सरकारी खर्च बढ़ने से केंद्र का Fiscal Deficit पहली छमाही में 7.14 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

सरकारी खर्च बढ़ने से केंद्र का Fiscal Deficit पहली छमाही में 7.14 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

सरकार की कमाई और खर्च के बीच बढ़ता अंतर एक बार फिर चर्चा में है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा पिछले साल के मुकाबले करीब 25 फीसदी बढ़ गया है। इसकी मुख्य वजह सरकारी खर्च में तेज बढ़ोतरी और गैर-कर्ज वाली आय की अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार रही है। 30 अक्टूबर को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच राजकोषीय घाटा बढ़कर 7.14 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तय लक्ष्य का 42.1 फीसदी है। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 36.5 फीसदी था।

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल 16.96 लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा रहने का अनुमान रखा है। राजकोषीय घाटा तब होता है, जब सरकार की कुल कमाई उसके खर्च से कम पड़ जाती है। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार को कर्ज लेना पड़ता है। ऐसे में घाटे का बढ़ना सरकार की उधारी और वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा सकता है।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर के दौरान केंद्र सरकार का कुल खर्च पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 10.7 फीसदी बढ़ा है। वहीं, कर्ज को छोड़कर मिलने वाली सरकारी आय में सिर्फ 6.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खर्च और कमाई की रफ्तार में यही अंतर घाटा बढ़ने की बड़ी वजह बना है।

इस दौरान सरकार ने विकास से जुड़े कामों पर खर्च भी बढ़ाया है। सड़क, रेलवे, बुनियादी ढांचे और दूसरी सरकारी परियोजनाओं पर होने वाले पूंजीगत खर्च में 12.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल से सितंबर के बीच यह खर्च बढ़कर 6.55 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। सरकार ने पूरे वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत खर्च का लक्ष्य 12.22 लाख करोड़ रुपये रखा है। इसमें से अब तक 53.6 फीसदी राशि खर्च की जा चुकी है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 51.8 फीसदी था।

सरकार को मिलने वाली कुल राजस्व आय 3.6 फीसदी बढ़कर 17.57 लाख करोड़ रुपये रही। इसमें करों से मिलने वाली शुद्ध आय 3.8 फीसदी बढ़कर 12.76 लाख करोड़ रुपये हो गई। वहीं, गैर-कर आय 3.1 फीसदी बढ़कर 4.81 लाख करोड़ रुपये रही। खास बात यह है कि गैर-कर आय पूरे साल के तय लक्ष्य का 72.2 फीसदी पहले ही हासिल कर चुकी है।

गौरतलब है कि सरकार को विनिवेश और दूसरी संपत्तियों की बिक्री से भी आय होती है। इस मद में अप्रैल-सितंबर के दौरान 62,159 करोड़ रुपये मिले, जो पूरे साल के लक्ष्य का 77.7 फीसदी है। कर्ज के अलावा मिलने वाली कुल पूंजीगत आय 34,770 करोड़ रुपये से बढ़कर 78,602 करोड़ रुपये हो गई। अगर आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री इसी वित्त वर्ष में पूरी हो जाती है, तो सरकार को विनिवेश से तय लक्ष्य से अधिक कमाई होने की उम्मीद है।

दूसरी ओर, सरकार पर खाद्य और उर्वरक सब्सिडी का खर्च भी बढ़ा है। अप्रैल से सितंबर के बीच प्रमुख सब्सिडी पर कुल खर्च 10.1 फीसदी बढ़कर 2.23 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 2.02 लाख करोड़ रुपये था। खाद्य सब्सिडी 16 फीसदी बढ़कर 1.03 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह 88,375 करोड़ रुपये थी।

उर्वरक सब्सिडी पर कुल खर्च 11.2 फीसदी बढ़कर 1.19 लाख करोड़ रुपये रहा। इसमें यूरिया सब्सिडी पर 85,586 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो पूरे साल के बजट का 73 फीसदी है। पोषक तत्व आधारित उर्वरक सब्सिडी पर 33,664 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो तय बजट का 62 फीसदी है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार ने पहली छमाही में 4.11 लाख करोड़ रुपये के कुल सब्सिडी बजट का 54 फीसदी इस्तेमाल कर लिया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 53 फीसदी था। आने वाले महीनों में सरकारी खर्च, करों से होने वाली कमाई और विनिवेश से मिलने वाली रकम पर नजर रहेगी, क्योंकि इन्हीं के आधार पर पूरे साल के घाटे का लक्ष्य हासिल करने की स्थिति तय होगी।

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