लखनऊ के सुल्तानपुर रोड स्थित निजी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में 32 वर्षीय महिला नीतू यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिवारीजनों ने इलाज में कोताही का आरोप लगाया है। नाराज परिवारीजनों ने जमकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि डॉक्टर ने ड्यूटी के दौरान नशा किया। इलाज संबंधी दस्तावेज में छेड़छाड़ किया। हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। जानकारी के मुताबिक बागियामऊ गांव निवासी नीतू यादव के खाना बनाते समय हाथ जल गए थे। आनन-फानन परिवारीजन मरीज को लेकर सुलतानपुर के निजी हॉस्पिटल में लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। रात में मरीज की हालत ठीक थी, लेकिन सुबह नीतू की सुबह करीब 10 बजे मौत हो गई। परिवारीजनों को शव करीब शाम छह बजे तक नहीं मिला। परिवारीजनों पुलिस से मुकदमा दर्ज करने की गुजारिश की लेकिन पुलिस ने भी टालमटोल किया। हॉस्पिटल की वर्किंग पर उठाए सवाल परिजनों ने रात में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के नशे में होने का आरोप लगाया। साथ ही इलाज के दस्तावेजों में भी छेड़छाड़ की आशंका जताई है। घटना के बाद अस्पताल में नाराजगी फैल गई। परिवारीजनों ने हंगामा किया। अस्पताल प्रबंधन इलाज से संबंधित पूरी फाइल उपलब्ध नहीं करा रहा है। उन्हें दस्तावेजों की केवल फोटोकॉपी दी गई है। परिजनों का दावा है कि इसमें कई जगह ओवरराइटिंग की गई है। कुछ दवाओं की डोज घटाई गई है, जबकि डॉक्टर का नाम तक बदला हुआ नजर आ रहा है। कुछ दवाओं के नाम पेन से पूरी तरह काटे गए हैं। इन बदलावों को लेकर परिजनों ने इलाज की प्रक्रिया और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। दवाओं की डोज की भी होगी जांच परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, इलाज से जुड़े सभी मूल दस्तावेज उपलब्ध कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि महिला की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए इलाज के दौरान दी गई दवाओं, उनकी डोज और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों की भूमिका की जांच जरूरी है।

