वैज्ञानिक बोले-‘खरपतवार से धान को पहुंचता है नुकसान’:हृदयपुर में किसानों को मिला प्रशिक्षण, रोग-कीट नियंत्रण के तरीके बताए

वैज्ञानिक बोले-‘खरपतवार से धान को पहुंचता है नुकसान’:हृदयपुर में किसानों को मिला प्रशिक्षण, रोग-कीट नियंत्रण के तरीके बताए

अररिया के हृदयपुर गांव में कृषि विज्ञान केंद्र ने धान की फसल में रोग, कीट और खरपतवार नियंत्रण पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को धान की फसल में आने वाली प्रमुख समस्याओं की पहचान, उनके नुकसान और वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीकों से अवगत कराना था। प्रशिक्षण सत्र के दौरान, कृषि विज्ञान केंद्र के सस्य वैज्ञानिक डॉ. राम नरेश ने किसानों को धान की फसल में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के खरपतवारों की पहचान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। देखें, मौके से आई तस्वीरें… फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव उन्होंने बताया कि समय पर खरपतवार नियंत्रण न करने से धान के पौधों को पोषक तत्व, पानी, प्रकाश और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिससे फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। डॉ. नरेश ने किसानों को खरपतवारों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई प्रभावी विधियों को अपनाने की सलाह दी। कीटों की पहचान और प्रबंधन की जानकारी दी इसी क्रम में, पौधा संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. संजीत कुमार ने धान की फसल में लगने वाले प्रमुख रोगों और कीटों की पहचान तथा उनके प्रबंधन के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने किसानों को रोग एवं कीटों के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय रहते उचित नियंत्रण उपाय अपनाने पर जोर दिया। डॉ. कुमार ने यह भी सलाह दी कि फसल में अनावश्यक रूप से रसायनों का प्रयोग करने से बचें और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार ही कीटनाशी एवं रोगनाशी का उपयोग करें। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हृदयपुर गांव के बड़ी संख्या में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। किसानों ने वैज्ञानिकों से धान की फसल से जुड़ी विभिन्न समस्याओं, रोग-कीट प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण को लेकर प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने संतोषजनक समाधान प्रदान किया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को धान की बेहतर पैदावार और फसल सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के प्रति जागरूक करना था। अररिया के हृदयपुर गांव में कृषि विज्ञान केंद्र ने धान की फसल में रोग, कीट और खरपतवार नियंत्रण पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को धान की फसल में आने वाली प्रमुख समस्याओं की पहचान, उनके नुकसान और वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीकों से अवगत कराना था। प्रशिक्षण सत्र के दौरान, कृषि विज्ञान केंद्र के सस्य वैज्ञानिक डॉ. राम नरेश ने किसानों को धान की फसल में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के खरपतवारों की पहचान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। देखें, मौके से आई तस्वीरें… फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव उन्होंने बताया कि समय पर खरपतवार नियंत्रण न करने से धान के पौधों को पोषक तत्व, पानी, प्रकाश और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिससे फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। डॉ. नरेश ने किसानों को खरपतवारों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई प्रभावी विधियों को अपनाने की सलाह दी। कीटों की पहचान और प्रबंधन की जानकारी दी इसी क्रम में, पौधा संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. संजीत कुमार ने धान की फसल में लगने वाले प्रमुख रोगों और कीटों की पहचान तथा उनके प्रबंधन के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने किसानों को रोग एवं कीटों के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय रहते उचित नियंत्रण उपाय अपनाने पर जोर दिया। डॉ. कुमार ने यह भी सलाह दी कि फसल में अनावश्यक रूप से रसायनों का प्रयोग करने से बचें और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार ही कीटनाशी एवं रोगनाशी का उपयोग करें। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हृदयपुर गांव के बड़ी संख्या में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। किसानों ने वैज्ञानिकों से धान की फसल से जुड़ी विभिन्न समस्याओं, रोग-कीट प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण को लेकर प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने संतोषजनक समाधान प्रदान किया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को धान की बेहतर पैदावार और फसल सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के प्रति जागरूक करना था।  

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