Ajit Doval China Visit: चीन दौरे पर पहुंचे भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बीजिंग में चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है। इस उच्चस्तरीय मुलाकात में दोनों देशों के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने आपसी आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श किया।
यह बैठक भारत और चीन के बीच सीमा प्रश्न पर आयोजित होने वाली 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता से ठीक पहले हुई है। इस वार्ता में NSA अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी आमने-सामने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों एशियाई महाशक्तियों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने और आपसी विश्वास बहाल करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।
सीमा वार्ता के 25वें दौर से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुलाकात की पुष्टि की। दूतावास के अनुसार, दोनों नेताओं ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी सहमति का पालन करते हुए द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। NSA डोभाल और चीनी उपराष्ट्रपति के बीच हुई यह बातचीत 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करती है।
जून में BRICS बैठक के बाद डोभाल-वांग यी की दूसरी मुलाकात
NSA अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच होने वाली यह बैठक हाल के महीनों में दूसरी बड़ी मुलाकात है। इससे पहले जून में नई दिल्ली में आयोजित BRICS राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पूर्व में हुई इन वार्ताओं को रचनात्मक और भविष्यगामी बताया थआ, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर होने के संकेत मिल सकते हैं।
‘प्रतिद्वंद्वी नहीं, विकास साझेदार हैं भारत-चीन’
यह कूटनीतिक हलचल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच तियानजिन SCO शिखर सम्मेलन और कजान बैठक के दौरान हुई बातचीत की निरंतरता है। दोनों शीर्ष नेताओं ने इस बात पर जोर दिया था कि भारत और चीन एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि विकास साझेदार हैं। सीमा विवादों को आपसी मतभेद तक ही सीमित रखा जाना चाहिए और उन्हें सीधे टकराव का रूप नहीं लेने देना चाहिए। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक दृष्टिकोण के अनुसार, 2.8 अरब की कुल आबादी वाले इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच स्थिर संबंध पूरे एशिया और बहुध्रुवीय विश्व की स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

