सावन पूर्णिमा और सावन के अंतिम दिन शुक्रवार शाम अजगैबीनाथ मंदिर घाट पर गंगा महाआरती का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच मां गंगा की विधिवत पूजा-अर्चना कर आरती उतारी गई। इस दौरान पूरा अजगैबीनाथ मंदिर घाट भक्तिमय हो उठा। महाआरती में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ कांवरिया श्रद्धालु भी शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने मां गंगा की आरती में भाग लेकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। सावन के अंतिम दिन और श्रावणी मेला के समापन अवसर पर आयोजित इस गंगा महाआरती को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। गंगा तट पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। महाआरती के दौरान मंदिर परिसर और घाट का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर गंगे’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘बाबा अजगैबीनाथ’ के जयकारे लगाए। सावन के अंतिम दिन हुई इस महाआरती के साथ श्रावणी माह का धार्मिक उल्लास श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। सावन पूर्णिमा और सावन के अंतिम दिन शुक्रवार शाम अजगैबीनाथ मंदिर घाट पर गंगा महाआरती का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच मां गंगा की विधिवत पूजा-अर्चना कर आरती उतारी गई। इस दौरान पूरा अजगैबीनाथ मंदिर घाट भक्तिमय हो उठा। महाआरती में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ कांवरिया श्रद्धालु भी शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने मां गंगा की आरती में भाग लेकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। सावन के अंतिम दिन और श्रावणी मेला के समापन अवसर पर आयोजित इस गंगा महाआरती को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। गंगा तट पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। महाआरती के दौरान मंदिर परिसर और घाट का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर गंगे’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘बाबा अजगैबीनाथ’ के जयकारे लगाए। सावन के अंतिम दिन हुई इस महाआरती के साथ श्रावणी माह का धार्मिक उल्लास श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ।

