नालंदा में पारिवारिक कलह और सामाजिक अपमान से आहत होकर एक युवती ने खुदकुशी कर ली। गहरे पानी में छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतका की पहचान अर्जुन सरथुआ गांव निवासी शन्तन चौरसिया की पुत्री खुशी कुमारी(21) के रूप में की गई है। घटना खुदागंज थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, पूरे विवाद की शुरुआत खेत की सिंचाई को लेकर हुई थी। मृतका की मां विमला देवी ने थाने में दिए आवेदन में बताया कि शनिवार की सुबह लगभग छह बजे बेटी खुशी कुमारी के साथ अपने पान के खेत में सिंचाई करने गई हुई थी। उसी दौरान परिवार के ही गोतिया पक्ष के लोग वहां पहुंचे और पहले अपनी खेत की सिंचाई करने की जिद करने लगे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि विपक्षी पक्ष ने गाली-गलौज करते हुए दुर्व्यवहार किया और कथित तौर पर हाथापाई की नौबत आ गई। अपनी मां के साथ हुए दुर्व्यवहार और गाली-गलौज की घटना ने खुशी के दिलो-दिमाग पर गहरा असर डाला। वह इस अपमान और शर्मिंदगी को बर्दाश्त नहीं कर सकी। दिनभर वह काफी गुमसुम और मानसिक तनाव में रही। रात में परिजनों के साथ किसी तरह खाना खाने के बाद वह सोने चली गई, लेकिन सुबह होते ही वह बिस्तर से गायब मिली। जब सुबह परिजनों की नींद खुली और खुशी घर में नहीं दिखी, तो पूरे परिवार में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के घरों और खेतों में उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इंस्टाग्राम पर किया पोस्ट मां के मुताबिक खुशी का मोबाइल फोन चेक किया गया, तो उसने घर छोड़ने से पहले अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक अत्यंत भावुक और दर्दनाक सुसाइड नोट पोस्ट किया था। खुशी ने अपनी तस्वीर के साथ लिखे संदेश में अपनी माफी मांगते हुए लिखा कि वह अपनी मां के साथ हुए अपमान को सह नहीं पाई। उसने लिखा कि मां, मुझे माफ कर देना, मैं आपके लायक नहीं हूं। मैं आपको छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए जा रही हूं। मैंने आपसे वादा किया था कि आपको कोई गाली देगा या मारेगा तो मैं उसे नहीं छोड़ूंगी, लेकिन आज मैं कुछ नहीं कर पाई और अपने वादे से मुकर गई। इस समाज में बिना बाप (मानसिक रूप से अस्वस्थ पिता) की बेटी को जीने का कोई हक नहीं है। मुझे आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया गया है। मुझे जीने की हिम्मत नहीं बची है। खुशी पूरा घर संभालती थी मृतका के भाई विकास कुमार ने बताया कि पैर फिसलने से पानी में गिरने की आशंका है खुशी ही अपने घर का मुख्य सहारा थी। उसके पिता मानसिक रूप से बीमार रहते हैं, जिसके कारण घर की सारी जिम्मेदारी और बरेजा (पान की खेती) का काम खुशी ही संभालती थी। वह पढ़ाई में भी होनहार थी और उसने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ-साथ पुलिस भर्ती परीक्षा में भी भाग लिया था। मां ने थाने में दिया था आवेदन वहीं, इस संबंध में खुदागंज थानाध्यक्ष दुर्गेश कुमार गहलोत ने बताया कि मृतका की मां विमला देवी रविवार दोपहर में थाने पहुंची थी। गोतिया पक्ष द्वारा किए गए विवाद और गाली-गलौज की जानकारी देते हुए बेटी के लापता होने का मामला दर्ज कराया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल गुमशुदगी और संभावित अपहरण की धाराओं में सनहा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस अधिकारी जब मामले की तफ्तीश के लिए गांव पहुंचे और गोतिया के घर पूछताछ की, तो वहां केवल महिलाएं मौजूद थीं जिन्होंने विवाद और कहासुनी की बात स्वीकार की। पानी भरे गड्ढे में मिला शव पुलिस अभी मामले की छानबीन कर ही रही थी कि कुछ ही घंटों बाद ग्रामीणों द्वारा सूचना मिली कि गांव के खंधे में बने 25 से 30 फीट गहरे गड्ढे के पानी में एक युवती का शव देखा गया है। टीम तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थानीय ग्रामीणों एवं गोताखोरों की मदद से शव को बाहर निकाला, जिसकी शिनाख्त खुशी कुमारी के रूप में हुई। मानसिक तनाव में खुदकुशी की आशंका पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल भेज दिया है। थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया मामला मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने का प्रतीत हो रहा है, क्योंकि युवती ने मौत से पहले सोशल मीडिया पर भी इसका स्पष्ट उल्लेख किया है। हालांकि, परिजन के बयान और आवेदन के आधार पर मामले के सभी पहलुओं की गहन तकनीकी व विधिक जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और विस्तृत जांच पूरी होने के बाद दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नालंदा