Ranvir Shorey On CJP Protest in Delhi: देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर घमासान मचा हुआ है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले युवा सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम और प्रदर्शनकारियों को लेकर अब फिल्मी हस्तियां भी खुलकर अपनी राय रख रही हैं। जहां कई बड़े लोगों ने इसे सपोर्ट किया है वहीं जाने-माने अभिनेता रणवीर शौरी (Ranvir Shorey) ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों और आंदोलन के तौर-तरीकों पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने एक के बाद एक कई पोस्ट किए हैं और इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।
रणवीर शौरी ने दिल्ली आंदोलन पर किया पोस्ट
रणवीर शौरी ने दिल्ली आंदोलन को लेकर एक के बाद एक ट्विट पोस्ट किए हैं। पहले उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास का एक वीडियो शेयर किया, जिसमें पार्टी के प्रवक्ता कह रहे थे कि पार्टी, उसके कार्यकर्ता और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और उन्होंने लोगों से सड़कों पर उतरकर विरोध जारी रखने की अपील की थी।
इसी वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेता रणवीर शौरी ने लिखा, “अपनी ताकत संसद और वोट के जरिए दिखाओ, सड़कों पर नहीं!
और अगर वह रास्ते गलत लगते हैं, तो कोर्ट जाओ! यही लोकतांत्रिक तरीका है। सड़कों पर कब्जा करना और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कानून-व्यवस्था मशीनरी को बंधक बनाना ही असल में “लोकतंत्र की हत्या” है!”
रणबीर के आगे एक और ट्विट कर लिखा, “लोकतंत्र में “विरोध-प्रदर्शन” आखिरी रास्ता होना चाहिए। यह न्यायपालिका या विधायिका के अधिकार-क्षेत्र को दरकिनार करने का तरीका नहीं है! तुम्हारे “असहमति के अधिकार” का मतलब यह नहीं है कि तुम हफ्ते के सातों दिन “विरोध-प्रदर्शन” करो, जिससे देश ठप हो जाए और हम बाकी लोगों की जिंदगी नरक बन जाए! सिर्फ अराजकतावादी, पब्लिसिटी पाने वाले या बेवकूफ ही कानूनी रास्ते मौजूद होने के बावजूद विरोध-प्रदर्शन करते हैं।”
क्या है पूरा विवाद और CJP का आंदोलन?
बता दें, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) चुनाव आयोग द्वारा वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का कड़ा विरोध कर रही है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के चलते लाखों वैध मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से दूर रखा गया। वहीं, चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
इस आंदोलन के तहत 10 अक्टूबर को CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके और साथी नेताओं सौरव दास व आशुतोष रांका को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ले लिया गया था, जिन्हें बाद में 11 अक्टूबर को शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया। रिहाई के बाद नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है, जिसके बाद से राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक विशेष सुनवाई के दौरान यह साफ किया कि प्रदर्शनकारियों को अनावश्यक हिरासत में नहीं लिया जाएगा और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सामान्य होनी चाहिए।

