वर्ल्ड रेबीज डे आज:झारखंड में 49 निकायों के पास डॉग के लिए सिर्फ 50 पिंजरे, 12 शेल्टर होम

वर्ल्ड रेबीज डे आज:झारखंड में 49 निकायों के पास डॉग के लिए सिर्फ 50 पिंजरे, 12 शेल्टर होम

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के आतंक से लोगों को बचाने के लिए पिछले साल नवंबर में सभी राज्य सरकारों को सख्त निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और खेल परिसरों को सुरक्षित करने और यहां आवारा कुत्तों के प्रवेश पर रोक लगाने को कहा था। साथ ही इन्हें क्रूरता से हटाने की बजाय सभी नगर निकायों में डॉग शेल्टर होम व एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बनाने का आदेश दिया था। शीर्ट कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड के नगर विकास विभाग ने 11 जनवरी 2026 को राज्य के सभी 49 नगर निकायों को इसे सख्ती से लागू करने का तो फरमान जारी कर दिया, लेकिन 10 माह बीतने के बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस है। भास्कर ने जब जमीनी हकीकत की पड़ताल की तो पता चला कि राज्य के 49 नगर निकायों में कुल 12 डॉग शेल्टर होम हैं। वहीं सिर्फ 50 कुत्तों के लिए 50 पिंजरे हैं। इसके अलावा सिर्फ 11 डॉग कैचिंग वाहन है। वर्ष 2019 से 2025 तक 74,315 कुत्तों का टीकाकरण किया गया। नगर विकास विभाग ने 58 डॉग कैचिंग वाहन मांगे हैं, लेकिन अब तक इस मांग पर कुछ नहीं हुआ। यह हालत तब है, जब राज्य में हर माह औसतन करीब नौ हजार लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं। सिर्फ रांची में ही रोजाना 60-70 लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं। जानिए…तीन प्रमुख जिलों में क्या है हाल रांची : 47 हजार आवारा कुत्ते, पर 15 के ही रखने की व्यवस्था
रांची में नगर निगम की ओर से चुटिया में एक डॉग हॉस्पिटल है। होम फॉर एनिमल संस्था को कुत्ता पकड़ने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन उसके पास सिर्फ 15 कुत्तों को रखने की व्यवस्था है। जबकि करीब 47 हजार आवारा कुत्ते हैं। नगर विकास विभाग ने निगम को डॉग शेल्टर होम के लिए 2.10 करोड़ रु# दिया है। बड़गाई में दो एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। इसी माह टेंडर होना है, लेकिन लोग विरोध कर रहे हैं। जमशेदपुर : डॉग शेल्टर होम की योजना तैयार, पर फंड ही नहीं
यहां हर माह औसतन 1800 लोग डॉग बाइट के शिकार होते हैं। जिला स्तर पर डीसी की अध्यक्षता में कमेटी बनी है। टाटा स्टील, यूआईसीएल की ओर से नसबंदी कार्यक्रम चलाया जाता है। आवारा कुत्तों को पकड़ा जाता है। लेकिन सरकारी स्तर पर कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने की कोई व्यवस्था नहीं है। डॉग शेल्टर होम बनाने की योजना तैयार है, लेकिन इसके लिए फंड ही नहीं मिला है। धनबाद : अभी डीसी की अध्यक्षता वाली जिले की कमेटी ही नहीं बनी
यहां हर माह औसतन 2100 लोग डॉग बाइट के शिकार होते हैं। तेतुलमारी में एक डॉग शेल्टर होम है, जहां कुत्तों की नसबंदी की जाती है। लेकिन इसकी क्षमता काफी कम है। कुसुम विहार इलाके में डॉग शेल्टर होम के लिए जमीन चिह्नित की गई है। दो करोड़ का फंड भी मिला है। लेकिन अभी काम शुरू नहीं हुआ है। कुत्तों के नियंत्रण के लिए जिला स्तर पर डीसी की अध्यक्षता में कमेटी बननी है, जिसका अब तक गठन नहीं हुआ है। निकायों से मांगी है रिपोर्ट ^कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए नगर निकायों को फंड भी उपलब्ध करा दिया गया है। निकायों से अब तक किए गए कार्यों की रिपोर्ट मांगी गई है। जल्द ही इसकी समीक्षा की जाएगी। जहां पर अभी तक डॉग शेल्टर के लिए जमीन चिन्हित नहीं हुई है, वैसे