में पारिवारिक कलह और सामाजिक अपमान से आहत होकर एक युवती ने खुदकुशी कर ली। गहरे पानी में छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतका की पहचान अर्जुन सरथुआ गांव निवासी शन्तन चौरसिया की पुत्री खुशी कुमारी(21) के रूप में की गई है। घटना खुदागंज थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, पूरे विवाद की शुरुआत खेत की सिंचाई को लेकर हुई थी। मृतका की मां विमला देवी ने थाने में दिए आवेदन में बताया कि शनिवार की सुबह लगभग छह बजे बेटी खुशी कुमारी के साथ अपने पान के खेत में सिंचाई करने गई हुई थी। उसी दौरान परिवार के ही गोतिया पक्ष के लोग वहां पहुंचे और पहले अपनी खेत की सिंचाई करने की जिद करने लगे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि विपक्षी पक्ष ने गाली-गलौज करते हुए दुर्व्यवहार किया और कथित तौर पर हाथापाई की नौबत आ गई। अपनी मां के साथ हुए दुर्व्यवहार और गाली-गलौज की घटना ने खुशी के दिलो-दिमाग पर गहरा असर डाला। वह इस अपमान और शर्मिंदगी को बर्दाश्त नहीं कर सकी। दिनभर वह काफी गुमसुम और मानसिक तनाव में रही। रात में परिजनों के साथ किसी तरह खाना खाने के बाद वह सोने चली गई, लेकिन सुबह होते ही वह बिस्तर से गायब मिली। जब सुबह परिजनों की नींद खुली और खुशी घर में नहीं दिखी, तो पूरे परिवार में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के घरों और खेतों में उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इंस्टाग्राम पर किया पोस्ट मां के मुताबिक खुशी का मोबाइल फोन चेक किया गया, तो उसने घर छोड़ने से पहले अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक अत्यंत भावुक और दर्दनाक सुसाइड नोट पोस्ट किया था। खुशी ने अपनी तस्वीर के साथ लिखे संदेश में अपनी माफी मांगते हुए लिखा कि वह अपनी मां के साथ हुए अपमान को सह नहीं पाई। उसने लिखा कि मां, मुझे माफ कर देना, मैं आपके लायक नहीं हूं। मैं आपको छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए जा रही हूं। मैंने आपसे वादा किया था कि आपको कोई गाली देगा या मारेगा तो मैं उसे नहीं छोड़ूंगी, लेकिन आज मैं कुछ नहीं कर पाई और अपने वादे से मुकर गई। इस समाज में बिना बाप (मानसिक रूप से अस्वस्थ पिता) की बेटी को जीने का कोई हक नहीं है। मुझे आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया गया है। मुझे जीने की हिम्मत नहीं बची है। खुशी पूरा घर संभालती थी मृतका के भाई विकास कुमार ने बताया कि पैर फिसलने से पानी में गिरने की आशंका है खुशी ही अपने घर का मुख्य सहारा थी। उसके पिता मानसिक रूप से बीमार रहते हैं, जिसके कारण घर की सारी जिम्मेदारी और बरेजा (पान की खेती) का काम खुशी ही संभालती थी। वह पढ़ाई में भी होनहार थी और उसने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ-साथ पुलिस भर्ती परीक्षा में भी भाग लिया था। मां ने थाने में दिया था आवेदन वहीं, इस संबंध में खुदागंज थानाध्यक्ष दुर्गेश कुमार गहलोत ने बताया कि मृतका की मां विमला देवी रविवार दोपहर में थाने पहुंची थी। गोतिया पक्ष द्वारा किए गए विवाद और गाली-गलौज की जानकारी देते हुए बेटी के लापता होने का मामला दर्ज कराया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल गुमशुदगी और संभावित अपहरण की धाराओं में सनहा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस अधिकारी जब मामले की तफ्तीश के लिए गांव पहुंचे और गोतिया के घर पूछताछ की, तो वहां केवल महिलाएं मौजूद थीं जिन्होंने विवाद और कहासुनी की बात स्वीकार की। पानी भरे गड्ढे में मिला शव पुलिस अभी मामले की छानबीन कर ही रही थी कि कुछ ही घंटों बाद ग्रामीणों द्वारा सूचना मिली कि गांव के खंधे में बने 25 से 30 फीट गहरे गड्ढे के पानी में एक युवती का शव देखा गया है। टीम तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थानीय ग्रामीणों एवं गोताखोरों की मदद से शव को बाहर निकाला, जिसकी शिनाख्त खुशी कुमारी के रूप में हुई। मानसिक तनाव में खुदकुशी की आशंका पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल भेज दिया है। थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया मामला मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने का प्रतीत हो रहा है, क्योंकि युवती ने मौत से पहले सोशल मीडिया पर भी इसका स्पष्ट उल्लेख किया है। हालांकि, परिजन के बयान और आवेदन के आधार पर मामले के सभी पहलुओं की गहन तकनीकी व विधिक जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और विस्तृत जांच पूरी होने के बाद दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

