वेस्ट बैंक के दो टुकड़े? चुनाव से ठीक पहले बेंजामिन नेतन्याहू सरकार का ‘मास्टरस्ट्रोक’, E1 प्लान से दुनिया में हड़कंप

वेस्ट बैंक के दो टुकड़े? चुनाव से ठीक पहले बेंजामिन नेतन्याहू सरकार का ‘मास्टरस्ट्रोक’, E1 प्लान से दुनिया में हड़कंप

Israel West Bank settlements: इजरायल ने वेस्ट बैंक के अहम E1 इलाके में 1,234 नए घर बनाने के लिए टेंडर जारी किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब इजरायल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने वाले हैं। E1 इलाके में निर्माण को लेकर कई देश विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे भविष्य में बनने वाले फलस्तीनी देश का क्षेत्र आपस में जुड़ा नहीं रह पाएगा और दो-राष्ट्र समाधान की राह मुश्किल हो सकती है।

क्या है E1 प्लान?

E1 इलाका पूर्वी यरुशलम और इजरायली बस्ती माले अदुमीम के बीच करीब 12 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इस इलाके में इजरायल के निर्माण की योजना लंबे समय से विवादों में रही है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण इजरायल कई सालों तक यहां बड़े स्तर पर निर्माण करने से बचता रहा। अब इजरायली सरकार ने पहले से मंजूर 3,401 घरों में से 1,234 घरों के निर्माण के लिए टेंडर जारी किया है। इसकी बोली लगाने की आखिरी तारीख चुनाव से कुछ दिन पहले रखी गई है। ऐसे में अगर टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो भविष्य में बनने वाली सरकार के लिए इस योजना को रोकना मुश्किल हो सकता है।

क्या सच में वेस्ट बैंक दो हिस्सों में बंट जाएगा?

E1 योजना को लेकर सबसे बड़ी चिंता यही है। आलोचकों का कहना है कि यहां इजरायली बस्तियां बनने से वेस्ट बैंक के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच फलस्तीनियों का संपर्क कमजोर हो सकता है। इसका असर रामल्लाह, पूर्वी यरुशलम और बेथलहम को जोड़ने वाले इलाके पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से माना जा रहा है कि E1 योजना से फलस्तीनी राज्य बनाने और दो-राष्ट्र समाधान की राह मुश्किल हो सकती है।

हालांकि, ‘वेस्ट बैंक के दो टुकड़े’ होने का मतलब यह नहीं है कि वेस्ट बैंक आधिकारिक तौर पर दो हिस्सों या दो देशों में बांट दिया जाएगा। यह इस योजना के संभावित भौगोलिक और राजनीतिक असर को बताने के लिए कहा जा रहा है।

चुनाव से पहले क्यों उठाया गया कदम?

टेंडर की अंतिम तारीख 19 अक्टूबर है, जबकि इजरायल में आम चुनाव 27 अक्टूबर को होने हैं। ऐसे में आलोचकों का कहना है कि यह प्रक्रिया भविष्य की सरकार के लिए नीति बदलने की गुंजाइश कम कर सकती है। इजरायल की मौजूदा सरकार पर पहले से ही दक्षिणपंथी और बस्ती समर्थक नेताओं का प्रभाव है। इसलिए E1 परियोजना को केवल आवास निर्माण के रूप में नहीं, बल्कि वेस्ट बैंक में इजरायली नियंत्रण मजबूत करने की व्यापक नीति के हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है।

दुनिया में क्यों मचा हड़कंप?

E1 योजना को लेकर ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और कनाडा समेत कई देशों ने इजरायल की आलोचना की है। इन देशों ने इजरायल से योजना वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे शांति की कोशिशों को झटका लगेगा और दो-राष्ट्र समाधान की उम्मीद और कमजोर होगी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी कहा है कि E1 योजना एक जुड़े हुए फलस्तीनी राज्य के लिए ‘अस्तित्वगत खतरा’ बन सकती है। फलस्तीनियों का कहना है कि अगर इस इलाके में निर्माण हुआ, तो उनके भविष्य के देश के अलग-अलग हिस्सों के बीच संपर्क टूट सकता है।

‘मास्टरस्ट्रोक’ या बड़ा जोखिम?

इजरायल के दक्षिणपंथी और बस्ती समर्थक धड़े के लिए E1 परियोजना लंबे समय से रणनीतिक महत्व रखती है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध भी उतना ही तीखा है।

यही वजह है कि चुनाव से कुछ ही सप्ताह पहले 1,234 आवासीय यूनिट्स के टेंडर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सवाल है कि यह सिर्फ निर्माण परियोजना है या वेस्ट बैंक के भविष्य की भौगोलिक तस्वीर बदलने की दिशा में बड़ा कदम। यानी E1 की असली लड़ाई 1,234 घरों की नहीं, बल्कि इस सवाल की है कि भविष्य में वेस्ट बैंक कितना जुड़ा हुआ फलस्तीनी क्षेत्र रह पाएगा और दो-राष्ट्र समाधान की कितनी जमीन बची रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *