इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट परिसर के आसपास अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने कहा कि अब तक 57 और अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, लेकिन कुछ अवैध कब्जे अब भी बाकी हैं। कोर्ट ने इन सभी को पांच सप्ताह में हटाने को कहा है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने यह आदेश स्वतः संज्ञान जनहित याचिका ‘अनुराधा सिंह व अन्य’ पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट को बताया गया कि उसके पहले के आदेशों के बाद 14 अवैध निर्माण हटाए गए थे। इसके बाद 57 और अतिक्रमण हटाए गए। इस संबंध में नगर निगम लखनऊ के जोन-1 के जोनल अधिकारी ने कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश की। कोर्ट ने साफ किया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई है। उसने बचे हुए सभी अवैध कब्जों को 7 अप्रैल के आदेश के अनुसार हटाने का निर्देश दिया। साथ ही 4 अगस्त के आदेश में बताई गई प्रक्रिया और सावधानियों का पालन करने को भी कहा। कोर्ट के 4 अगस्त के आदेश के तहत कथित अतिक्रमण करने वालों को आखिरी मौका दिया जाना है। उन्हें अपने चैंबर या दुकान खाली करने या सक्षम अधिकारी के सामने कब्जे का वैध आधार बताने का मौका देना होगा। अगर तय समय में ऐसा नहीं किया जाता है, तो अवैध अतिक्रमण को तोड़ा जा सकेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर नोटिस नहीं पहुंच पाता है, तो उसे एक हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित कराया जाए। इसके बाद संबंधित लोगों को कम से कम 10 दिन का समय दिया जाए। न्यायिक कामकाज पर असर न पड़े, इसलिए जरूरत पड़ने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रविवार को भी की जा सकती है। कोर्ट ने पुलिस आयुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे आपसी तालमेल से नगर निगम अधिकारियों को पर्याप्त प्रशासनिक और पुलिस सहायता दें। इस मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।

