वाराणसी के गंगा घाट पर जमा 5 फीट सिल्ट:घटने लगा गंगा का जलस्तर, मौसम वैज्ञानिक बोले-3-4 दिन होगी तेज धूप

वाराणसी के गंगा घाट पर जमा 5 फीट सिल्ट:घटने लगा गंगा का जलस्तर, मौसम वैज्ञानिक बोले-3-4 दिन होगी तेज धूप

वाराणसी में बुधवार को मौसम में बदलाव देखने को मिला। आसमान में हल्के बादल छाए रहे और दिन का तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की रफ्तार करीब छह किलोमीटर प्रति घंटा रही। मौसम विभाग के अनुसार दिनभर हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। हालांकि, गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट से तटवर्ती इलाकों में राहत की उम्मीद बढ़ी है। घटने के बाद घटने लगा गंगा का जलस्तर केंद्रीय जल आयोग के अनुसार प्रयागराज में गंगा का जलस्तर करीब एक सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से घट रहा है। इसका असर वाराणसी में भी दिखाई दे रहा है। जलस्तर में गिरावट के साथ ही कई घाटों पर पानी पीछे हटने लगा है। अस्सी घाट पर बाढ़ का पानी अब ‘सुबह-ए-बनारस’ मंच से पूरी तरह हट चुका है। मंच और आसपास के हिस्से की सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। बाढ़ के दौरान जमा हुई मिट्टी, कचरे और गाद को हटाने में स्थानीय लोग और दुकानदार जुटे हैं। लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया- यूपी में मानसून अभी सक्रिय है। बंगाल की खाड़ी में सिस्टम बना हुआ है। इसके चलते अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी यूपी में बारिश की ज्यादा संभावना है। घाट पर जमे सिल्ट ने बढ़ाई मुश्किल घाट किनारे दुकान लगाने वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि वे अपने स्तर पर पंप लगाकर सिल्ट और पानी की सफाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि घाटों की सफाई की जिम्मेदारी प्रशासन और नगर निगम को उठानी चाहिए, क्योंकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां स्नान और भ्रमण के लिए पहुंच रहे हैं। सफाई नहीं होने से कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। 90 फीसदी नाविकों की आजीविका संकट में शम्भू निषाद ने बताया कि 90 फीसदी नाविक हर दिन गंगा में नाव संचालन करके अपनी आजीविका चलाते हैं। लेकिन अब उन्हें अपनी जिंदगी उधार के पैसों पर चलानी पड़ रही है। इतना ही नहीं, कई परिवार किराए के मकान में रहते हैं जो अपने घर का किराया भी नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 30 दिन हो गये लेकिन एक रूपया नहीं कमा पायपाते है लोग। शम्भू निषाद ने बताया कि बाढ़ के कारण नाविक घर को छोड़कर रातभर नाव पर रहकर ही देखभाल कर रहे हैं ताकि उनकी नावें बाढ़ में बहकर कहीं और न चली जाएं बाकायदा इसके लिए शिफ्ट में नाविक नाव पर ड्यूटी दे रहे हैं।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *