वाराणसी अपर सत्र न्यायाधीश, (पंचम) यजुवेन्द्र विक्रम सिंह की अदालत ने चोरी के दो अलग-अलग मामलों में सिकरौल, पोखरा, कैंट निवासी आरोपित संतोष बारी और नरेन्द्र सेठ को संदेह का लाभ देते हुए शुक्रवार को दोषमुक्त कर दिया। सुनवाई के बाद दोनों मामलों में अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। अदालत में आरोपित नरेन्द्र सेठ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक कुमार दुबे ने पक्ष रखा। अभियोजन ने बताया घटनाक्रम अभियोजन ने बताया कि वादी सुरेन्द्र कुमार राही अपने परिवार के साथ 28 सितंबर 2015 को लखनऊ गए थे। अगले दिन पड़ोसी से सूचना मिलने पर लौटे तो मकान का दरवाजा टूटा मिला और कमरे की आलमारी से करीब 70 हजार रुपये नकद तथा सोने-चांदी के आभूषण चोरी होने की बात सामने आई। विवेचना के दौरान 16 जनवरी 2016 को पुलिस ने भोजूबीर क्षेत्र में संतोष बारी और चन्दन चौहान को पकड़े जाने का दावा किया। उनके कब्जे से लैपटॉप, की-बोर्ड, चार्जर, सोने-चांदी के जेवर और मोबाइल फोन बरामद हुए। पुलिस ने दावा किया कि दोनों ने कई चोरियों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की तथा चोरी के जेवर कुमार ज्वेलर्स, सरसौली के नरेन्द्र सेठ को बेचने की बात बताई थी। बरामदगी की फर्द पर अदालत ने जताया संदेह अदालत ने मामले के साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए पाया कि अभियोजन की कहानी में बरामदगी को लेकर महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आए। बरामदगी की फर्द पर वादी सुरेन्द्र कुमार राही के हस्ताक्षर बताए गए, लेकिन न्यायालय में उनके बयान से यह तथ्य पुष्ट नहीं हुआ। अदालत ने यह भी माना कि बरामदगी को साबित करने के लिए विवेचक के अलावा कोई स्वतंत्र एवं निष्पक्ष गवाह पेश नहीं किया गया। वह बरामदगी के समय मौके पर मौजूद थे, यह भी साबित नहीं हुआ। अदालत के अनुसार अभियोजन फर्द बरामदगी को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि चोरी हुए सामान की कथित बरामदगी के बाद वादी ने न्यायालय से अपना सामान रिलीज कराने का प्रयास नहीं किया। हालांकि वादी ने अपने बयान में इसका कारण स्थानांतरण और समयाभाव बताया, फिर भी अदालत ने इसे मामले की परिस्थितियों में महत्वपूर्ण तथ्य माना। चोरी की कहानी पर सवाल दूसरे मामले 8 दिसंबर 2015 को महावीर रोड, अर्दली बाजार स्थित एक मकान से करीब एक लाख रुपये नकद, लगभग तीन लाख रुपये के जेवर और मोबाइल फोन चोरी हुए थे। पुलिस ने विवेचना के दौरान संतोष बारी और चन्दन चौहान को गिरफ्तार कर चोरी का सामान बरामद करने का दावा किया था। नरेन्द्र सेठ पर चोरी के जेवर खरीदने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में वादी कृष्ण चन्द्र अस्थाना और उनकी पत्नी ज्योति अस्थाना ने घटना तथा चोरी गए सामान के संबंध में बयान दिए। न्यायालय में ज्योति अस्थाना ने एक जोड़ी चांदी की पायल और सोने के टॉप्स की पहचान भी की। हालांकि, जिरह के दौरान ज्योति अस्थाना ने पुलिस द्वारा बताई गई बरामदगी की प्रक्रिया और अपनी मौके पर मौजूदगी से इनकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि वह कुमार ज्वेलर्स नहीं गई थीं और नरेन्द्र सेठ को पहले से नहीं जानती थीं।

