वाराणसी में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के महापर्व को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाने का आवाह्न करते हुए नमामि गंगे ने भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप के साथ कालभैरव क्षेत्र में लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत किया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक और नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने पर्यावरण को दूषित कर रहे सिंगल यूज़ पॉलिथीन के नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण का जीवन ज्ञान, भक्ति योग और कर्म के साथ प्रकृति प्रेम की सीख देता है। इस पावन पर्व पर अपने आसपास पौधे लगाने का संकल्प लें। अपने घर और मंदिरों के आसपास साफ-सुथरा माहौल बनाए रखें। प्लास्टिक की चीजों से बचें और पर्यावरण के अनुकूल सजावट का उपयोग करें। गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा कराकर मानवता को पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण का सबसे बड़ा संदेश दिया था। पर्वत, पेड़ और नदियां हमें जीवन देते हैं। कान्हा का बचपन यमुना के तटों, वनों और गायों के बीच बीता, जो प्रकृति के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है। भगवान श्री कृष्ण ने हमें सिखाया कि पर्यावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा करना हमारा मुख्य धर्म है। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक एवं श्रद्धालु शामिल रहे।

