लखनऊ के मैकेनिक की कुवैत में लाश मिली:5 दिन से घर में नहीं जला चूल्हा; पत्नी बोली- कहा था घर पहुंचकर फोन करना

लखनऊ के मैकेनिक की कुवैत में लाश मिली:5 दिन से घर में नहीं जला चूल्हा; पत्नी बोली- कहा था घर पहुंचकर फोन करना

लखनऊ में 146 दिन पहले जिस घर में शहनाइयां गूंजी थीं, वहां आज मातम पसरा है। कुवैत कमाने गए बेटे की मौत की सूचना के बाद 13 अप्रैल से घर में चूल्हा नहीं जला। बूढ़े मां-बाप से कोई कुछ पूछता है तो वे फफककर रो पड़ते हैं, लेकिन अब आंसू सूख चुके हैं। पत्नी भी एक कोने में गुमशुम बैठी है। यह मामला है मोहनलालगंज के भदेसुआ गांव का। गांव के मुश्ताक अली के 33 साल के बेटे इल्तियाक अली की कुवैत में मौत हो गई है। 60 साल के मुश्ताक को यह खबर गांव के ही एक व्यक्ति ने दी। जिस कंपनी में इल्तियाक काम करता था, वहां के किसी प्रतिनिधि ने यह जानकारी नहीं दी। उसके बाद से पिता मुश्ताक कंपनी के ठेकेदार के संपर्क में हैं लेकिन अभी इनको डेडबॉडी की फोटो तक नहीं मिली। अपने बेटे को किसी भी हाल में देखने के लिए मुश्ताक का एक-एक पल भारी हो रहा है। उन्होंने दावा किया है कि ग्राम प्रधान के जरिये सरकार को ईमेल करवाया है। इसमें मांग की है कि उनके बेटे का शव भारत मंगवाया जाए या फिर बेटे की सही जानकारी ही दिलवा दी जाए। भास्कर रिपोर्टर भदेसुआ गांव पहुंचा। यहां जो भी देखा-पूछा, सब इस रिपोर्ट में पढ़िए… पहले 3 तस्वीरें देखिए- घर का इकलौता सहारा था इल्तियाक परिजनों के मुताबिक, इल्तियाक ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहा था। बड़ा भाई गुड्डू अलग रहता है, बहन राजिया बानो की शादी हो चुकी है। बूढ़े माता-पिता की देखभाल से लेकर घर खर्च तक सब कुछ वही करता था। गांव के लोगों का कहना है कि इल्तियाक मेहनती और सीधे स्वभाव का था। शव लाने की मांग, प्रशासन से मदद की गुहार परिवार अब प्रशासन और भारत सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है, ताकि जल्द से जल्द इल्तियाक का शव भारत लाया जा सके। पिता ने बताया कि वह एसडीएम से भी मिले थे। जैसा बताया गया, वैसे ही उन्होंने ऑनलाइन सारी प्रक्रिया पूरी कर दी है। युवक के पिता ग्राम प्रधान गीता यादव के बेटे के साथ दिल्ली विदेश मंत्रालय पहुंचकर बेटे के शव को देश लाए जाने की भी गुहार लगाएंगे। पढ़िए मां-बाप पत्नी ने जो बताया- पिता बोले- बेटा रोज फोन करता था पिता मुश्ताक अली ने बताया कि बेटा रोज फोन कर हालचाल लेता था। 12 अप्रैल को आखिरी बार बात हुई थी। उसने कहा था सब ठीक है… हमें क्या पता था कि यही आखिरी बातचीत होगी। रोते हुए उन्होंने कहा, हमने 20 जनवरी को उसे हंसी-खुशी एयरपोर्ट से विदा किया था। आज उसी बेटे का चेहरा देखने के लिए तरस रहे हैं। पिता का आरोप है कि कुवैत में मौजूद कंपनी या साथियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। हर बार अलग-अलग वजह बताई जा रही है, जिससे शक और गहरा गया है।परिजनों का कहना है कि न तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट दी गई है और न ही शव की स्थिति के बारे में कोई पुख्ता जानकारी साझा की गई है। पत्नी बोलीं- 13 अप्रैल को आखिरी कॉल थी, अब सब खत्म इल्तियाक की पत्नी आफरीन बानो ने बताया कि 13 अप्रैल को दोपहर 3:14 बजे उनके पति का फोन आया था। मैंने उन्हें बताया कि दवा लेकर घर लौट रही हूं। इस पर उन्होंने कहा था कि घर पहुंचने के बाद फोन कर लेना। मैंने जब घर पहुंचकर फोन किया तो कॉल रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद मैंने अब्बू और अम्मी को यह बात बताई कि उनका फोन नहीं रिसीव हो रहा है। शाम तक सबकुछ लगभग सामान्य रहा। रात में करीब 10:30 बजे किसी ने घर के बाहर अब्बू (ससुर) से पूछा कि आपके बेटे की मौत हो गई क्या? तब हम लोगों पर आफत टूट पड़ी। गांव के लोगों को पहले पता चली मौत की बात आफरीन ने बताया- पति की मौत की खबर गांववालों को पहले पता चली। यह जानकारी कुवैत में गांव के ही दूसरे लोगों को हो गई, लेकिन हमें कंपनी के किसी भी आदमी ने सूचना नहीं दी। वहां नौकरी करने वाले गांव के ही लोगों ने अपने घरों में बताया। यहां गांव में जब सबको पता चल गया, तब सबसे बाद में हमको पता चला। यह भी नहीं बताया गया कि मेरे पति के साथ वहां क्या हुआ? शव की वर्तमान स्थिति क्या है, यह भी कोई नहीं बता रहा है। कभी दिल का दौरा तो कभी बताया नस फटी जब अब्बू ने कंपनी के नदीम से फोन कर जानकारी ली, तब बताया गया कि उनके पति को दिल का दौरा पड़ा था। बाद में अलग-अलग लोगों से अलग-अलग बातें सामने आईं। किसी ने कहा कि वह बाथरूम में नहाने गए थे, तभी अटैक आया और उनकी मौत हो गई। दूसरे दिन कहा गया कि उन्हें करंट लग गया था। तीसरे दिन बताया गया कि अटैक से नस फट गई थी। लगातार मौत के अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं, लेकिन अब तक न तो कोई स्पष्ट सच्चाई सामने आई है और न ही परिवार को कोई फोटो या ठोस सबूत दिखाया गया है। यहां तक कि गांव के जो लोग वहां मौजूद हैं, उन्हें भी सही स्थिति नहीं दिखाई जा रही है। परिवार को न तो किसी जांच की जानकारी दी जा रही है और न ही कोई आधिकारिक संपर्क किया जा रहा है। शादी के बाद 57 दिन तक घर में रहे इल्तियाक की शादी आफरीन से 24 नवंबर 2025 को हुई थी। वह शादी के 57 दिन बाद 20 जनवरी को कमाने के लिए फिर से कुवैत चले गए। वह वहां 2017 से एसी मैकेनिक के तौर पर नौकरी कर रहे थे। अंतिम बार घरवालों से उनकी बात 12 अप्रैल को हुई थी।

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