लखनऊ में मंगलवार को मुस्लिम धर्म गुरु ने हिजाब प्रकरण पर अफसोस जताया । हिजाब पर लगी रोक पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब ने कहा कि संबंधित फैसले में कोर्ट को पुनर्विचार करना चाहिए। भारतीय संविधान में हर व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार जिंदगी गुजारने का अधिकार है। ‘संविधान से मिली धार्मिक आजादी’ मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि हिजाब पर जिस तरह से हाई कोर्ट का बयान आया है। हम न्यायालय से संबंधित फैसले पर पुर्नविचार कि अपील करते हैं। भारत में हर धर्म को आजादी है। यहाँ हिंदू – मुस्लिम , सिख-इसाई विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं अपनी धर्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवन जीते हैं। ये अफसोस कि बात है कि छोटी बच्ची के हिजाब पर कोर्ट ने पूरी तरह पाबंदी लगा दी । अगर कोई बच्ची स्कूल- कॉलेज हिजाब पहनकर जाना चाहती है तो उसपर रोक नहीं लगना चाहिए। ‘हर मुद्दे पर कोर्ट जाना उचित नहीं’ मौलाना ने सवाल करते हुए कहा कि तो क्या संविधान से हमारी मजहबी आजादी को हटा दिया जाए । हाई कोर्ट कि लाठी से हिजाब को हटाना गलत है। हम अपील करते हैं कि छोटे – छोटे मामलों को लेकर हाई कोर्ट न जाएं। जिसे हिजाब पहनना है पहने कोर्ट न जाए। मौलाना ने कहा कि जिन बच्चियों या महिलाओं को लगता है कि उन्हें हिजाब पहनना चाहिए तो यह उनकी मर्जी है। अधिकतर बच्चियों अपनी धार्मिक आजादी और इच्छा से हिजाब को चुनती हैं। इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए हर मुद्दा राजनीति के लिए नहीं होता है।

