समस्तीपुर के हसनपुर थाना क्षेत्र की परोरिया पंचायत के केशोरा गांव के वार्ड-13 में ग्रामीण डॉक्टर गुलजार अहमद उर्फ शाहीन (50) की हत्या के मामले में तीन दिन बाद भी पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा है। दुबई में रह रहे मृतक के दोनों बेटों के घर पहुंचने के बाद सोमवार को डॉक्टर के शव को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इसके बाद मृतक के पिता मो. सुल्तान अहमद के बयान पर हसनपुर थाने में 4-5 अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई गई। प्राथमिकी में हत्या के कारण का उल्लेख नहीं किया गया है। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस पुराने जमीन विवाद और अवैध संबंध समेत अन्य संभावित एंगल को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। परिवार की ओर से हत्या के कारण, संदिग्ध के संबंध में नहीं दी गई जानकारी पुलिस पदाधिकारी के अनुसार, परिवार की ओर से हत्या के कारण या किसी संदिग्ध के संबंध में अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है। इससे अनुसंधान में परेशानी आ रही है। हालांकि पुलिस अपने स्तर से हत्या की वजह और हत्यारों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। हसनपुर थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर सुनील कांत ने बताया कि घटना के तीन दिन बाद परिवार की ओर से आवेदन दिया गया है। परिजनों ने बताया कि मृतक के दोनों बेटे दुबई में रहते हैं। उनके पहुंचने और शव को सुपुर्द-ए-खाक करने की प्रक्रिया के कारण प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी हुई। मोबाइल की कॉल डिटेल से खुलेगा हत्या का राज पुलिस अब मृतक डॉक्टर के मोबाइल फोन को जांच का अहम जरिया मान रही है। परिवार की ओर से कोई स्पष्ट इनपुट नहीं मिलने के बाद पुलिस डॉक्टर के मोबाइल की कॉल डिटेल और सीडीआर खंगाल रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या से पहले डॉक्टर की आखिरी बातचीत किससे हुई थी और वह रोजाना किन लोगों से लंबी बातचीत करते थे। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि डॉक्टर को बार-बार किन नंबरों से फोन आते थे। मरीजों के अलावा उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और घटना से पहले या घटना के आसपास किन लोगों से उनकी बातचीत हुई थी। CDR से सुराग नहीं मिला तो ‘डंप’ विधि से जांच पुलिस पदाधिकारी के अनुसार, यदि कॉल डिटेल से कोई ठोस सुराग नहीं मिलता है तो घटना के समय इलाके में सक्रिय मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाने के लिए ‘डंप’ विधि का सहारा लिया जा सकता है। इसके जरिए घटना के समय गांव और आसपास के इलाके में सक्रिय मोबाइल नंबरों की पहचान की जाएगी। पुलिस यह भी देखेगी कि घटना के दौरान कौन-कौन से मोबाइल नंबर वहां सक्रिय थे, उनका मूवमेंट किस दिशा में था और वे मोबाइल घटना स्थल के आसपास कब पहुंचे और कब वहां से निकले। पुलिस यह भी जांच करेगी कि घटना के समय इलाके में मौजूद किसी व्यक्ति का संपर्क मृतक के परिवार या अन्य संदिग्ध लोगों से तो नहीं था। फिलहाल पुलिस मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल समेत सभी संभावित बिंदुओं को खंगाल रही है। एक नजर में: 18 सितंबर की रात क्या हुआ था? 18 सितंबर की रात ग्रामीण डॉक्टर गुलजार अहमद उर्फ शाहीन की उनके घर के दरवाजे पर सोते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार डॉक्टर को चार गोलियां मारी गई थीं। पोस्टमार्टम के दौरान उनके सिर में दो और सीने में एक गोली का छर्रा मिला था। वहीं एक अन्य गोली का छर्रा उनके बिछावन पर मिला था। घटनास्थल से तीन गोलियों के खोखे भी बरामद किए गए थे। घटना वाली रात डॉक्टर सिंघिया थाना क्षेत्र के बेहट गांव में छठी का भोज खाने गए थे। रात करीब 10 बजे वह वापस घर लौटे थे। इसके बाद रोजाना की तरह घर के दरवाजे पर सो गए। मरीजों का रात में भी उनके पास आना-जाना लगा रहता था, इसलिए वह अक्सर घर के दरवाजे पर ही सोते थे। इसके लिए दरवाजे पर एक कमरा भी बना हुआ था। हालांकि घटना वाली रात वह कमरे के बजाय बाहर बरामदे में सोए थे। शनिवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे उनके पिता मो. सुल्तान अहमद उन्हें जगाने के लिए दरवाजे पर पहुंचे। वहां उन्होंने डॉक्टर के सिर से खून निकलता देखा। इसके बाद परिवार के लोगों और पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। हत्यारों तक पहुंचने के लिए घटनास्थल पर खोजी कुत्ता भी बुलाया गया, लेकिन उससे भी कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका। कुछ देर तक घटनास्थल के आसपास घूमने के बाद खोजी कुत्ता एक जगह बैठ गया। समस्तीपुर के हसनपुर थाना क्षेत्र की परोरिया पंचायत के केशोरा गांव के वार्ड-13 में ग्रामीण डॉक्टर गुलजार अहमद उर्फ शाहीन (50) की हत्या के मामले में तीन दिन बाद भी पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा है। दुबई में रह रहे मृतक के दोनों बेटों के घर पहुंचने के बाद सोमवार को डॉक्टर के शव को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इसके बाद मृतक के पिता मो. सुल्तान अहमद के बयान पर हसनपुर थाने में 4-5 अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई गई। प्राथमिकी में हत्या के कारण का उल्लेख नहीं किया गया है। