सिर्फ 1 या 2 दिन पीरियड आना क्या सामान्य है? NHS से जानें कब हो सकती है परेशानी

सिर्फ 1 या 2 दिन पीरियड आना क्या सामान्य है? NHS से जानें कब हो सकती है परेशानी

Irregular Periods: पीरियड महिलाओं के शरीर में होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन हर महिला में इसका पैटर्न एक जैसा नहीं होता। किसी को पीरियड कुछ दिनों तक रहता है, तो किसी को इसकी अवधि कम हो सकती है। ऐसे में सिर्फ 1 या 2 दिन पीरियड आना सामान्य है या किसी परेशानी का संकेत, इसे लेकर कई महिलाओं के मन में सवाल रहता है। आइए जानते हैं पीरियड कितने दिन तक रहना सामान्य माना जाता है और किन बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है।

पीरियड 1 या 2 दिन आए तो क्या यह सामान्य है?

ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, 21 से 35 दिन के बीच पीरियड आना सामान्य माना जाता है। पीरियड आमतौर पर 2 से 7 दिन तक रह सकता है और औसतन करीब 5 दिन तक रहता है। इसलिए अगर किसी महिला को पीरियड 2 दिन तक आता है, तो यह सामान्य अवधि के अंदर हो सकता है। लेकिन अगर पहले पीरियड ज्यादा दिनों तक आता था और अचानक इसकी अवधि कम हो गई है, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। NHS के अनुसार, पीरियड के सामान्य पैटर्न में बदलाव होने पर डॉक्टर से सलाह लेना सही रहता है।

पीरियड में बदलाव किस तरह हो सकता है?

पीरियड में बदलाव सिर्फ दिनों की संख्या में ही नहीं होता। कभी पीरियड जल्दी या देर से आ सकता है, ब्लीडिंग कम या ज्यादा हो सकती है या पीरियड कितने दिन रहेगा, इसमें बदलाव हो सकता है। अगर दो पीरियड के बीच का अंतर 21 दिन से कम या 35 दिन से ज्यादा हो, तो इसे अनियमित पीरियड माना जाता है।

अनियमित पीरियड के क्या कारण हो सकते हैं?

नेशनल हेल्थ सर्विस ( NHS) के अनुसार, पीरियड अनियमित होने के कई कारण हो सकते हैं। पीरियड शुरू होने के शुरुआती सालों में ऐसा होना आम है। मेनोपॉज के करीब पहुंचने पर भी पीरियड का पैटर्न बदल सकता है। इसके अलावा गर्भावस्था, हार्मोनल गर्भनिरोधक का इस्तेमाल, वजन का बहुत ज्यादा बढ़ना या कम होना, तनाव और चिंता और बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने से भी पीरियड अनियमित हो सकता है। कुछ मामलों में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) या थायरॉइड की समस्या भी इसकी वजह हो सकती है।

पीरियड रुकने की क्या वजह हो सकती है?

कई बार पीरियड देर से आ सकता है या कुछ समय के लिए रुक भी सकता है। नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, इसके आम कारणों में गर्भावस्था, तनाव, अचानक वजन कम होना, बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करना और मेनोपॉज के करीब पहुंचना शामिल हैं।

पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग कब मानी जाती है?

हर महिला में पीरियड के दौरान ब्लीडिंग की मात्रा अलग हो सकती है। लेकिन अगर हर 1 से 2 घंटे में पैड या टैम्पोन बदलना पड़ रहा है या एक साथ दो तरह के पीरियड प्रोडक्ट इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं, तो इसे ज्यादा ब्लीडिंग माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

पीरियड के दौरान दर्द होना कितना सामान्य है?

पीरियड के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द होना आम है। यह दर्द गर्भाशय के सिकुड़ने की वजह से होता है। लेकिन अगर दर्द इतना ज्यादा है कि रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

PMS क्या होता है?

पीरियड शुरू होने से पहले शरीर में हार्मोन के स्तर में बदलाव की वजह से कुछ महिलाओं को अलग अलग तरह की परेशानियां हो सकती हैं। इसे प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) कहा जाता है। नेशनल हेल्थ सर्विस ( NHS) के अनुसार, इसमें मूड बदलना, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, थकान, पेट फूलना और स्तनों में दर्द या भारीपन जैसे लक्षण हो सकते हैं। ये लक्षण आमतौर पर पीरियड शुरू होने के बाद कम होने लगते हैं। हालांकि, हर महिला को PMS हो, यह जरूरी नहीं है।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

अगर पीरियड का पैटर्न बदल गया है या लगातार अनियमित पीरियड हो रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। खासकर तब जब पीरियड 7 दिन से ज्यादा चले, पीरियड के बीच में ब्लीडिंग हो, या अनियमित पीरियड के साथ वजन बढ़ना, बहुत ज्यादा थकान, चेहरे पर ज्यादा बाल आना या त्वचा बहुत ज्यादा रूखी या तैलीय होने जैसे लक्षण दिखाई दें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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