दरभंगा में सोमवार को शिक्षकों और कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चा ने विश्वविद्यालय मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 का विरोध जताया। चौरंगी से विश्वविद्यालय मुख्यालय तक मार्च निकाला, इसके बाद मार्च सभा में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित अधिनियम को विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शिक्षकों के अधिकारों के लिए खतरा बताया। प्रदर्शन के बाद संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित संशोधन को वापस लेने की मांग की। शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. निलेश कुमार ने कहा कि शिक्षक विरोध में आंदोलन करेंगे। 11 से 18 अगस्त तक शिक्षक काला बिल्ला लगाकर कॉलेजों में कार्य करेंगे और सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक विरोध-प्रदर्शन। 5 सितंबर शिक्षक दिवस के दिन छात्र-छात्राओं को बुलाकर उन्हें बताया जाएगा कि प्रस्तावित कानून से उनके अधिकारों पर किस तरह असर पड़ सकता है। ‘महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा’ शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. निलेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से लाए जा रहे प्रस्तावित कानून से महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि करीब 500 महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों से अलग कर इंटर काउंसिल जैसी व्यवस्था के तहत संचालित करने की योजना बनाई जा रही है। इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों की सेवा, शर्तों और अधिकारों पर भी असर पड़ेगा। शिक्षकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अन्य अधिकार प्रभावित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को केंद्रीकृत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जबकि इससे कॉलेजों में पढ़ाई का माहौल प्रभावित होगा। शिक्षकों को बार-बार सचिवालय के चक्कर काटने होंगे प्रक्षेत्रीय मंत्री विनय कुमार झा ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया है। शिक्षक-कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोमवार को पूरे बिहार के सभी विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन किया गया। आंदोलन में शिक्षक-कर्मचारी दोनों शामिल हुए। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और विधान पार्षद डॉ. मदन मोहन झा ने कहा कि प्रस्तावित कानून से विश्वविद्यालयों का केंद्रीकरण बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारी भी इस व्यवस्था से खुश नहीं होंगे। सरकार यदि सभी अधिकारों को केंद्रीयकृत करती है तो शिक्षकों और विश्वविद्यालय कर्मियों की परेशानी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में पहले से ही कामकाज को लेकर कई तरह की समस्याएं हैं। ऐसे में शिक्षकों को बार-बार सचिवालय का चक्कर लगाना पड़ेगा। इससे व्यवस्था और जटिल होगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नियम से शिक्षकों को कोई लाभ नहीं होगा और विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के अस्तित्व पर भी इसका असर पड़ेगा।
विरोध-प्रदर्शन में ये रहे मौजूद सभा की अध्यक्षता डॉ. शशि भूषण कुमार ने की। संचालन शंकर सिंह और डॉ. शशि भूषण कुमार के संयुक्त नेतृत्व में हुआ। सभा को गंगा प्रसाद झा, डॉ. निलेश कुमार, विनय कुमार झा, अजीत कुमार चौधरी, डॉ. ममता ठाकुर, डॉ. लव कुमार सिंह, डॉ. अर्चना कुमारी, डॉ. प्रवीण कुमार प्रभंजन, डॉ. शंभू ठाकुर, शंकर यादव, डॉ. शशि भूषण कुमार, शंकर सिंह, कुलदीप कुमार झा, प्रमोद कुमार, महेंद्र महान और मो. शमशाद अली समेत अन्य लोगों ने संबोधित किया। प्रदर्शन के अंत में संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 में किए जा रहे संशोधन को वापस लेने और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग की। दरभंगा में सोमवार को शिक्षकों और कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चा ने विश्वविद्यालय मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 का विरोध जताया। चौरंगी से विश्वविद्यालय मुख्यालय तक मार्च निकाला, इसके बाद मार्च सभा में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित अधिनियम को विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शिक्षकों के अधिकारों के लिए खतरा बताया। प्रदर्शन के बाद संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित संशोधन को वापस लेने की मांग की। शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. निलेश कुमार ने कहा कि शिक्षक विरोध में आंदोलन करेंगे। 11 से 18 अगस्त तक शिक्षक काला बिल्ला लगाकर कॉलेजों में कार्य करेंगे और सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक विरोध-प्रदर्शन। 5 सितंबर शिक्षक दिवस के दिन छात्र-छात्राओं को बुलाकर उन्हें बताया जाएगा कि प्रस्तावित कानून से उनके अधिकारों पर किस तरह असर पड़ सकता है। ‘महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा’ शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. निलेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से लाए जा रहे प्रस्तावित कानून से महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि करीब 500 महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों से अलग कर इंटर काउंसिल जैसी व्यवस्था के तहत संचालित करने की योजना बनाई जा रही है। इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों की सेवा, शर्तों और अधिकारों पर भी असर पड़ेगा। शिक्षकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अन्य अधिकार प्रभावित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को केंद्रीकृत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जबकि इससे कॉलेजों में पढ़ाई का माहौल प्रभावित होगा। शिक्षकों को बार-बार सचिवालय के चक्कर काटने होंगे प्रक्षेत्रीय मंत्री विनय कुमार झा ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया है। शिक्षक-कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोमवार को पूरे बिहार के सभी विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन किया गया। आंदोलन में शिक्षक-कर्मचारी दोनों शामिल हुए। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और विधान पार्षद डॉ. मदन मोहन झा ने कहा कि प्रस्तावित कानून से विश्वविद्यालयों का केंद्रीकरण बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारी भी इस व्यवस्था से खुश नहीं होंगे। सरकार यदि सभी अधिकारों को केंद्रीयकृत करती है तो शिक्षकों और विश्वविद्यालय कर्मियों की परेशानी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में पहले से ही कामकाज को लेकर कई तरह की समस्याएं हैं। ऐसे में शिक्षकों को बार-बार सचिवालय का चक्कर लगाना पड़ेगा। इससे व्यवस्था और जटिल होगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नियम से शिक्षकों को कोई लाभ नहीं होगा और विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के अस्तित्व पर भी इसका असर पड़ेगा।
विरोध-प्रदर्शन में ये रहे मौजूद सभा की अध्यक्षता डॉ. शशि भूषण कुमार ने की। संचालन शंकर सिंह और डॉ. शशि भूषण कुमार के संयुक्त नेतृत्व में हुआ। सभा को गंगा प्रसाद झा, डॉ. निलेश कुमार, विनय कुमार झा, अजीत कुमार चौधरी, डॉ. ममता ठाकुर, डॉ. लव कुमार सिंह, डॉ. अर्चना कुमारी, डॉ. प्रवीण कुमार प्रभंजन, डॉ. शंभू ठाकुर, शंकर यादव, डॉ. शशि भूषण कुमार, शंकर सिंह, कुलदीप कुमार झा, प्रमोद कुमार, महेंद्र महान और मो. शमशाद अली समेत अन्य लोगों ने संबोधित किया। प्रदर्शन के अंत में संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 में किए जा रहे संशोधन को वापस लेने और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग की।

