सुगम परिवहन में पुरानी बसों के इस्तेमाल पर सवाल:भनोत बोले-रेडियम लगाई ये नई बस हैं, महापौर ने कहा-पुरानी की ओवरहालिंग करने में गलत क्या

सुगम परिवहन में पुरानी बसों के इस्तेमाल पर सवाल:भनोत बोले-रेडियम लगाई ये नई बस हैं, महापौर ने कहा-पुरानी की ओवरहालिंग करने में गलत क्या

उज्जैन में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ की बस में आग के बाद कांग्रेस सरकार पर हमलावर हो गई है। पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोत ने जबलपुर की सार्वजनिक यात्री बस सेवा पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा है कि पुरानी बसों को नया बताकर चलाया जा रहा है। हालांकि काउंटर करते हुए महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू कहते हैं कि ओवरहॉलिंग के बाद पुरानी बसों को सड़क पर उतारना गलत नहीं है, आमजन को सुविधा तो मिल रही है। भनोत का आरोप-नई बताकर पुरानी बसें चला रही सरकार पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोत ने आरोप लगाया कि सरकार पुरानी बसों की डेंटिंग-पेंटिंग और रेडियम कराकर उन्हें नई बस के रूप में जनता के सामने पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि बसों को लेकर भ्रष्टाचार की चर्चा चल रही थी और आग की घटना ने इसकी हकीकत सामने ला दी। जबलपुर में 55 पुरानी बसें चलाने की बात जबलपुर में 2 अक्टूबर को 45 पीएम ई-बसों के साथ मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की 55 बसों समेत 100 बसों का संचालन शुरू किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इनमें 45 ई-बसें और 55 सुगम परिवहन बसें शामिल हैं। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू के अनुसार 55 पुरानी बसों को सर्विसिंग, रंग-रोगन और ओवरहॉलिंग के बाद सड़क पर उतारा गया है। उनका कहना है कि बसों को अंदर और बाहर से ठीक किया गया है और आने वाले समय में शहर में बसों की संख्या 160 से 170 तक पहुंचाई जाएगी। नई सेवा, पुरानी बसें मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद सरकारी बस सेवा को नए स्वरूप में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के नाम से शुरू किया गया। 25 सितंबर 2026 को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सेवा का शुभारंभ किया। पहले चरण में सात शहरों को इससे जोड़ा गया। योजना के तहत 2031 तक 15 हजार बसें संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है। जबलपुर में नई ई-बसों के साथ पहले से संचालित मेट्रो बसों को भी सर्विसिंग और ओवरहॉलिंग के बाद नई व्यवस्था में शामिल किया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि पुरानी बसों को सड़क पर उतारने से पहले उनकी उम्र, फिटनेस, तकनीकी सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा की जांच किस स्तर पर की गई। हाईकोर्ट भी 15 साल पुरानी बसों पर रोक को सही ठहरा चुका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में 15 साल से अधिक पुरानी व्यावसायिक बसों के संचालन पर राज्य सरकार की कार्रवाई को सही माना था। कोर्ट के आदेश में 14 नवंबर 2025 के उस निर्देश का उल्लेख है, जिसमें 15 साल से अधिक पुराने वाहनों के संचालन पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही संबंधित प्रावधान की वैधता बरकरार रख चुकी थी। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन में पुरानी बसों के इस्तेमाल के मामले में केवल रंग-रोगन या बाहरी बदलाव पर्याप्त नहीं माने जा सकते। बस की वास्तविक उम्र, वैध फिटनेस, परमिट और तकनीकी सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी है। GPS, CCTV और पैनिक बटन का दावा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को आधुनिक और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के रूप में विस्तार देने की योजना है। नई बसों में जीपीएस, सीसीटीवी, पैनिक बटन और लाइव ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है। ऐसे में उज्जैन की आग की घटना के बाद यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि सेवा से जुड़ी प्रत्येक बस की फिटनेस और सुरक्षा जांच किस प्रक्रिया से हुई है।

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