सुप्रीम कोर्ट बोला-7 दिन में फाइनल करें हवाई किराया नियम:अगर एयरलाइन्स न मानें तो प्लेन खड़े कर दें; सरकार ने 3 हफ्ते मांगे थे

सुप्रीम कोर्ट बोला-7 दिन में फाइनल करें हवाई किराया नियम:अगर एयरलाइन्स न मानें तो प्लेन खड़े कर दें; सरकार ने 3 हफ्ते मांगे थे

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नियम बनाने का काम तेज कर दिया गया है। इन नियमों का मकसद भारत के विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाना है और इन्हें तीन हफ्ते में अंतिम रूप दे दिया जाएगा। सरकार ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने नियमों का ड्राफ्ट सीलबंद लिफाफे में रखा। केंद्र ने बताया कि ड्राफ्ट पर कुछ अंतिम चर्चा चल रही है। बेंच ने कहा, “इसे सात दिन के भीतर प्रकाशित कीजिए। अगर एयरलाइंस पालन नहीं कर रही हैं तो उन्हें जमीन पर खड़ा कर दीजिए।” केंद्र ने नियम जल्द पूरा करने का भरोसा दिया केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने कहा कि नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तीन हफ्ते में पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा, “हमने नियम बनाने का काम तेज कर दिया है। हमें तीन हफ्ते दीजिए, हम इसका अंतिम रूप जारी कर देंगे।” कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में रखे गए ड्राफ्ट नियमों को देखा। बेंच ने कहा, “एक व्यवस्था सुझाई गई है, लेकिन नियामक को लेकर हम निश्चित नहीं हैं।” बेंच ने कहा कि कौशिक ने ड्राफ्ट नियमों को अंतिम रूप देने और तीन हफ्ते में उसके सामने रखने के लिए और समय मांगा है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को तय की गई। याचिका में स्वतंत्र नियामक बनाने की मांग यह सुनवाई सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर हुई। उन्होंने पूरे नागरिक विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत और स्वतंत्र नियामक बनाने की मांग की है। याचिका में भारत की निजी एयरलाइंस की ओर से हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्क में होने वाले “अनिश्चित उतार-चढ़ाव” को नियंत्रित करने के लिए नियामकीय दिशा-निर्देश बनाने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रविंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि नए नियम लागू होने तक पुराने नियम ही चल रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों की “इच्छाशक्ति की कमी” और मौजूदा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया। श्रीवास्तव ने कहा कि एयरलाइंस बहुत ज्यादा किराया वसूल रही हैं। उन्होंने संसद में नागरिक विमानन मंत्री के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने कहा था कि वह हवाई किराए की अधिकतम सीमा तय नहीं कर सकती। 13 जुलाई को कोर्ट ने नियम पेश करने को कहा था सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई को केंद्र से भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए गए नियम उसके सामने रखने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि नियमों को सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाए, चाहे उन्हें संसद के सामने रखा गया हो या नहीं। 15 मई को याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हवाई किराए को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है। कोर्ट ने केंद्र से यात्रियों को राहत देने के लिए कहा था। उस समय केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया था कि 2024 का नया कानून जनवरी 2025 में लागू हो गया है। इसके तहत बनाए जाने वाले नियम तैयार किए जा रहे हैं। त्योहारों में किराए की बढ़ोतरी पर कोर्ट ने जताई थी चिंता पिछले साल 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर केंद्र और अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। याचिका में पूरे नागरिक विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा के लिए मजबूत और स्वतंत्र नियामक की मांग की गई थी। जनवरी में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह हवाई किराए में होने वाले “अनिश्चित उतार-चढ़ाव” में दखल देगा। कोर्ट ने त्योहारों के दौरान किराए में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया था। कोर्ट ने एयरलाइंस की ओर से हवाई किराए में की जाने वाली बहुत ज्यादा बढ़ोतरी को “शोषण” बताया था। उसने केंद्र और नागरिक विमानन महानिदेशालय से याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा था। याचिका में बैगेज और अतिरिक्त शुल्क का मुद्दा याचिका में दावा किया गया है कि सभी निजी एयरलाइंस ने इकोनॉमी क्लास के यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दी है। इसमें कहा गया है कि पहले टिकट में शामिल इस सुविधा को अब कमाई का नया जरिया बना दिया गया है। याचिका के मुताबिक, अब चेक-इन के लिए केवल एक बैग की अनुमति देने की नई नीति और चेक-इन बैगेज का इस्तेमाल नहीं करने वाले यात्रियों को किसी छूट, मुआवजे या लाभ का प्रावधान नहीं होना इस व्यवस्था की मनमानी और भेदभावपूर्ण प्रकृति दिखाता है। याचिका में कहा गया है कि अभी किसी भी प्राधिकरण के पास हवाई किराए या अतिरिक्त शुल्क की समीक्षा करने या उसकी अधिकतम सीमा तय करने का अधिकार नहीं है। इससे एयरलाइंस को छिपे हुए शुल्क और अनिश्चित कीमतों के जरिए उपभोक्ताओं का शोषण करने का मौका मिलता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि एयरलाइंस का बिना नियमन वाला, अपारदर्शी और शोषणकारी व्यवहार मनमाने किराए में बढ़ोतरी, सेवाओं में एकतरफा कमी, जमीन पर शिकायतों का समाधान नहीं होने और मनमाने डायनामिक प्राइसिंग एल्गोरिदम के रूप में सामने आता है। याचिका के मुताबिक, यह व्यवहार नागरिकों के समानता, आने-जाने की स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीवन जीने के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। त्योहार और खराब मौसम में यात्रियों पर ज्यादा असर याचिका में कहा गया है कि नियामकीय सुरक्षा नहीं होने से त्योहारों या मौसम खराब होने के दौरान किराए में मनमानी बढ़ोतरी होती है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और आखिरी समय में टिकट बुक करने वाले यात्रियों पर पड़ता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि किराया तय करने वाले एल्गोरिदम, टिकट रद्द करने की नीतियों, सेवाएं जारी रखने और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को नियंत्रित नहीं करना राज्य के संवैधानिक दायित्व में चूक है। इसके चलते याचिका में तत्काल न्यायिक दखल की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि एयरलाइंस को मांग के आधार पर कीमतें बढ़ाने से रोकने वाला कोई नियम नहीं है और जरूरी सेवाओं में उन्हें ऐसी छूट देना उचित नहीं है।

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