पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम का आयोजन हुआ है। कार्यक्रम मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में है। इसमें राज्य के अलग-अलग जिलों से फरियादी अपनी समस्याएं लेकर मुख्यमंत्री के सामने पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री खुद लोगों की शिकायतें सुन रहे हैं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को उनके समाधान के लिए निर्देश दे रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों की शिकायतों को सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाना और प्रशासनिक स्तर पर उनका समय पर समाधान करना है। भूमि विवाद, राजस्व संबंधी मामले, कानून-व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा पेंशन में देरी और स्वास्थ्य-शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। कुछ तस्वीरें… मुख्यमंत्री खुद सुन रहे लोगों की समस्याएं सहयोग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक-एक कर फरियादियों की शिकायतें सुन रहे हैं। लोग अपनी समस्याओं से संबंधित आवेदन और दस्तावेज लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंच रहे हैं। शिकायतों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दे रहे हैं।
भूमि विवाद और पेंशन से जुड़ी शिकायतें प्रमुख जनसुनवाई के दौरान जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्थानीय प्रशासन से संबंधित शिकायतें सबसे ज्यादा आती है। भूमि विवाद के कारण परेशान लोगों को राजस्व विभाग के स्तर पर समाधान की उम्मीद होती है। वहीं, पेंशन में देरी और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने जैसी समस्याओं को लेकर भी लोग पहुंचते है।
10वें, 20वें और 25वें दिन होती है शिकायतों की निगरानी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हर महीने के दूसरे मंगलवार को सहयोग कार्यक्रम के माध्यम से आम लोगों की समस्याएं सुनते हैं। शिकायतों के निष्पादन के लिए अधिकतम 30 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से 10वें, 20वें और 25वें दिन मामलों की प्रगति की निगरानी करने और संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेजने की व्यवस्था बताई गई है। अधिकारियों को 30 दिनों में शिकायतों का समाधान करना होगा। निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू किए जाने का प्रावधान बताया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों को लंबित रहने से रोकना, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और आम लोगों को समय पर न्याय दिलाना है। पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम का आयोजन हुआ है। कार्यक्रम मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में है। इसमें राज्य के अलग-अलग जिलों से फरियादी अपनी समस्याएं लेकर मुख्यमंत्री के सामने पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री खुद लोगों की शिकायतें सुन रहे हैं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को उनके समाधान के लिए निर्देश दे रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों की शिकायतों को सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाना और प्रशासनिक स्तर पर उनका समय पर समाधान करना है। भूमि विवाद, राजस्व संबंधी मामले, कानून-व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा पेंशन में देरी और स्वास्थ्य-शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। कुछ तस्वीरें… मुख्यमंत्री खुद सुन रहे लोगों की समस्याएं सहयोग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक-एक कर फरियादियों की शिकायतें सुन रहे हैं। लोग अपनी समस्याओं से संबंधित आवेदन और दस्तावेज लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंच रहे हैं। शिकायतों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दे रहे हैं।
भूमि विवाद और पेंशन से जुड़ी शिकायतें प्रमुख जनसुनवाई के दौरान जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्थानीय प्रशासन से संबंधित शिकायतें सबसे ज्यादा आती है। भूमि विवाद के कारण परेशान लोगों को राजस्व विभाग के स्तर पर समाधान की उम्मीद होती है। वहीं, पेंशन में देरी और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने जैसी समस्याओं को लेकर भी लोग पहुंचते है।
10वें, 20वें और 25वें दिन होती है शिकायतों की निगरानी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हर महीने के दूसरे मंगलवार को सहयोग कार्यक्रम के माध्यम से आम लोगों की समस्याएं सुनते हैं। शिकायतों के निष्पादन के लिए अधिकतम 30 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से 10वें, 20वें और 25वें दिन मामलों की प्रगति की निगरानी करने और संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेजने की व्यवस्था बताई गई है। अधिकारियों को 30 दिनों में शिकायतों का समाधान करना होगा। निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू किए जाने का प्रावधान बताया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों को लंबित रहने से रोकना, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और आम लोगों को समय पर न्याय दिलाना है।

