सुपौल में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित:DM सावन कुमार बोले- विवाद सुलझाने का चलन बढ़ा; छोटे ऋण-ट्रैफिक चालान पर जोर

सुपौल में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित:DM सावन कुमार बोले- विवाद सुलझाने का चलन बढ़ा; छोटे ऋण-ट्रैफिक चालान पर जोर

सुपौल के व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गई। इसका आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने किया। उद्घाटन समारोह में डीएम और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के उपाध्यक्ष सावन कुमार ने कहा कि अब लोग सालों तक मुकदमा चलने का इंतजार करने के बजाय लोक अदालत में आपसी समझौते से विवाद खत्म कराने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यह लोगों में आई जागरूकता और बदलाव का संकेत है। डीएम ने बताया कि नीलाम पत्र के कई मामलों में लोग 10 से 20 साल से छोटे-बड़े बकाये के कारण परेशान हैं। इनमें 5 हजार, 10 हजार और 20 हजार रुपए जैसे छोटे दावे भी शामिल हैं। कुछ मामले लाखों से करोड़ों रुपए तक के हैं। लोग अब लोक अदालत के जरिए इन मामलों को निपटाकर प्रमाण पत्र लेना चाहते हैं। सालों पुराने ऋण मामलों का भी हुआ निपटारा उन्होंने छोटे ग्रामीण बैंक ऋण मामलों का भी जिक्र किया। डीएम ने कहा कि सालों पुराने ऋण मामलों को भी समझौते के आधार पर खत्म करने के लिए लोग आगे आ रहे हैं। ट्रैफिक चालान के निपटारे में भी हाल में अच्छे नतीजे मिले हैं। बिहार सरकार के नए नियम के बाद लोक अदालत में पुराने ट्रैफिक चालान को रियायत के साथ जमा करने का मौका मिला। इससे बड़ी संख्या में चालानों का निपटारा हुआ। सरपंचों के जरिए किया जाएगा प्रचार डीएम ने कहा कि लोक अदालत के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विधिक स्वयंसेवकों, सचिवों और पंचायत स्तर पर सरपंचों के जरिए प्रचार किया जाएगा। इससे ग्रामीणों को लोक अदालत की तारीख और प्रक्रिया की जानकारी समय पर मिल सकेगी। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार बच्चन, एसपी शस्य आरएस और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरख मौजूद थे। इनके अलावा न्यायिक, प्रशासनिक, बैंक और ट्रैफिक विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए। डीएम ने अधिकारियों से आम लोगों के हित को प्राथमिकता देते हुए ज्यादा से ज्यादा मामलों को समझौते से निपटाने की अपील की। सुपौल के व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गई। इसका आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने किया। उद्घाटन समारोह में डीएम और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के उपाध्यक्ष सावन कुमार ने कहा कि अब लोग सालों तक मुकदमा चलने का इंतजार करने के बजाय लोक अदालत में आपसी समझौते से विवाद खत्म कराने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यह लोगों में आई जागरूकता और बदलाव का संकेत है। डीएम ने बताया कि नीलाम पत्र के कई मामलों में लोग 10 से 20 साल से छोटे-बड़े बकाये के कारण परेशान हैं। इनमें 5 हजार, 10 हजार और 20 हजार रुपए जैसे छोटे दावे भी शामिल हैं। कुछ मामले लाखों से करोड़ों रुपए तक के हैं। लोग अब लोक अदालत के जरिए इन मामलों को निपटाकर प्रमाण पत्र लेना चाहते हैं। सालों पुराने ऋण मामलों का भी हुआ निपटारा उन्होंने छोटे ग्रामीण बैंक ऋण मामलों का भी जिक्र किया। डीएम ने कहा कि सालों पुराने ऋण मामलों को भी समझौते के आधार पर खत्म करने के लिए लोग आगे आ रहे हैं। ट्रैफिक चालान के निपटारे में भी हाल में अच्छे नतीजे मिले हैं। बिहार सरकार के नए नियम के बाद लोक अदालत में पुराने ट्रैफिक चालान को रियायत के साथ जमा करने का मौका मिला। इससे बड़ी संख्या में चालानों का निपटारा हुआ। सरपंचों के जरिए किया जाएगा प्रचार डीएम ने कहा कि लोक अदालत के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विधिक स्वयंसेवकों, सचिवों और पंचायत स्तर पर सरपंचों के जरिए प्रचार किया जाएगा। इससे ग्रामीणों को लोक अदालत की तारीख और प्रक्रिया की जानकारी समय पर मिल सकेगी। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार बच्चन, एसपी शस्य आरएस और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरख मौजूद थे। इनके अलावा न्यायिक, प्रशासनिक, बैंक और ट्रैफिक विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए। डीएम ने अधिकारियों से आम लोगों के हित को प्राथमिकता देते हुए ज्यादा से ज्यादा मामलों को समझौते से निपटाने की अपील की।  

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