‘स्मैक से दिमाग को गुड फील होता है’:पढ़ने की उम्र में सफेद पाउडर की लत, किताबों में पुड़िया; नशे के लिए तस्कर के सामने हाथ जोड़ते युवा

‘स्मैक से दिमाग को गुड फील होता है’:पढ़ने की उम्र में सफेद पाउडर की लत, किताबों में पुड़िया; नशे के लिए तस्कर के सामने हाथ जोड़ते युवा

‘स्मैक लेने के बाद बहुत अच्छा महसूस होता है। पाउडर नाक से लेते हैं, तो मन को शांति मिलती है।’ ये बातें बेगूसराय के एक किशोर ने कहीं। उसे स्मैक लेने की लत है। किशोर एक चाय की दुकान के पास बैठा था। वह मोबाइल पर सफेद पाउडर को एटीएम कार्ड से मिला रहा था। इसी दौरान भास्कर रिपोर्टर ने उससे पूछा- ये एटीएम कार्ड किसका है? इस पर किशोर ने कहा- मां का एटीएम कार्ड लेकर आया हूं। इसी से पैसे निकालकर स्मैक खरीदता हूं। दरअसल, बेगूसराय में इन दिनों सूखे नशे की खपत बढ़ गई है। चाय की दुकान हो या पान की, हर जगह यह आसानी से उपलब्ध है। स्थिति यह है कि स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र पुड़िया को किताबों के बीच छिपाकर रखते हैं, ताकि उनके गार्जियन उसे देख न लें। तस्कर किन लोगों को टारगेट कर रहे हैं, कैसे नशे की लत लगाई जा रही, बेगूसराय में कहां से आती है नशे की खेप, पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले देखिए कुछ तस्वीरें… स्मैक में हम मिलावट नहीं करते: तस्कर बेगूसराय के बछवाड़ा में नशे का कारोबार खुलेआम हो रहा है। भास्कर रिपोर्टर की टीम बछवाड़ा के एक चाय दुकान पर पहुंची, जहां एक टूटी टेबल पर स्मैक की बहुत सारी पुड़िया रखी हुई थी। स्मैक की पुड़िया देखने पर तस्कर से बातचीत शुरू की तो वह बिना डर स्मैक की खासियत और उसकी क्वालिटी बताने लगा। स्मैक की शुद्धता और उसके वजन को लेकर तस्कर ने बताया कि विश्वास नहीं हो तो तराजू पर तोल लो। इसके अलावा कोई मिलावट नहीं है। यहां 100 रुपए से लेकर 300 रुपए तक में स्मैक की पुड़िया आसानी से बेची जा रही थी। पैसे नहीं होने पर बेबस दिखे युवा उधारी और बकाए का हिसाब-किताब बेखौफ चल रहा था, मानो किसी राशन की दुकान पर रोजमर्रा के किराना सामान का लेन-देन हो रहा हो। उसी टूटी मेज के पास कुछ ऐसे लोग भी पहुंचे थे, जो अपने पिछले नशीले सामान का उधार चुका रहे थे। वहीं कुछ ऐसे लाचार युवक भी थे, जिनके पास अगली खुराक के लिए पैसे नहीं बचे थे। वे तस्कर के आगे गिड़गिड़ाकर एक पुड़िया की भीख मांग रहे थे। अब पढ़ें कैसे लगाई जा रही किशोरों-युवाओं को नशे की लत… स्मैक वाली चाय पिलाकर नशे की लत लगाते एक तस्कर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि तस्करों के लिए सबसे महफूज ठिकाना चाय-पान की दुकान है। यहां आम लोगों की नजरों के सामने नशे का धंधा चलता है, फिर भी किसी को कुछ नहीं पता चलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दुकानों पर धंधा कोडवर्ड में चलता है। तस्कर नाबालिग और युवाओं को चाय पिलाने के बहाने चाय दुकान पर लाते और चाय वाले को कहते कड़क चाय चाहिए। कड़क चाय का मतलब स्मैक वाली चाय, पर ये कोड नया आदमी नहीं समझ पाता। चाय वाला स्मैक वाली चाय युवकों को देता। ऐसा हर दिन होता है। जबतक नाबालिग-युवाओं को पता चलता है कि वे स्मैक वाली चाय पी रहे, तब तक उन्हें कड़क चाय की लत लग चुकी होती है। फिर वो तस्करों के रेगूलर कस्टमर बन चुके होते। जब-जब नशे की तलब उठती है तो युवाओं को 250 से 300 रुपए में मिलने वाली स्मैक की पुड़िया दी जाती है। स्कूल में छात्रों