शासकीय स्कूलों में शिक्षिकाएं बच्चों को पढ़ाने के साथ उनके सपनों को भी आकार दे रही हैं। कुछ शिक्षकों ने बच्चों के साथ स्कूलों की तस्वीर बदल रहीं हैं। किसी ने ड्रिप से हरियाली बढ़ाई, तो किसी ने मेहनत से 17 से 85 प्रतिशत तक परीक्षा परिणाम पहुंचाया। शिक्षक दिवस पर कुछ ऐसे शिक्षकों की तस्वीरें आप के सामने प्रस्तुत हैं।
महिला शिक्षकों ने स्कूल को दी नई पहचान
शिक्षक केवल किताबों का पाठ नहीं पढ़ाता। वह जिंदगी का रास्ता भी दिखाता है। जिले के दो सरकारी स्कूलों की शिक्षिकाएं इसका उदाहरण हैं। देवलामाफी हाई स्कूल की बसंती और शासकीय हाई स्कूल रोहिणी की ज्योति सिंह ने अपने काम से स्कूल को नई पहचान दी है। एक ने हरियाली और योग से बच्चों के जीवन में अनुशासन बोया। दूसरी ने कमजोर शैक्षणिक परिणाम को सफलता की कहानी में बदल दिया। शिक्षक दिवस पर प्रस्तुत है दोनों शिक्षिकाओं की रिपोर्ट ।
हरियाली के बीच अंकुरित हो रहा अनुशासन
छैगांव माखन जनपद पंचायत के देवला माफी हाई स्कूल में हरियाली के बीच अनुशासन अंकुरित हो रहा है। स्कूल की दीवारें हरित क्रांति का संदेश देती हैं। यहां 110 बच्चे पढ़ते हैं। शिक्षिका बसंती पटेल बच्चों के लिए केवल शिक्षक नहीं, बल्कि उनकी दोस्त भी हैं। वह पढ़ाई के साथ बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी ध्यान देती हैं। स्कूल में योग की कक्षाएं लगाती हैं। बच्चों को स्वस्थ रहने के साथ अनुशासन का महत्व समझाती हैं। बसंती ने वेस्ट सामग्री से स्कूल को खूबसूरत बनाने का बीड़ा उठाया। बच्चों को भी इस काम से जोड़ा। रंग-बिरंगे गमलों के बीच बच्चे एक साथ टेबल पर बैठकर पढ़ते हैं। पढ़ाई का माहौल अब पहले से ज्यादा जीवंत नजर आता है। परिसर में करीब 200 पौधे लगाए गए हैं। इनमें करीब 100 पौधे कक्षाओं की दीवारों पर लटक रहे हैं। हरियाली के इस अभियान में बसंती के भाई ने भी सहयोग किया। वह किसान हैं। स्कूल में पौधों की हरियाली देख उन्होंने बहन को सिंचाई के लिए ड्रिप भेंट की। इससे पौधों की देखभाल आसान हुई और स्कूल की हरियाली और बढ़ गई।
17 से 85 प्रतिशत परिणाम, बच्चों के सपनों को दी उड़ान
शासकीय हाई स्कूल रोहिणी में शिक्षक ज्योति सिंह ने शिक्षा के साथ स्कूल के वातावरण को भी बदला। उन्होंने तीन अतिथि शिक्षकों के साथ मिलकर बच्चों के शैक्षणिक स्तर को ऊपर उठाया। ज्योति बताती हैं कि जब उन्होंने जिम्मेदारी संभाली, तब परीक्षा परिणाम 17 प्रतिशत था। मेहनत और लगातार प्रयास से परिणाम 85% तक पहुंचा। आज स्कूल के बच्चे फिजीशियन, बैंक और दूसरे क्षेत्रों में नौकरी कर रहे हैं। ज्योति बच्चों को रोज उनके सपने याद दिलाती हैं। उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि शिक्षिका का सबसे बड़ा कर्तव्य विद्यार्थी को उसके लक्ष्य तक पहुंचाना है। वर्तमान में स्कूल में 180 बच्चे हैं। उन्होंने परिसर में आकर्षक गार्डन भी तैयार किया है। यहां चारों तरफ पौधे लहलहा रहे हैं। जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद के लिए उन्होंने कई बार परंपरागत तरीकों से हटकर कदम उठाए।
शिक्षकों का संदेश
शिक्षिकाओं का कहना है कि बदलाव बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी कोशिशों से आता है। इनके लिए स्कूल केवल पढ़ने की जगह नहीं है। यह बच्चों के सपनों को सींचने की जगह है। शिक्षकों को बच्चों को उनके लक्ष्य के अनुरूप मोटिवेट करना चाहिए।

