रीवा और मऊगंज जिले के 8 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में अब अस्पताल संचालन की व्यवस्था बदलने जा रही है। मध्यप्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इन स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन आउटसोर्स करने की मंजूरी दे दी है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत इन अस्पतालों की संचालन और प्रबंधन संबंधी कई जिम्मेदारियां अब निजी एजेंसी संभालेगी। एजेंसी का चयन टेंडर प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा और चयनित एजेंसी को 5 साल तक अस्पताल संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। रीवा के 6 और मऊगंज के 2 CHC होंगे आउटसोर्स शासन की योजना में रीवा जिले के चाकघाट, गंगेव, गुढ़, रायपुर कर्चुलियान, रीठी और गोविंदगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को शामिल किया गया है। वहीं मऊगंज जिले के हनुमना और नईगढ़ी CHC भी इस व्यवस्था के तहत संचालित किए जाएंगे। इस तरह दोनों जिलों के कुल 8 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगे। 5 साल तक निजी एजेंसी संभालेगी अस्पताल शासन के आदेश के मुताबिक चयनित निजी एजेंसी को इन स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जाएगी। यह व्यवस्था 5 साल के लिए लागू रहेगी। एजेंसी सिर्फ अस्पताल के प्रशासनिक संचालन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसे हाउसकीपिंग, सुरक्षा, अंदरूनी रखरखाव और निर्धारित मेडिकल एवं अन्य कर्मचारियों की व्यवस्था भी करनी होगी। 30 बेड के अस्पताल में 41 लोगों का स्टाफ शासन ने 30 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए कुल 41 कर्मचारियों का मानव संसाधन निर्धारित किया है। इसमें: ओटी टेक्नीशियन सहित अन्य कर्मचारी शामिल होंगे। इसके अलावा अस्पताल की सुरक्षा के लिए तीन शिफ्ट के हिसाब से 3 सुरक्षा कर्मचारी और सफाई व्यवस्था के लिए 2 कर्मचारी भी रखे जाएंगे। दवाएं और टीके सरकार उपलब्ध कराएगी आउटसोर्स संचालन का मतलब यह नहीं होगा कि अस्पताल में मिलने वाली सभी सुविधाओं की जिम्मेदारी निजी एजेंसी पर होगी। शासन के अनुसार जरूरी सरकारी दवाएं और टीके विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे। ओपीडी, आईपीडी और ऑपरेशन के लिए आवश्यक दवाएं तथा दूसरी जरूरी मेडिकल सामग्री भी सरकार उपलब्ध कराएगी। वहीं अस्पताल के संचालन, स्टाफ, सुरक्षा, सफाई और रखरखाव जैसी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निजी एजेंसी की होगी। सर्विस लेवल एग्रीमेंट से तय होगी एजेंसी की जिम्मेदारी निजी एजेंसी के साथ सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA) किया जाएगा। इस समझौते में अस्पताल में एजेंसी को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं और उनकी गुणवत्ता से जुड़ी शर्तें तय होंगी। यानी एजेंसी को सिर्फ कर्मचारी उपलब्ध कराने के बजाय अस्पताल की व्यवस्थाओं को निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित करना होगा। पूरी व्यवस्था की निगरानी लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग करेगा। टेंडर के जरिए होगा एजेंसी का चयन इन CHC के संचालन के लिए निजी एजेंसी का चयन सीधे तौर पर नहीं किया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। टेंडर के बाद चयनित एजेंसी को शासन द्वारा तय शर्तों के अनुसार अस्पताल संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा ट्रांसफर का विकल्प आउटसोर्स किए जाने वाले CHC में पहले से पदस्थ सरकारी कर्मचारियों के लिए भी शासन ने व्यवस्था तय की है। ऐसे कर्मचारियों को एक बार जिले के दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों में स्थानांतरण का विकल्प दिया जाएगा। जो कर्मचारी दूसरे स्वास्थ्य संस्थान में जाना चाहते हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसका विकल्प चुन सकेंगे। वहीं जो कर्मचारी स्थानांतरण का विकल्प नहीं चुनेंगे, उनके वेतन आदि के भुगतान की व्यवस्था संस्था द्वारा प्रमाणित किए जाने के आधार पर की जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट से क्या बदलेगा? इस व्यवस्था का उद्देश्य CHC में उपलब्ध सेवाओं के संचालन और प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित करना बताया गया है। निजी एजेंसी को अस्पताल की गैर-चिकित्सकीय व्यवस्थाओं के साथ निर्धारित मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। हालांकि, इस मॉडल के लागू होने के बाद सेवाओं की गुणवत्ता, स्टाफ की उपलब्धता और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में वास्तविक सुधार कितना होता है, यह इसके क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट होगा। अब टेंडर और चयन की प्रक्रिया का इंतजार फिलहाल शासन ने 8 CHC को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल करने की मंजूरी दे दी है। अब निजी एजेंसी के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके बाद चयनित एजेंसी को पांच साल के लिए अस्पताल संचालन की जिम्मेदारी मिलेगी। सरकार की ओर से दवाएं और टीके उपलब्ध कराने के साथ विभाग पूरी व्यवस्था की निगरानी करेगा। यानी रीवा और मऊगंज के इन 8 सरकारी अस्पतालों में आने वाले समय में मरीजों को इलाज की सुविधा तो सरकारी व्यवस्था के तहत ही मिलेगी, लेकिन अस्पताल के संचालन और प्रबंधन का बड़ा हिस्सा निजी एजेंसी के जिम्मे होगा।


