पूर्णिया में रक्षाबंधन पर सीमा सशस्त्र बल (एसएसबी) मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न स्कूलों की छात्राओं ने ड्यूटी पर तैनात जवानों को राखी बांधी। छात्राओं ने दीर्घायु और सुरक्षित जीवन की कामना की। एसएसबी मुख्यालय पूर्णिया में आयोजित इस कार्यक्रम में उन जवानों को सम्मानित किया गया जो अपने घरों और परिवारों से मीलों दूर रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। एसएसबी पूर्णिया के कमांडेंट जनार्दन मिश्रा ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का अटूट बंधन है। स्कूली बच्चों के साथ इस त्योहार को मनाना बेहद सुखद और उत्साहवर्धक रहा। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि ड्यूटी पर तैनात होने के बावजूद जब बच्चे यहां आकर राखी बांधते हैं, तो घर और कार्यक्षेत्र में कोई अंतर महसूस नहीं होता, बल्कि एक अलग ही खुशी मिलती है। उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि इसी तरह हर परिवार, भाई-बहन का प्रेम और अटूट रिश्ता हमेशा बना रहे।
घर से दूर हैं, लेकिन इन बच्चों ने खुशियां ला दी
पश्चिम बंगाल की रहने वाली एसएसबी की महिला जवान मलिना दास ने कहा कि घर से दूर रहने के कारण वे अपने भाइयों को राखी बांधने घर नहीं जा सकीं, लेकिन एसएसबी कैंप में आए स्कूली बच्चों ने सभी जवानों और अधिकारियों को राखी बांधकर घर की कमी को पूरा कर दिया। इस अपनत्व और सम्मान के लिए उन्होंने सभी बच्चों का धन्यवाद किया।
कक्षा 5 की छात्रा आशियाना खातून ने जवानों को राखी बांधने के बाद अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन का बहुत पावन पर्व है, जहां बहन भाई को राखी बांधती है और भाई जीवनभर उसकी रक्षा-सम्मान का वचन देता है। एसएसबी के जवानों के बीच आकर उन्हें राखी बांधना और उनका आशीर्वाद पाना बेहद गर्व और खुशी का अनुभव रहा।
राखी सुरक्षा का प्रतीक
रक्षाबंधन का पर्व केवल कलाई पर धागा बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, त्याग, समर्पण और परस्पर विश्वास का प्रतीक है। जब यह रक्षासूत्र सरहद और आंतरिक सुरक्षा में तैनात जवानों की कलाई पर बंधता है, तो इसका महत्व और व्यापक हो जाता है। यह पर्व याद दिलाता है कि एक सैनिक पूरे देश की रक्षा का दायित्व निभाता है और समाज का भी यह कर्तव्य है कि वह उनके त्याग का सम्मान कर उन्हें अपने परिवार का हिस्सा माने। पूर्णिया में रक्षाबंधन पर सीमा सशस्त्र बल (एसएसबी) मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न स्कूलों की छात्राओं ने ड्यूटी पर तैनात जवानों को राखी बांधी। छात्राओं ने दीर्घायु और सुरक्षित जीवन की कामना की। एसएसबी मुख्यालय पूर्णिया में आयोजित इस कार्यक्रम में उन जवानों को सम्मानित किया गया जो अपने घरों और परिवारों से मीलों दूर रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। एसएसबी पूर्णिया के कमांडेंट जनार्दन मिश्रा ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का अटूट बंधन है। स्कूली बच्चों के साथ इस त्योहार को मनाना बेहद सुखद और उत्साहवर्धक रहा। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि ड्यूटी पर तैनात होने के बावजूद जब बच्चे यहां आकर राखी बांधते हैं, तो घर और कार्यक्षेत्र में कोई अंतर महसूस नहीं होता, बल्कि एक अलग ही खुशी मिलती है। उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि इसी तरह हर परिवार, भाई-बहन का प्रेम और अटूट रिश्ता हमेशा बना रहे।
घर से दूर हैं, लेकिन इन बच्चों ने खुशियां ला दी
पश्चिम बंगाल की रहने वाली एसएसबी की महिला जवान मलिना दास ने कहा कि घर से दूर रहने के कारण वे अपने भाइयों को राखी बांधने घर नहीं जा सकीं, लेकिन एसएसबी कैंप में आए स्कूली बच्चों ने सभी जवानों और अधिकारियों को राखी बांधकर घर की कमी को पूरा कर दिया। इस अपनत्व और सम्मान के लिए उन्होंने सभी बच्चों का धन्यवाद किया।
कक्षा 5 की छात्रा आशियाना खातून ने जवानों को राखी बांधने के बाद अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन का बहुत पावन पर्व है, जहां बहन भाई को राखी बांधती है और भाई जीवनभर उसकी रक्षा-सम्मान का वचन देता है। एसएसबी के जवानों के बीच आकर उन्हें राखी बांधना और उनका आशीर्वाद पाना बेहद गर्व और खुशी का अनुभव रहा।
राखी सुरक्षा का प्रतीक
रक्षाबंधन का पर्व केवल कलाई पर धागा बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, त्याग, समर्पण और परस्पर विश्वास का प्रतीक है। जब यह रक्षासूत्र सरहद और आंतरिक सुरक्षा में तैनात जवानों की कलाई पर बंधता है, तो इसका महत्व और व्यापक हो जाता है। यह पर्व याद दिलाता है कि एक सैनिक पूरे देश की रक्षा का दायित्व निभाता है और समाज का भी यह कर्तव्य है कि वह उनके त्याग का सम्मान कर उन्हें अपने परिवार का हिस्सा माने।

