​सपा ने कराई गोपनीय जातीयगणना, हर सीट का अलग घोषणापत्र:बरेली शहर से 1.20 लाख भाजपाई वोट कटे, मेयर-विधायक विवाद पर बोले- यह तो लूट की लड़ाई

​सपा ने कराई गोपनीय जातीयगणना, हर सीट का अलग घोषणापत्र:बरेली शहर से 1.20 लाख भाजपाई वोट कटे, मेयर-विधायक विवाद पर बोले- यह तो लूट की लड़ाई

यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने जमीनी स्तर पर चक्रव्यूह रचना शुरू कर दिया है। बरेली में पार्टी संगठन की रणनीतियों और चुनावी गणित पर दैनिक भास्कर ने सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव से विशेष बातचीत की।
इंटरव्यू के दौरान सपा जिलाध्यक्ष ने बेहद चौंकाने वाले दावे किए। शुभलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीते 10 वर्षों के भाजपा शासनकाल में अगर यादवों और मुसलमानों के बाद किसी समाज का सबसे ज्यादा उत्पीड़न हुआ है और सबसे ज्यादा हत्याएं हुई हैं, तो वह ब्राह्मण समाज है। उन्होंने भाजपा के अभेद्य दुर्ग माने जाने वाले बरेली शहर विधानसभा क्षेत्र पर बड़ा दावा करते हुए कहा कि एसआईआर (SIR) के तहत शहर से करीब 1 लाख 20 हजार वोट कटे हैं, जो ज्यादातर भाजपा के कोर वोटर थे। इसके अलावा कैंट विधानसभा और शहर में भाजपा विधायक संजीव अग्रवाल व मेयर डॉ. उमेश गौतम के बीच मची रार को उन्होंने ‘लूट और भ्रष्टाचार की लड़ाई’ करार दिया। सवाल-जवाब: सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव से सीधी बातचीत सवाल: आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बरेली में समाजवादी पार्टी की क्या तैयारियां चल रही हैं?
जवाब: हमारे बड़े नेताओं से लेकर सामान्य कार्यकर्ता तक सभी ने तय कर लिया है कि इस बार प्रदेश में भाजपा की जनविरोधी सरकार को बदलना है और अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है। इसके लिए हमने विधानसभावार तैयारियां शुरू कर दी हैं। पिछले दो महीने से हम सामान्य कार्यकर्ताओं के बजाय पूर्व पदाधिकारियों और अनुभवी नेताओं को गांव-गांव भेजकर मजबूत बूथ कमेटियां बनवा रहे हैं। इसके साथ ही हमने जिले की सभी 9 विधानसभा सीटों पर जातिवार गणना (सर्वे) भी करवा ली है। सवाल: सपा ने सभी 9 विधानसभाओं में जो जातीय गणना कराई, उसका तरीका क्या रहा?
जवाब: हमारी गणना का तरीका बिल्कुल अलग और सटीक था। हमने अपने वरिष्ठ नेताओं को वोटर लिस्टें सौंपीं और वोटर लिस्ट पर हर मतदाता के नाम के आगे उसकी बिरादरी दर्ज कराई। अब हमारे पास हर बूथ का सटीक जातिवार आंकड़ा है कि किस विधानसभा में किस बिरादरी का कितना वोट है। इसके अलावा हम हर विधानसभा में व्यापक स्तर पर सामान्य पीडीए पंचायतें और जातिवार नेताओं की जनसभाएं लगातार कर रहे हैं। सवाल: जब आपकी टीमें घर-घर जा रही हैं, तो जनता से क्या बातचीत हो रही है, क्या मुद्दे सामने आ रहे हैं?
जवाब: आम जनता बुनियादी जरूरतों से बेहद परेशान है। महंगाई इतनी बढ़ चुकी है कि गरीब, मजदूर, ठेले-खोमचे वाले के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना और बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है। गैस सिलेंडर एक हजार के पार है, दाल-चावल-आटा महंगा है। अस्पतालों में न डॉक्टर हैं और न दवाएं, गंभीर जांचें तक नहीं हो रहीं। स्वास्थ्य मंत्री खुद कह चुके हैं कि डॉक्टर उनकी नहीं सुनते। थानों और तहसीलों में बिना पैसे कोई काम नहीं होता, भ्रष्टाचार चरम पर है। सवाल: चुनाव आते-आते क्या असल मुद्दों की जगह धार्मिक ध्रुवीकरण हावी नहीं हो जाता?
जवाब: 2014 से 2024 तक भाजपा ने धार्मिक भावनाएं भड़काकर ही सरकारें बनाईं, लेकिन अब जनता समझ चुकी है कि धर्म से किसी का पेट नहीं भरता और न ही युवाओं को रोजगार मिलता है। धर्म के नाम पर वोट लेकर अस्पतालों की व्यवस्था और भ्रष्टाचार नहीं सुधर सकता। जनता अब इनके झांसे में नहीं आने वाली और इस बार बुनियादी मुद्दे ही चुनाव तय करेंगे। सवाल: बरेली जिले की 9 विधानसभा सीटों पर सपा का क्या प्लान है, घोषणा पत्र कैसा होगा?
