सलूंबर में वन्यजीव सप्ताह पर छात्रोंने जंगल की बारीकियां समझीं:कलक्टर ने ट्रैकिंग दल को हरी झंडी दिखाई, पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया

सलूंबर में वन्यजीव सप्ताह पर छात्रोंने जंगल की बारीकियां समझीं:कलक्टर ने ट्रैकिंग दल को हरी झंडी दिखाई, पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया

सलूंबर 72वें वन्यजीव सप्ताह के तहत सलूंबर में वन विभाग की ओर से ट्रैकिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला कलक्टर मुहम्मद जुनैद ने ट्रैकिंग दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान विद्यार्थी,शोधार्थी,पर्यावरणविद् और प्रकृति प्रेमी जंगल और प्राकृतिक परिवेश के बीच पहुंचे और प्रकृति की बारीकियों को करीब से समझा। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों,खासकर युवाओं और विद्यार्थियों में वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ प्रकृति से जुड़ाव पैदा करना रहा। ट्रैकिंग के दौरान प्रतिभागियों को क्षेत्र की जैव विविधता,वनस्पतियों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जानकारी दी गई। प्रकृति बनी विद्यार्थियों की पाठशाला ट्रैकिंग रूट पर विभिन्न प्रजातियों के पौधों और वनस्पतियों की पहचान कराते हुए विशेषज्ञों ने उनके पर्यावरणीय महत्व को समझाया। विद्यार्थियों को बताया गया कि पौधे सिर्फ ऑक्सीजन देने तक सीमित नहीं हैं,बल्कि जैव विविधता, मृदा संरक्षण, जल संरक्षण और जलवायु संतुलन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। डीएफओ अनुराग भटनागर ने ट्रैकिंग कार्यक्रम की रूपरेखा और रूट प्लान की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील रहने का आह्वान किया। जंगल, पौधे और वन्यजीवों की दुनिया को समझा ट्रैकिंग के दौरान वन विभाग के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने,जंगलों में स्वच्छता बनाए रखने और प्लास्टिक एवं अन्य प्रदूषण से पर्यावरण को बचाने के बारे में जानकारी दी। प्रतिभागियों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों के सवालों के विशेषज्ञों ने दिए जवाब कार्यक्रम में डॉ. सतीश शर्मा, एनजीओ फाउंडेशन एवं इकोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों,शोधार्थियों और पर्यावरण में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों को वनस्पति विज्ञान एवं क्षेत्र की जैव विविधता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। ट्रैकिंग के दौरान विद्यार्थियों ने पौधों की पहचान, उनके उपयोग और पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका को लेकर कई सवाल किए। विशेषज्ञों ने मौके पर ही सवालों के जवाब देकर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक वातावरण अपने आप में एक जीवंत प्रयोगशाला है।प्रकृति को जितना करीब से समझेंगे, उसके संरक्षण की जिम्मेदारी उतनी ही बेहतर तरीके से निभा सकेंगे। वन्यजीव बचाने के लिए आवास बचाना जरूरी वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य केवल वन्यजीवों के प्रति जागरूकता पैदा करना नहीं है, बल्कि लोगों को प्रकृति, वनस्पति, जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन के संरक्षण से जोड़ना भी है। वन्यजीवों का संरक्षण तभी संभव है, जब उनके प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहें और आमजन पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझे। कार्यक्रम में आरएफओ डॉ. राजेंद्र महला, एसीएफ तरुण मीणा, विकास अधिकारी जयसमंद दयाचंद सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विद्यार्थी, शोधार्थी, पर्यावरणविद् एवं प्रकृति प्रेमी मौजूद रहे।

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