे जुड़े कुछ उद्योग आर्थिक संकट में हैं। कई कम्पनियों के मालिक दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। ऐसे में नए निवेश के प्रस्तावों के साथ पुराने उद्योगों की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। कुमार सर्वजीत का कहना है कि उद्योग लगाने से पहले सरकार ने उसके संचालन की पूरी व्यवस्था तैयार की है या नहीं। किसी उद्योग के लिए सिर्फ जमीन और निवेश पर्याप्त नहीं है। बिजली, परिवहन, कच्चा माल, बाजार के अलावा प्रशिक्षित कामगार भी चाहिए। इन व्यवस्थाओं के बिना निवेश के प्रस्तावों को उत्पादन और रोजगार में बदलना मुश्किल होगा। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल में होटल उद्योग पर सवाल बोधगया में होटल और पर्यटन कारोबार को लेकर भी विधायक ने सवाल उठाए। उनका दावा है कि यहां पिछले आठ वर्षों से नक्शा पास नहीं हो रहा है। बड़ी होटल कंपनियां निवेश करना चाहती हैं लेकिन निर्माण संबंधी अड़चनों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। यह मामला इसलिए अहम है, क्योंकि बोधगया की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन से जुड़ा है। होटल बनते हैं तो स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता है। ऑटो चालकों, दुकानदारों, खानपान कारोबारियों और दूसरे छोटे व्यवसायों को भी काम मिलता है। ऐसे में अगर निर्माण संबंधी अड़चनें निवेश रोक रही हैं, तो उनका समाधान जरूरी है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नक्शा पास करने में क्या समस्या है और उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अपराध का डर रहेगा तो निवेशक कैसे आएंगे कुमार सर्वजीत ने बोधगया की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने भाजपा के जिला अध्यक्ष के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब सत्ताधारी दल के नेता ही अपराध बढ़ने, गैंग के सक्रिय होने और थानों में आम लोगों की सुनवाई नहीं होने की बात उठा रहे हैं, तो ऐसे में सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। किसानों की जमीन पर उद्योग तो परिवार को रोजगार भी मिले विधायक ने कहा कि औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। जमीन लेने पर उचित मुआवजा दिया जाए। प्रभावित परिवारों के साथ पारदर्शी समझौता हो और कम से कम एक सदस्य को उसकी जमीन पर लगने वाले उद्योग में रोजगार देने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने किसानों के उत्पादों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने की जरूरत भी बताई। उनका तर्क है कि उद्योगों से होने वाले विकास का फायदा केवल निवेशकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। स्थानीय किसानों और युवाओं को भी इसका लाभ मिलना चाहिए। निवेश की घोषणा नहीं, नतीजे बताए सरकार कुमार सर्वजीत ने कहा कि बिहार में औद्योगिक विकास की संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए बेहतर कानून-व्यवस्था, स्पष्ट नीतियां और निवेश के अनुकूल माहौल जरूरी है। डोभी कॉरिडोर में निवेश की चर्चा के बीच असली सवाल यही है कि कितने उद्योग जमीन पर उतरेंगे, कितने लोगों को रोजगार मिलेगा व स्थानीय अर्थव्यवस्था को कितना फायदा पहुंचेगा। बिहार में उद्योग लगाने के दावे किए जा रहे हैं। निवेशकों को बुलाया जा रहा है। गयाजी के डोभी में औद्योगिक विकास की तेजी से उम्मीद जगाई जा रही है। इन सब के बीच बोधगया से आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने सरकार की औद्योगिक नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ निवेश के प्रस्ताव और घोषणाएं बिहार की तस्वीर नहीं बदल सकती। पहले इथेनॉल, अब डोभी कॉरिडोर; पुराने वादों का क्या कुमार सर्वजीत ने आरोप लगाया कि बिहार में पिछले 20 वर्षों से उद्योग लगाने के दावे किए जा रहे हैं। पहले इथेनॉल फैक्ट्रियों के जरिए औद्योगिक विकास की उम्मीद दिखाई गई। अब डोभी कॉरिडोर में निवेश की चर्चा है। लेकिन पुराने उद्योगों की स्थिति पर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इथेनॉल की खरीद बंद होने से इससे जुड़े कुछ उद्योग आर्थिक संकट में हैं। कई कम्पनियों के मालिक दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। ऐसे में नए निवेश के प्रस्तावों के साथ पुराने उद्योगों की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। कुमार सर्वजीत का कहना है कि उद्योग लगाने से पहले सरकार ने उसके संचालन की पूरी व्यवस्था तैयार की है या नहीं। किसी उद्योग के लिए सिर्फ जमीन और निवेश पर्याप्त नहीं है। बिजली, परिवहन, कच्चा माल, बाजार के अलावा प्रशिक्षित कामगार भी चाहिए। इन व्यवस्थाओं के बिना निवेश के प्रस्तावों को उत्पादन और रोजगार में बदलना मुश्किल होगा। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल में होटल उद्योग पर सवाल बोधगया में होटल और पर्यटन कारोबार को लेकर भी विधायक ने सवाल उठाए। उनका दावा है कि यहां पिछले आठ वर्षों से नक्शा पास नहीं हो रहा है। बड़ी होटल कंपनियां निवेश करना चाहती हैं लेकिन निर्माण संबंधी अड़चनों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। यह मामला इसलिए अहम है, क्योंकि बोधगया की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन से जुड़ा है। होटल बनते हैं तो स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता है। ऑटो चालकों, दुकानदारों, खानपान कारोबारियों और दूसरे छोटे व्यवसायों को भी काम मिलता है। ऐसे में अगर निर्माण संबंधी अड़चनें निवेश रोक रही हैं, तो उनका समाधान जरूरी है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नक्शा पास करने में क्या समस्या है और उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अपराध का डर रहेगा तो निवेशक कैसे आएंगे कुमार सर्वजीत ने बोधगया की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने भाजपा के जिला अध्यक्ष के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब सत्ताधारी दल के नेता ही अपराध बढ़ने, गैंग के सक्रिय होने और थानों में आम लोगों की सुनवाई नहीं होने की बात उठा रहे हैं, तो ऐसे में सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। किसानों की जमीन पर उद्योग तो परिवार को रोजगार भी मिले विधायक ने कहा कि औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। जमीन लेने पर उचित मुआवजा दिया जाए। प्रभावित परिवारों के साथ पारदर्शी समझौता हो और कम से कम एक सदस्य को उसकी जमीन पर लगने वाले उद्योग में रोजगार देने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने किसानों के उत्पादों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने की जरूरत भी बताई। उनका तर्क है कि उद्योगों से होने वाले विकास का फायदा केवल निवेशकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। स्थानीय किसानों और युवाओं को भी इसका लाभ मिलना चाहिए। निवेश की घोषणा नहीं, नतीजे बताए सरकार कुमार सर्वजीत ने कहा कि बिहार में औद्योगिक विकास की संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए बेहतर कानून-व्यवस्था, स्पष्ट नीतियां और निवेश के अनुकूल माहौल जरूरी है। डोभी कॉरिडोर में निवेश की चर्चा के बीच असली सवाल यही है कि कितने उद्योग जमीन पर उतरेंगे, कितने लोगों को रोजगार मिलेगा व स्थानीय अर्थव्यवस्था को कितना फायदा पहुंचेगा।  

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