जवाब: अखिलेश यादव के निर्देश पर हम केवल हवाई घोषणाएं नहीं कर रहे, बल्कि हर विधानसभा स्तर पर स्थानीय समस्याओं को संकलित कर अलग घोषणा पत्र (मैनिफेस्टो) तैयार कर रहे हैं। हमने हर विधानसभा में 50 से 60 जिम्मेदार नेताओं की टीम लगाई है, जो गांव-गांव घर-घर जाकर समस्याएं नोट कर रहे हैं और छूटे हुए वोट भी बनवा रहे हैं। सरकार बनते ही इन स्थानीय समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाएगा। माहौल ऐसा है कि इस बार सपा जिले की सभी 9 सीटें जीतने जा रही है। सवाल: शहर विधानसभा सीट तो 1989 से लगातार भाजपा का मजबूत गढ़ रही है, उसे सपा कैसे भेद पाएगी?
जवाब: चुनाव हमेशा राजनीतिक समीकरणों और परिस्थितियों से जीते जाते हैं। इस बार समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। एसआईआर (SIR) के बाद बरेली शहर विधानसभा से लगभग 1 लाख 20 हजार वोट कटे हैं। ये वे लोग थे जो गांवों से आकर शहर में मकान बनाकर रह रहे थे और दोनों जगह उनका वोट था। जब एसआईआर हुई, तो ज्यादातर लोगों ने अपने गांव में वोट रखना पसंद किया और शहर से नाम कटवा लिया। यह 1.20 लाख वोट ज्यादातर भाजपा का था। 2022 में हम शहर सीट 30 हजार और 2024 लोकसभा में 18 हजार वोटों से पीछे रहे थे। अब 1 लाख से अधिक भाजपाई वोट कटने से समीकरण सपा के पक्ष में आ चुका है और इस बार शहर विधानसभा सपा पहली बार ऐतिहासिक रूप से जीतेगी। सवाल: आप पीडीए की बात करते हैं, लेकिन इसमें सवर्ण समाज और ब्राह्मणों की क्या जगह है?
जबाव: पीडीए का दायरा केवल पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक तक सीमित नहीं है। इसमें आधी आबादी (महिलाएं), पीड़ित, दुखी, अपमानित और सभी अगड़े भी शामिल हैं। पीडीए का मतलब ही है जो भी शोषित और पीड़ित है। समाज के हर तबके को सम्मान देना सपा की नीति है। सवाल: भाजपा तो कहती है कि पीडीए का मतलब ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ है?
जवाब: भाजपा अपने किसी भी वादे को पूरा नहीं कर पाई है, इसलिए जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे अनर्गल बयान देती है। जनता के सामने इनका झूठ पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। सवाल: चुनाव आते ही सपा को पीडीए में ‘पी’ से पंडित याद आने लगे, जबकि पहले ‘पी’ से केवल पिछड़ा कहा जाता था?
जवाब: ऐसा बिल्कुल नहीं है। अगड़ों में पंडित भी हैं, ठाकुर भी हैं और वैश्य भी हैं। ब्राह्मण समाज हमेशा से समाजवादी पार्टी का मजबूत स्तंभ रहा है। हमारे वरिष्ठ नेता रहे स्व. जनेश्वर मिश्र ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा थे, जिनके चरणों को श्रद्धेय नेताजी मुलायम सिंह यादव सार्वजनिक मंचों पर छूते थे। आज भी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे हैं। बृजभूषण तिवारी से लेकर ब्राह्मण नेताओं की लंबी फेहरिस्त सपा में रही है। सवाल: क्या आपको लगता है कि इस बार ब्राह्मण समाज भाजपा से नाराज होकर सपा के साथ आएगा?
जवाब: बिल्कुल आएगा। भाजपा में कहावत चल रही है—’भाता नहीं, भाता’। पिछले 10 सालों का रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, उत्तर प्रदेश में यादवों और मुसलमानों के बाद अगर सबसे ज्यादा किसी पर जुल्म हुआ है और सबसे ज्यादा किसी की हत्याएं हुई हैं, तो वह ब्राह्मण समाज है। पूरे प्रदेश का ब्राह्मण समाज आज खुद को अपमानित और असुरक्षित महसूस कर रहा है और चुनाव आते ही भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने का मन बना चुका है। सवाल: बरेली में कैंट और शहर के अंदर भाजपा नेताओं, खासकर विधायक संजीव अग्रवाल और मेयर डॉ. उमेश गौतम के बीच जो विवाद चल रहा है, उसे आप कैसे देखते हैं?
जबाव: 10 सालों में बरेली की जनता ने देख लिया है कि ‘तप का राज, राज करना सा’। भाजपा में यह कोई नीति या विकास की लड़ाई नहीं है, यह सिर्फ और सिर्फ ‘लूट और भ्रष्टाचार की लड़ाई’ है। भाजपा के नाश के दिन आ गए है। ठेकों और कमीशनखोरी की बंदरबांट को लेकर इनकी आपसी कलह सड़क पर आ चुकी है। जनता इनकी असलियत जान चुकी है और इस भ्रष्टाचार का जवाब चुनाव में भाजपा को गद्दी से हटाकर देगी।

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