वाराणसी में शिवपुर की रामलीला में महाराज दशरथ का विलाप, भरत का अयोध्या आगमन और कैकेयी के साथ संवाद का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के प्रभावी अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। लीला में दिखाया गया कि श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वन जाने के बाद सुमंत अयोध्या लौटे और महाराज दशरथ को श्रीराम के वापस न आने की जानकारी दी। पुत्र वियोग में व्याकुल दशरथ ने प्राण त्याग दिए। ननिहाल से लौटे भरत और शत्रुघ्न को जब श्रीराम के वनवास की जानकारी हुई तो उन्होंने कैकेयी के निर्णय का विरोध किया। भरत ने श्रीराम को अयोध्या वापस लाने का संकल्प लिया। मंथरा के षड्यंत्र से नाराज शत्रुघ्न ने उसे दंडित किया। इसके बाद गुरु वशिष्ठ की अध्यक्षता में राजसभा हुई, जिसमें श्रीराम को वापस लाने की योजना बनाई गई। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

