सुपौल के किशनपुर थाना क्षेत्र में कथित फर्जी वंशावली तैयार करने, मदरसा सचिव से रंगदारी मांगने और न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने के मामले में पुलिस ने मोहम्मद अफरोज को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर अपने भाई को कथित फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर किशोर घोषित कराने का आरोप भी है। पुलिस ने 26 अक्टूबर को किशनपुर थाना कांड संख्या 247/26 दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। मदरसा सचिव से हर महीने 10 हजार रुपये मांगने का आरोप नौआबाखर निवासी इमरान अहमद ने किशनपुर थानाध्यक्ष को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी। आवेदन के मुताबिक, 24 अक्टूबर 2026 की शाम करीब छह बजे इमरान अहमद बुलेट मोटरसाइकिल से किशनपुर बाजार जा रहे थे। इसी दौरान बेलही पुल के पास कुछ लोगों ने उन्हें रोककर गाली-गलौज की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मदरसा का सचिव बने रहने के एवज में उनसे हर महीने 10 हजार रुपये रंगदारी मांगी गई। रुपये नहीं देने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने परिवार की फर्जी वंशावली और पारिवारिक सूची तैयार करने का आरोप भी लगाया है। भाई को किशोर घोषित कराने के लिए फर्जी प्रमाणपत्र देने की शिकायत आवेदन में मोहम्मद अफरोज पर अपने भाई नूर हसन को किशोर साबित करने के लिए कथित फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र किशोर न्याय परिषद, सुपौल में प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, मध्य विद्यालय कमलदह के विद्यालय परित्याग प्रमाणपत्र में नूर हसन की जन्मतिथि 1 फरवरी 2007 दर्ज थी। आवेदन में दावा किया गया है कि 16 जनवरी 2024 को विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने परिषद में उपस्थित होकर बताया था कि संबंधित व्यक्ति का विद्यालय में कभी नामांकन ही नहीं हुआ था। इसके बाद थरबिट्टा पूरब पुनर्वास विद्यालय से दूसरा प्रमाणपत्र बनवाकर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया। मैट्रिक परीक्षा के रिकॉर्ड से जन्मतिथि पर उठाए सवाल शिकायतकर्ता के मुताबिक, नूर हसन वर्ष 2019 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मैट्रिक परीक्षा में शामिल होकर प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुआ था। आवेदन में दावा किया गया है कि परीक्षा संबंधी दस्तावेजों और आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि 6 अक्टूबर 2003 दर्ज है। शिकायतकर्ता ने जन्मतिथि में अंतर के आधार पर प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 25 अप्रैल 2025 को किशोर न्याय परिषद ने नूर हसन को किशोर घोषित कर दिया था और बाद में उसे जमानत मिल गई थी। 26 अक्टूबर को दर्ज हुआ था केस, आरोपी गिरफ्तार पुलिस के अनुसार, फर्जी वंशावली तैयार करने के मामले में 26 अक्टूबर 2026 को किशनपुर थाना कांड संख्या 247/26 दर्ज किया गया था। इसी मामले में मोहम्मद अफरोज को गिरफ्तार किया गया है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। किशनपुर थानाध्यक्ष ज्ञान रंजन कुमार ने शुक्रवार शाम करीब साढ़े पांच बजे बताया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी। सुपौल के किशनपुर थाना क्षेत्र में कथित फर्जी वंशावली तैयार करने, मदरसा सचिव से रंगदारी मांगने और न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने के मामले में पुलिस ने मोहम्मद अफरोज को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर अपने भाई को कथित फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर किशोर घोषित कराने का आरोप भी है। पुलिस ने 26 अक्टूबर को किशनपुर थाना कांड संख्या 247/26 दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। मदरसा सचिव से हर महीने 10 हजार रुपये मांगने का आरोप नौआबाखर निवासी इमरान अहमद ने किशनपुर थानाध्यक्ष को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी। आवेदन के मुताबिक, 24 अक्टूबर 2026 की शाम करीब छह बजे इमरान अहमद बुलेट मोटरसाइकिल से किशनपुर बाजार जा रहे थे। इसी दौरान बेलही पुल के पास कुछ लोगों ने उन्हें रोककर गाली-गलौज की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मदरसा का सचिव बने रहने के एवज में उनसे हर महीने 10 हजार रुपये रंगदारी मांगी गई। रुपये नहीं देने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने परिवार की फर्जी वंशावली और पारिवारिक सूची तैयार करने का आरोप भी लगाया है। भाई को किशोर घोषित कराने के लिए फर्जी प्रमाणपत्र देने की शिकायत आवेदन में मोहम्मद अफरोज पर अपने भाई नूर हसन को किशोर साबित करने के लिए कथित फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र किशोर न्याय परिषद, सुपौल में प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, मध्य विद्यालय कमलदह के विद्यालय परित्याग प्रमाणपत्र में नूर हसन की जन्मतिथि 1 फरवरी 2007 दर्ज थी। आवेदन में दावा किया गया है कि 16 जनवरी 2024 को विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने परिषद में उपस्थित होकर बताया था कि संबंधित व्यक्ति का विद्यालय में कभी नामांकन ही नहीं हुआ था। इसके बाद थरबिट्टा पूरब पुनर्वास विद्यालय से दूसरा प्रमाणपत्र बनवाकर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया। मैट्रिक परीक्षा के रिकॉर्ड से जन्मतिथि पर उठाए सवाल शिकायतकर्ता के मुताबिक, नूर हसन वर्ष 2019 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मैट्रिक परीक्षा में शामिल होकर प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुआ था। आवेदन में दावा किया गया है कि परीक्षा संबंधी दस्तावेजों और आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि 6 अक्टूबर 2003 दर्ज है। शिकायतकर्ता ने जन्मतिथि में अंतर के आधार पर प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 25 अप्रैल 2025 को किशोर न्याय परिषद ने नूर हसन को किशोर घोषित कर दिया था और बाद में उसे जमानत मिल गई थी। 26 अक्टूबर को दर्ज हुआ था केस, आरोपी गिरफ्तार पुलिस के अनुसार, फर्जी वंशावली तैयार करने के मामले में 26 अक्टूबर 2026 को किशनपुर थाना कांड संख्या 247/26 दर्ज किया गया था। इसी मामले में मोहम्मद अफरोज को गिरफ्तार किया गया है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। किशनपुर थानाध्यक्ष ज्ञान रंजन कुमार ने शुक्रवार शाम करीब साढ़े पांच बजे बताया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