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस पुराने जमीन विवाद और अवैध संबंध समेत अन्य संभावित एंगल को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। परिवार की ओर से हत्या के कारण, संदिग्ध के संबंध में नहीं दी गई जानकारी पुलिस पदाधिकारी के अनुसार, परिवार की ओर से हत्या के कारण या किसी संदिग्ध के संबंध में अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है। इससे अनुसंधान में परेशानी आ रही है। हालांकि पुलिस अपने स्तर से हत्या की वजह और हत्यारों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। हसनपुर थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर सुनील कांत ने बताया कि घटना के तीन दिन बाद परिवार की ओर से आवेदन दिया गया है। परिजनों ने बताया कि मृतक के दोनों बेटे दुबई में रहते हैं। उनके पहुंचने और शव को सुपुर्द-ए-खाक करने की प्रक्रिया के कारण प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी हुई। मोबाइल की कॉल डिटेल से खुलेगा हत्या का राज पुलिस अब मृतक डॉक्टर के मोबाइल फोन को जांच का अहम जरिया मान रही है। परिवार की ओर से कोई स्पष्ट इनपुट नहीं मिलने के बाद पुलिस डॉक्टर के मोबाइल की कॉल डिटेल और सीडीआर खंगाल रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या से पहले डॉक्टर की आखिरी बातचीत किससे हुई थी और वह रोजाना किन लोगों से लंबी बातचीत करते थे। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि डॉक्टर को बार-बार किन नंबरों से फोन आते थे। मरीजों के अलावा उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और घटना से पहले या घटना के आसपास किन लोगों से उनकी बातचीत हुई थी। CDR से सुराग नहीं मिला तो ‘डंप’ विधि से जांच पुलिस पदाधिकारी के अनुसार, यदि कॉल डिटेल से कोई ठोस सुराग नहीं मिलता है तो घटना के समय इलाके में सक्रिय मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाने के लिए ‘डंप’ विधि का सहारा लिया जा सकता है। इसके जरिए घटना के समय गांव और आसपास के इलाके में सक्रिय मोबाइल नंबरों की पहचान की जाएगी। पुलिस यह भी देखेगी कि घटना के दौरान कौन-कौन से मोबाइल नंबर वहां सक्रिय थे, उनका मूवमेंट किस दिशा में था और वे मोबाइल घटना स्थल के आसपास कब पहुंचे और कब वहां से निकले। पुलिस यह भी जांच करेगी कि घटना के समय इलाके में मौजूद किसी व्यक्ति का संपर्क मृतक के परिवार या अन्य संदिग्ध लोगों से तो नहीं था। फिलहाल पुलिस मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल समेत सभी संभावित बिंदुओं को खंगाल रही है। एक नजर में: 18 सितंबर की रात क्या हुआ था? 18 सितंबर की रात ग्रामीण डॉक्टर गुलजार अहमद उर्फ शाहीन की उनके घर के दरवाजे पर सोते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार डॉक्टर को चार गोलियां मारी गई थीं। पोस्टमार्टम के दौरान उनके सिर में दो और सीने में एक गोली का छर्रा मिला था। वहीं एक अन्य गोली का छर्रा उनके बिछावन पर मिला था। घटनास्थल से तीन गोलियों के खोखे भी बरामद किए गए थे। घटना वाली रात डॉक्टर सिंघिया थाना क्षेत्र के बेहट गांव में छठी का भोज खाने गए थे। रात करीब 10 बजे वह वापस घर लौटे थे। इसके बाद रोजाना की तरह घर के दरवाजे पर सो गए। मरीजों का रात में भी उनके पास आना-जाना लगा रहता था, इसलिए वह अक्सर घर के दरवाजे पर ही सोते थे। इसके लिए दरवाजे पर एक कमरा भी बना हुआ था। हालांकि घटना वाली रात वह कमरे के बजाय बाहर बरामदे में सोए थे। शनिवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे उनके पिता मो. सुल्तान अहमद उन्हें जगाने के लिए दरवाजे पर पहुंचे। वहां उन्होंने डॉक्टर के सिर से खून निकलता देखा। इसके बाद परिवार के लोगों और पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। हत्यारों तक पहुंचने के लिए घटनास्थल पर खोजी कुत्ता भी बुलाया गया, लेकिन उससे भी कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका। कुछ देर तक घटनास्थल के आसपास घूमने के बाद खोजी कुत्ता एक जगह बैठ गया।