की उपस्थिति में गिरावट- शिक्षक नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ शिक्षक बताते हैं कि स्कूल में 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों की उपस्थिति में गिरावट आई है। जो बच्चे कल तक गणित और विज्ञान के कठिन सवालों को चुटकियों में हल करते थे और कक्षा में अव्वल आते थे। वे आज अपना बस्ता फेंककर सुनसान बगीचों, कॉलेज-स्कूल के सुनसान जगह, खंडहरों और पुलियों के नीचे नशे में बेसुध पड़े मिलते हैं। बेगूसराय में कौन सप्लाई करता स्मैक, पुलिस ने क्या की है कार्रवाई… एक दिन पहले पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया था पुलिस के अनुसार बेगूसराय में शनिवार को साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र में वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान एसटीएफ, डीआईयू और स्थानीय थाने की पुलिस ने एक अर्तराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया था। तस्कर साहेबपुर थाना क्षेत्र स्थित रघुनाथपुर गांव का रहने वाला पप्पू यादव का बेटा सन्नी कुमार है। गिरफ्तार तस्कर पर विभिन्न थाना में आधे दर्जन मामले दर्ज हैं। सन्नी सिर्फ साहेबपुर कमाल क्षेत्र ही नहीं, बल्कि बेगूसराय जिले बड़ा स्मैक तस्कर है। यह असम और पश्चिम बंगाल से स्मैक मंगवाता है और बेगूसराय में विभिन्न इलाकों में फुटकर बेचने वाले को उपलब्ध कराता है। इसका सबसे अधिक स्मैक ट्रेन के रास्ते मालदा से आता है। जहां से हैंडलर (कूरियर) ट्रेन से स्मैक लेकर जमालपुर आते हैं और जमालपुर से सड़क मार्ग से होकर बेगूसराय पहुंचते हैं। थार-स्कॉर्पियो जैसी महंगी गाड़ियों से तस्करी पुलिस के अनुसार सन्नी थार और स्कॉर्पियो जैसी मंहंगी गाड़ी से चलकर छोटे-छोटे तस्करों को स्मैक पहुंचता है। सन्नी के गिरोह में रघुनाथपुर के 4-5 लड़के हैं। जबकि जिले के अलग-अलग क्षेत्र में उसने छोटे-छोटे तस्कर को स्मैक बेचने के काम में लगा रखा है। इसी साल मार्च में पश्चिम बंगाल का रहने वाला सोहेल खान मालदा से 1 किलो स्मैक लेकर सन्नी को पहुंचाने रघुनाथपुर आया था। यहां सन्नी और उसके गिरोह के लोगों ने उसे किडनैप कर लिया और 2 दिन तक अलग-अलग जगह पर छिपा कर रखा था। सोहेल के परिवार के लोगों से फिरौती तक मांगी गई थी, बाद में पुलिस के प्रयास से उसे मुक्त कराया गया था। जिले भर के छोटे-छोटे तस्करों को सन्नी अपना सही पता भी नहीं बताता था। कुछ लोग उसे खगड़िया जिला के मानसी का तो कुछ उसे मुंगेर का समझते थे। अपना सही पता नहीं बताता इसी साल बेगूसराय जिला मुख्यालय के लोहिया नगर झोपड़पट्टी में 133 ग्राम स्मैक के साथ पकड़े गए छोटू कुमार उर्फ कीडो ने बताया था कि उसे स्मैक सन्नी कुमार ने बचने के लिए दिया है। जो मानसी का है, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि सन्नी का घर मानसी नहीं, बल्कि साहेबपुर कमाल के रघुनाथपुर में है। इससे पहले अप्रैल 2025 में बेगूसराय के ही हेमरा के पास पकड़े गए स्मैक कारोबारी आलोक ने बताया था कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड सन्नी कुमार है। जो कि हम लोगों को स्मैक उपलब्ध कराता है और हम लोग उसे खुदरा में बेचते हैं। नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा मुख्यालय डीएसपी निखिल कुमार ने बताया कि बेगूसराय पुलिस नशा के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। जहां कहीं से भी इनपुट मिलता है, उस पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। नशीला पदार्थ बरामद किया जा रहा है और नशा के कारोबारी पकड़े जा रहे हैं। ‘स्मैक लेने के बाद बहुत अच्छा महसूस होता है। पाउडर नाक से लेते हैं, तो मन को शांति मिलती है।’ ये बातें बेगूसराय के एक किशोर ने कहीं। उसे स्मैक लेने की लत है। किशोर एक चाय की दुकान के पास बैठा था। वह मोबाइल पर सफेद पाउडर को एटीएम कार्ड से मिला रहा था। इसी दौरान भास्कर रिपोर्टर ने उससे पूछा- ये एटीएम कार्ड किसका है? इस पर किशोर ने कहा- मां का एटीएम कार्ड लेकर आया हूं। इसी से पैसे निकालकर स्मैक खरीदता हूं। दरअसल, बेगूसराय में इन दिनों सूखे नशे की खपत बढ़ गई है। चाय की दुकान हो या पान की, हर जगह यह आसानी से उपलब्ध है। स्थिति यह है कि स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र पुड़िया को किताबों के बीच छिपाकर रखते हैं, ताकि उनके गार्जियन उसे देख न लें। तस्कर किन लोगों को टारगेट कर रहे हैं, कैसे नशे की लत लगाई जा रही, बेगूसराय में कहां से आती है नशे की खेप, पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले देखिए कुछ तस्वीरें… स्मैक में हम मिलावट नहीं करते: तस्कर बेगूसराय के बछवाड़ा में नशे का कारोबार खुलेआम हो रहा है। भास्कर रिपोर्टर की टीम बछवाड़ा के एक चाय दुकान पर पहुंची, जहां एक टूटी टेबल पर स्मैक की बहुत सारी पुड़िया रखी हुई थी। स्मैक की पुड़िया देखने पर तस्कर से बातचीत शुरू की तो वह बिना डर स्मैक की खासियत और उसकी क्वालिटी बताने लगा। स्मैक की शुद्धता और उसके वजन को लेकर तस्कर ने बताया कि विश्वास नहीं हो तो तराजू पर तोल लो। इसके अलावा कोई मिलावट नहीं है। यहां 100 रुपए से लेकर 300 रुपए तक में स्मैक की पुड़िया आसानी से बेची जा रही थी। पैसे नहीं होने पर बेबस दिखे युवा उधारी और बकाए का हिसाब-किताब बेखौफ चल रहा था, मानो किसी राशन की दुकान पर रोजमर्रा के किराना सामान का लेन-देन हो रहा हो। उसी टूटी मेज के पास कुछ ऐसे लोग भी पहुंचे थे, जो अपने पिछले नशीले सामान का उधार चुका रहे थे। वहीं कुछ ऐसे लाचार युवक भी थे, जिनके पास अगली खुराक के लिए पैसे नहीं बचे थे। वे तस्कर के आगे गिड़गिड़ाकर एक पुड़िया की भीख मांग रहे थे। अब पढ़ें कैसे लगाई जा रही किशोरों-युवाओं को नशे की लत… स्मैक वाली चाय पिलाकर नशे की लत लगाते एक तस्कर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि तस्करों के लिए सबसे महफूज ठिकाना चाय-पान की दुकान है। यहां आम लोगों की नजरों के सामने नशे का धंधा चलता है, फिर भी किसी को कुछ नहीं पता चलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दुकानों पर धंधा कोडवर्ड में चलता है। तस्कर नाबालिग और युवाओं को चाय पिलाने के बहाने चाय दुकान पर लाते और चाय वाले को कहते कड़क चाय चाहिए। कड़क चाय का मतलब स्मैक वाली चाय, पर ये कोड नया आदमी नहीं समझ पाता। चाय वाला स्मैक वाली चाय युवकों को देता। ऐसा हर दिन होता है। जबतक नाबालिग-युवाओं को पता चलता है कि वे स्मैक वाली चाय पी रहे, तब तक उन्हें कड़क चाय की लत लग चुकी होती है। फिर वो तस्करों के रेगूलर कस्टमर बन चुके होते। जब-जब नशे की तलब उठती है तो युवाओं को 250 से 300 रुपए में मिलने वाली स्मैक की पुड़िया दी जाती है। स्कूल में छात्रों की उपस्थिति में गिरावट- शिक्षक नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ शिक्षक बताते हैं कि स्कूल में 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों की उपस्थिति में गिरावट आई है। जो बच्चे कल तक गणित और विज्ञान के कठिन सवालों को चुटकियों में हल करते थे और कक्षा में अव्वल आते थे। वे आज अपना बस्ता फेंककर सुनसान बगीचों, कॉलेज-स्कूल के सुनसान जगह, खंडहरों और पुलियों के नीचे नशे में बेसुध पड़े मिलते हैं। बेगूसराय में कौन सप्लाई करता स्मैक, पुलिस ने क्या की है कार्रवाई… एक दिन पहले पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया था पुलिस के अनुसार बेगूसराय में शनिवार को साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र में वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान एसटीएफ, डीआईयू और स्थानीय थाने की पुलिस ने एक अर्तराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया था। तस्कर साहेबपुर थाना क्षेत्र स्थित रघुनाथपुर गांव का रहने वाला पप्पू यादव का बेटा सन्नी कुमार है। गिरफ्तार तस्कर पर विभिन्न थाना में आधे दर्जन मामले दर्ज हैं। सन्नी सिर्फ साहेबपुर कमाल क्षेत्र ही नहीं, बल्कि बेगूसराय जिले बड़ा स्मैक तस्कर है। यह असम और पश्चिम बंगाल से स्मैक मंगवाता है और बेगूसराय में विभिन्न इलाकों में फुटकर बेचने वाले को उपलब्ध कराता है। इसका सबसे अधिक स्मैक ट्रेन के रास्ते मालदा से आता है। जहां से हैंडलर (कूरियर) ट्रेन से स्मैक लेकर जमालपुर आते हैं और जमालपुर से सड़क मार्ग से होकर बेगूसराय पहुंचते हैं। थार-स्कॉर्पियो जैसी महंगी गाड़ियों से तस्करी पुलिस के अनुसार सन्नी थार और स्कॉर्पियो जैसी मंहंगी गाड़ी से चलकर छोटे-छोटे तस्करों को स्मैक पहुंचता है। सन्नी के गिरोह में रघुनाथपुर के 4-5 लड़के हैं। जबकि जिले के अलग-अलग क्षेत्र में उसने छोटे-छोटे तस्कर को स्मैक बेचने के काम में लगा रखा है। इसी साल मार्च में पश्चिम बंगाल का रहने वाला सोहेल खान मालदा से 1 किलो स्मैक लेकर सन्नी को पहुंचाने रघुनाथपुर आया था। यहां सन्नी और उसके गिरोह के लोगों ने उसे किडनैप कर लिया और 2 दिन तक अलग-अलग जगह पर छिपा कर रखा था। सोहेल के परिवार के लोगों से फिरौती तक मांगी गई थी, बाद में पुलिस के प्रयास से उसे मुक्त कराया गया था। जिले भर के छोटे-छोटे तस्करों को सन्नी अपना सही पता भी नहीं बताता था। कुछ लोग उसे खगड़िया जिला के मानसी का तो कुछ उसे मुंगेर का समझते थे। अपना सही पता नहीं बताता इसी साल बेगूसराय जिला मुख्यालय के लोहिया नगर झोपड़पट्टी में 133 ग्राम स्मैक के साथ पकड़े गए छोटू कुमार उर्फ कीडो ने बताया था कि उसे स्मैक सन्नी कुमार ने बचने के लिए दिया है। जो मानसी का है, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि सन्नी का घर मानसी नहीं, बल्कि साहेबपुर कमाल के रघुनाथपुर में है। इससे पहले अप्रैल 2025 में बेगूसराय के ही हेमरा के पास पकड़े गए स्मैक कारोबारी आलोक ने बताया था कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड सन्नी कुमार है। जो कि हम लोगों को स्मैक उपलब्ध कराता है और हम लोग उसे खुदरा में बेचते हैं। नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा मुख्यालय डीएसपी निखिल कुमार ने बताया कि बेगूसराय पुलिस नशा के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। जहां कहीं से भी इनपुट मिलता है, उस पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। नशीला पदार्थ बरामद किया जा रहा है और नशा के कारोबारी पकड़े जा रहे हैं।  

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