निकायों में काम शुरू कराया जाएगा। -सुनील कुमार, सचिव नगर विकास सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के आतंक से लोगों को बचाने के लिए पिछले साल नवंबर में सभी राज्य सरकारों को सख्त निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और खेल परिसरों को सुरक्षित करने और यहां आवारा कुत्तों के प्रवेश पर रोक लगाने को कहा था। साथ ही इन्हें क्रूरता से हटाने की बजाय सभी नगर निकायों में डॉग शेल्टर होम व एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बनाने का आदेश दिया था। शीर्ट कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड के नगर विकास विभाग ने 11 जनवरी 2026 को राज्य के सभी 49 नगर निकायों को इसे सख्ती से लागू करने का तो फरमान जारी कर दिया, लेकिन 10 माह बीतने के बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस है। भास्कर ने जब जमीनी हकीकत की पड़ताल की तो पता चला कि राज्य के 49 नगर निकायों में कुल 12 डॉग शेल्टर होम हैं। वहीं सिर्फ 50 कुत्तों के लिए 50 पिंजरे हैं। इसके अलावा सिर्फ 11 डॉग कैचिंग वाहन है। वर्ष 2019 से 2025 तक 74,315 कुत्तों का टीकाकरण किया गया। नगर विकास विभाग ने 58 डॉग कैचिंग वाहन मांगे हैं, लेकिन अब तक इस मांग पर कुछ नहीं हुआ। यह हालत तब है, जब राज्य में हर माह औसतन करीब नौ हजार लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं। सिर्फ रांची में ही रोजाना 60-70 लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं। जानिए…तीन प्रमुख जिलों में क्या है हाल रांची : 47 हजार आवारा कुत्ते, पर 15 के ही रखने की व्यवस्था
रांची में नगर निगम की ओर से चुटिया में एक डॉग हॉस्पिटल है। होम फॉर एनिमल संस्था को कुत्ता पकड़ने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन उसके पास सिर्फ 15 कुत्तों को रखने की व्यवस्था है। जबकि करीब 47 हजार आवारा कुत्ते हैं। नगर विकास विभाग ने निगम को डॉग शेल्टर होम के लिए 2.10 करोड़ रु# दिया है। बड़गाई में दो एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। इसी माह टेंडर होना है, लेकिन लोग विरोध कर रहे हैं। जमशेदपुर : डॉग शेल्टर होम की योजना तैयार, पर फंड ही नहीं
यहां हर माह औसतन 1800 लोग डॉग बाइट के शिकार होते हैं। जिला स्तर पर डीसी की अध्यक्षता में कमेटी बनी है। टाटा स्टील, यूआईसीएल की ओर से नसबंदी कार्यक्रम चलाया जाता है। आवारा कुत्तों को पकड़ा जाता है। लेकिन सरकारी स्तर पर कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने की कोई व्यवस्था नहीं है। डॉग शेल्टर होम बनाने की योजना तैयार है, लेकिन इसके लिए फंड ही नहीं मिला है। धनबाद : अभी डीसी की अध्यक्षता वाली जिले की कमेटी ही नहीं बनी
यहां हर माह औसतन 2100 लोग डॉग बाइट के शिकार होते हैं। तेतुलमारी में एक डॉग शेल्टर होम है, जहां कुत्तों की नसबंदी की जाती है। लेकिन इसकी क्षमता काफी कम है। कुसुम विहार इलाके में डॉग शेल्टर होम के लिए जमीन चिह्नित की गई है। दो करोड़ का फंड भी मिला है। लेकिन अभी काम शुरू नहीं हुआ है। कुत्तों के नियंत्रण के लिए जिला स्तर पर डीसी की अध्यक्षता में कमेटी बननी है, जिसका अब तक गठन नहीं हुआ है। निकायों से मांगी है रिपोर्ट ^कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए नगर निकायों को फंड भी उपलब्ध करा दिया गया है। निकायों से अब तक किए गए कार्यों की रिपोर्ट मांगी गई है। जल्द ही इसकी समीक्षा की जाएगी। जहां पर अभी तक डॉग शेल्टर के लिए जमीन चिन्हित नहीं हुई है, वैसे निकायों में काम शुरू कराया जाएगा। -सुनील कुमार, सचिव नगर विकास  

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