वेतन के साथ मेडिकल सुविधा, फिर भी सफाईकर्मियों की हड़ताल:नोएडा में दिखने लगा सफाई व्यवस्था पर असर, मांगों पर पहले भी किया गया काम

वेतन के साथ मेडिकल सुविधा, फिर भी सफाईकर्मियों की हड़ताल:नोएडा में दिखने लगा सफाई व्यवस्था पर असर, मांगों पर पहले भी किया गया काम

प्राधिकरण के स्तर से श्रम प्रदत्त कर्मचारियों को वेतन के साथ वर्दी, स्वीकृत अवकाश और दूसरी सुविधाएं दी जा रही हैं। इस साल से कर्मचारियों के परिवारों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा भी शुरू की गई है। इसके बावजूद सफाई कर्मचारी एक बार फिर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल का असर शहर की साफ-सफाई व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। प्राधिकरण के अनुसार नोएडा में लंबे समय से नियमित कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई है। इसी वजह से सफाई समेत कई काम श्रम प्रदत्त कर्मचारियों के जरिए कराए जा रहे हैं। इन कर्मचारियों को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अलग-अलग संस्थाओं को दी जाती है। कर्मचारियों को वेतन संबंधित संस्था के माध्यम से दिया जाता है, जबकि इसका भुगतान प्राधिकरण की ओर से किया जाता है। कई मांगों पर पहले ही काम हो चुका
प्राधिकरण का कहना है कि कर्मचारी संगठन की ओर से रखी गई कुछ मांगों पर पहले ही काम किया जा चुका है। वहीं, कुछ मांगें ऐसी हैं जिन पर नियमों और शासन स्तर की व्यवस्था के कारण तुरंत फैसला नहीं लिया जा सकता।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में 60 साल की उम्र के बाद भी सेवा में बनाए रखना शामिल है। इसके अलावा सेवानिवृत्ति के बाद उनके आश्रितों को नौकरी देने और ग्रेच्युटी की मांग भी रखी गई है। नौकरी देने का फैसला नियमों के तहत
प्राधिकरण अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि किसी कर्मचारी को 60 साल के बाद सेवा में रखना या उसके आश्रित को नौकरी देना निर्धारित नियमों के तहत ही संभव है। अधिकारियों का कहना है कि किसी एक कर्मचारी की मांग के आधार पर नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। यदि सेवानिवृत्ति के बाद आश्रितों को नौकरी देने की व्यवस्था लागू की जाती है तो भविष्य में दूसरे कर्मचारियों के परिवार भी ऐसी मांग कर सकते हैं। हड़ताल से शहरवासियों की बढ़ेगी परेशानी
नोएडा की सफाई व्यवस्था में श्रम प्रदत्त कर्मचारियों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में हड़ताल लंबी चलती है तो कूड़ा उठाने और सफाई के काम पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा असर शहरवासियों पर पड़ेगा। ऐसे में प्राधिकरण के सामने कर्मचारियों की मांगों पर नियमों के तहत फैसला लेने के साथ-साथ शहर की सफाई व्यवस्था बनाए रखने की भी चुनौती है।

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