(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, सात अक्टूबर किसी अन्य देश में चिकित्सा शिक्षा की डिग्री हासिल करने वाले व्यक्ति को पहले उस देश में चिकित्सा पेशा अपनाने का लाइसेंस प्राप्त करना होगा, इसके बाद ही वह भारत में विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) में शामिल होने और डॉक्टर के रूप में पंजीकरण की पात्रता हासिल कर सकेगा। इस स्पष्टीकरण के साथ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने यह भी साफ किया कि एफएमजीई में शामिल होने के लिए पर्यवेक्षण में केवल ‘जूनियर डॉक्टर’ के रूप में काम करना पर्याप्त नहीं है, जैसा कि जॉर्जिया में होता है। एनएमसी ने यह स्पष्टीकरण एक अभ्यर्थी भावना द्वारा पीएम शिकायत पोर्टल पर दर्ज की गई उस शिकायत के बाद दिया है, जिसमें जॉर्जिया के छह वर्षीय एमबीबीएस पाठ्यक्रम की वैधता और भारत में एफएमजीई में शामिल होने को लेकर स्पष्टता प्रदान करने का अनुरोध किया गया था।
भारत में चिकित्सा का पेशा अपनाने के लिए पंजीकरण चाहने वाले विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए एफएमजीई अनिवार्य आवश्यकता है। अपने जवाब में भारतीय चिकित्सा नियामक एनएमसी ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (विदेशी चिकित्सा स्नातक लाइसेंसधारी) विनियम, 2021 के नियम 4(बी) का हवाला दिया। इसमें उन भारतीय छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त निर्धारित की गई है, जो किसी दूसरे देश से चिकित्सा शिक्षा पूरी कर भारत लौटते हैं और एफएमजीई में शामिल होते हैं।
विनियम के अनुसार, किसी दूसरे देश में चिकित्सा की डिग्री पूरी करने के बाद उम्मीदवार का उस देश के चिकित्सा नियामक प्राधिकरण के पास पंजीकृत या लाइसेंसधारी होना जरूरी है, ताकि वह उस देश के अपने चिकित्सा स्नातकों को दिए जाने वाले लाइसेंस के समान शर्तों पर स्वतंत्र रूप से चिकित्सा का अभ्यास कर सके। एनएमसी ने अभ्यर्थी भावना को दिए अपने जवाब में कहा, ‘‘एफएमजीएल विनियम, 2021 के विनियम 4(बी) के अनुसार, विदेश से चिकित्सा शिक्षा में स्नातक व्यक्ति के पास उस देश में चिकित्सा का पेशा अपनाने का लाइसेंस होना चाहिए, जहां से उसने चिकित्सा की डिग्री प्राप्त की है। यह लाइसेंस उस देश के नागरिकों को दिए जाने वाले लाइसेंस के समान होना चाहिए।’’
एनएमसी ने कहा, ‘‘किसी व्यक्ति को दिया गया ‘जूनियर डॉक्टर’ का दर्जा तभी पर्याप्त होगा, जब वह कानूनी रूप से आवश्यक स्तर पर चिकित्सा का पेशा अपनाने की अनुमति देता हो।
यदि जॉर्जिया में स्वतंत्र रूप से चिकित्सा पेशा अपनाने की अनुमति केवल स्नातकोत्तर डिग्री लेने के बाद मिलती है, तो केवल ‘जूनियर डॉक्टर’ का दर्जा विनियम 4(बी) की आवश्यकता को पूरा नहीं करेगा।’’
भावना ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि शिक्षा सलाहकार, कथित तौर पर जॉर्जिया के कई कॉलेजों के साथ मिलीभगत कर, वहां चिकित्सा शिक्षा से संबंधित नियमों की गलत व्याख्या करके छात्रों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये सलाहकार कह रहे हैं कि यदि आप छह वर्षीय एमबीबीएस पाठ्यक्रम (जिसे जॉर्जिया में एमडी कहा जाता है) करते हुए या उसे पूरा करने के बाद ‘जूनियर डॉक्टर’ के रूप में काम करते हैं, तो पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद आप भारत में एफएमजीई में शामिल होने के पात्र हैं। लेकिन एनएमसी के जवाब से स्थिति स्पष्ट हो जाती है।’’
आर्मेनिया के येरेवान स्थित भारत के दूतावास ने (जो पहले जॉर्जिया के लिए भी भारत के राजनयिक प्रतिनिधित्व का कार्य संभालता था) जॉर्जिया के चिकित्सा महाविद्यालयों में दाखिला लेने के इच्छुक भारतीय छात्रों के लिए सितंबर 2022 में एक परामर्श जारी किया था।
परामर्श में कहा गया था कि भारतीय छात्र अपनी स्नातक चिकित्सा की पढ़ाई पूरी करने के बाद ‘जूनियर डॉक्टर’ के रूप में काम कर सकते हैं। हालांकि, स्वतंत्र चिकित्सक के रूप में चिकित्सा का पेशा अपनाने के लिए उन्हें जॉर्जियाई में राष्ट्रीय पोस्ट-डिप्लोमा योग्यता परीक्षा (एनपीडीक्यूई) उत्तीर्ण करनी होगी, अपनी चुनी हुई विशेषज्ञता में स्नातकोत्तर अध्ययन या रेजिडेंसी करनी होगी और स्वतंत्र रूप से इलाज के लिए लाइसेंस प्राप्त करना होगा।

