हाथरस कलेक्ट्रेट सभागार में उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने की। बैठक दोपहर 12 बजे शुरू हुई। इसमें आयोग के सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, एसपी सिंह और विशेष कार्याधिकारी असलम अंसारी मौजूद रहे। बैठक स्थानीय और ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रतिनिधित्व और आरक्षण की स्थिति का अध्ययन करने के लिए बुलाई गई थी। सीडीओ ने आयोग के अध्यक्ष और सभी सदस्यों का स्वागत किया। बैठक में अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहा है। इसका उद्देश्य अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है। उन्होंने कहा कि स्थानीय और ग्रामीण निकायों में ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण से जुड़े तथ्यों की गहराई से जांच की जा रही है। जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से मिले सुझाव, आपत्तियों और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर आयोग सरकार को अपनी सिफारिशें देगा। आयोग ने जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय, ब्लॉक प्रमुखों और ग्राम प्रधानों समेत अन्य जनप्रतिनिधियों से सवाल-जवाब किए। उनसे ग्रामीण क्षेत्रों में ओबीसी समुदाय के पिछड़ेपन के कारणों, स्थानीय निकायों में उनकी भागीदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी ली गई। अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए पुख्ता तथ्य, आंकड़े और लोगों की भागीदारी जरूरी है। आयोग जिले के दौरे के दौरान मिली सभी जानकारी और सुझावों को एकत्र करेगा। इसके बाद उनका अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी और सरकार को सौंपी जाएगी। मीडिया से बातचीत में आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि पहले जिलाधिकारी के माध्यम से सभी आंकड़े जुटाए गए थे। आयोग अब इन आंकड़ों की जांच कर रहा है कि डाटा सही है या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि पिछड़ा वर्ग को कितना आरक्षण मिल रहा है और उसे 27 फीसदी आरक्षण का लाभ किस स्तर तक मिल रहा है।

