चिटफंड व नॉन-बैंकिंग कंपनियों में फंसे निवेशकों के पैसों की वापसी के लिए राज्य सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। राजस्व पर्षद के सदस्य मस्तराम मीना की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने पिछले माह दिए गए निर्देश के बाद हाल में फिर सभी प्रमंडलीय आयुक्तों के साथ समीक्षा बैठक की। इस बार एक माह में कम से कम एक मामले को निपटारा कराने का निर्देश दिया गया। इससे पहले भी प्रमंडलीय आयुक्तों को निर्देश दिया गया था। इधर, वित्त विभाग ने जमाकर्ताओं के पैसे को वापस दिलाने के लिए प्रमंडलीय आयुक्तों द्वारा नामित नोडल पदाधिकारियों की सूची सीबीआई और सीआईडी एसपी को सौंपी है। सदस्य, राजस्व पर्षद ने समीक्षा बैठक में सीबीआई और सीआईडी के प्रतिनिधि को संबंधित विवरण प्रमंडलीय आयुक्तों को उपलब्ध कराने की हिदायत दी। निवेशकों को राशि लौटाने के लिए लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए समिति ने यह निर्देश दिया है। इस समिति का गठन हाईकोर्ट में दायर पीआईएल 585/2017 और सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी. 2786/2024 के क्रम में हुआ है। समिति अगले माह फिर इस मामले को लेकर बैठक करेगी। उसमें प्रमंडलीय आयुक्तों को निपटाए गए मामले का ब्योरा देने को कहा गया है। स्वीकृत दावों में से 107 करोड़ रुपए का भुगतान जमाकर्ताओं को नहीं मिला सहारा ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के स्वीकृत दावों में से 107 करोड़ रु. का भुगतान जमाकर्ताओं को नहीं मिला है। 383 करोड़ रु. स्वीकृत दावों में 276 करोड़ का ही भुगतान हुआ है। चिटफंड एवं नॉन बैंकिंग कंपनियों से जमाधान को वापस दिलाने को लेकर बनी इस उच्च स्तरीय समिति में गृह सचिव एवं वित्त सचिव के साथ-साथ सीबीआई के डीआईजी रैंक के प्रतिनिधि सदस्य है। हाल में हुई उच्च स्तरीय समिति की बैठक में झारखंड सीआईडी में दर्ज मामलों की भी समीक्षा की गई। समिति ने सीआईडी को निर्देश दिया कि दर्ज मामलों का अध्ययन कर उनसे संबंधित जब्ती और कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराए। इससे पता चल सके कि किन मामलों में संपत्ति जब्त हुई है, किनमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और निवेशकों की रकम लौटाने की कार्रवाई कहां तक पहुंची है। 1.11 करोड़ रुपए की चल संपत्ति किसकी, सीबीआई से मांगा ब्योरा बैठक में 1.11 करोड़ रुपए की जब्त चल संपत्ति किन-किन कंपनियों से संबंधित है, इसकी जानकारी मांगी गई। सीबीआई की ओर से बताया गया कि कि जब्त संपत्ति पांच कंपनियों से संबंधित है और इनका पूरा विवरण संबंधित प्रमंडलीय नोडल पदाधिकारियों को उपलब्ध कराया जाएगा। सभी नोडल पदाधिकारियों को इसके साथ साथ फर्जी निकासी के पहलुओं पर भी कार्रवाई करने को कहा गया है। उच्च स्तरीय समिति ने मांगी है निवेशकों की पूरी जानकारी कई चिटफंड एवं नॉन-बैंकिंग कंपनियों की संपत्ति जब्त हो चुकी है। कुछ मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। इन चार्जशीट में पीड़ित निवेशकों का पूरा विवरण उपलब्ध है। अब सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को अपने नोडल पदाधिकारियों के माध्यम से ऐसे निवेशकों की पूरी विवरणी जुटाने को कहा गया है, ताकि जब्त संपत्ति से प्राप्त राशि को वास्तविक पीड़ितों तक पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। किस प्रमंडल में कौन बने हैं नोडल पदाधिकारी उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल- सुजाता कुजूर, उप परिवहन आयुक्त, हजारीबाग
दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल- रविशंकर मिश्रा, उप निदेशक सामाजिक सुरक्षा, रांची
पलामू प्रमंडल- राजेश, उप परिवहन आयुक्त, मेदिनीनगर
कोल्हान प्रमंडल- रंथु महतो, उप परिवहन आयुक्त, चाईबासा
संथाल परगना प्रमंडल-रवि प्रकाश, आयुक्त के सचिव, दुमका

