स्वरा भास्कर के बयान पर भड़कीं अपर्णा यादव, बोलीं- मुस्लिम धर्म में शादी का हक, सनातन के अपमान का नहीं

स्वरा भास्कर के बयान पर भड़कीं अपर्णा यादव, बोलीं- मुस्लिम धर्म में शादी का हक, सनातन के अपमान का नहीं

Aparna Yadav On Swara Bhaskar Jauhar Remark: अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ में दिखाए गए ‘जौहर’ सीन को रेप से जोड़कर विवादित बयान दिया था। जिसे लेकर देशभर में आक्रोश देखा जा रहा है। स्वरा को लगातार ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। अब ऐसे में बीजेपी नेता और मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव ने स्वरा पर कटाक्ष किया है। उन्होंने स्वरा को उनकी मुस्लिम शादी याद दिलाते हुए कहा कि जहां रोज बदलते हैं शौहर, तो वे क्या जानेंगी क्षत्रियों का जौहर।

स्वरा भास्कर के जौहर विवाद पर अपर्णा यादव ने क्या कहा?

अपर्णा यादव ने IANS संग खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने स्वरा की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह बार-बार हिंदू रीति-रिवाजों और सनातन मूल्यों को नीचा दिखाने का प्रयास करती हैं।

अपर्णा यादव ने कहा, “स्वरा जी बार-बार हिंदू रीति रिवाजों पर टिप्पणी करती हैं और जिस प्रकार से उनका जो धेय धारणा है सनातन के लिए वो मुझे समझ में नहीं आती। उन्होंने जब किसी दूसरी धर्म में अपना शादी की वो उनकी मर्जी थी उनकी जिंदगी है, हमने उसकी इज्जत की। कोई किसी से भी शादी कर सकता है। लेकिन आपके दिल में जो दुर्भावना है सनातन के प्रति ये नहीं रखनी चाहिए।”

अपर्णा यादव ने आगे कहा, ” पद्मावत’ में दिखाया गया जौहर उस समय की देश, काल और परिस्थिति के हिसाब से रानियों का अपने स्वाभिमान और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए लिया गया एक दृढ़ संकल्प था। जब राजा और सेनापति वीरगति को प्राप्त हो गए थे, तब अपनी पवित्रता और शरीर की रक्षा के लिए सैकड़ों रानियों ने स्वैच्छिक निर्णय लिया था।”

जौहर की तुलना बलात्कार से करने पर जताई आपत्ति

जौहर की प्रथा को इस समय के बलात्कार के अपराध से जोड़ने और उस पर स्वरा द्वारा दिए गए तर्क पर अपर्णा यादव ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि आधुनिक भारत में कानून और अदालतें हैं, जहां अपराध की सजा तय होती है, लेकिन मध्यकालीन इतिहास की परिस्थितियों को आज के माहौल से जोड़कर देखना पूरी तरह से अतार्किक और गलत है।

स्वरा पर सीधा कटाक्ष करते हुए अपर्णा यादव ने कहा, “जौहर उस कालखंड में क्षत्राणियों का अपने स्वाभिमान और आत्मरक्षा के लिए किया गया एक पवित्र त्याग था। स्वरा ने जिस तरह से इस ऐतिहासिक घटना को दुष्कर्म और जघन्य अपराधों से जोड़कर समाज में गलत संदेश देने की कोशिश की है, वह बेहद शर्मनाक है। मैं बस इतना ही कहूंगी कि जहां रोज बदलते हैं शौहर, तो वे क्या जानेंगी क्षत्रियों का जौहर!”

अपर्णा यादव ने अंत में कहा कि स्वरा को अपने विचार रखने की पूरी आजादी है, लेकिन उन्हें ऐतिहासिक संदर्भों और सनातनी मूल्यों को नीचा दिखाने (डिग्रेड करने) से बचना चाहिए।

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