रेवाड़ी नगर परिषद के वाइस चेयरमैन चुनाव में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की पसंद पर मुहर लग गई। वार्ड-12 के पार्षद और भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष निखिल मांढैया ने विरोधी खेमे के प्रत्याशी चेतराम सैनी को 5 वोट से हराकर उप प्रधान की कुर्सी पर कब्जा कर लिया। निखिल को 19, जबकि चेतराम को 14 वोट मिले। चुनाव में निखिल की जीत के साथ राव इंद्रजीत सिंह का नगर परिषद की राजनीति में प्रभाव फिर सामने आया, लेकिन 14 वोट लेकर चेतराम के मुकाबले में बने रहने से परिषद में विरोधी खेमे की मौजूदगी भी स्पष्ट हो गई। 26 वर्षीय निखिल नगर परिषद के सबसे युवा वाइस चेयरमैन बने हैं। चुनाव से पहले राव समर्थक खेमे में 21 पार्षदों के समर्थन की चर्चा थी, लेकिन निखिल को 19 वोट ही मिले। ऐसे में दो वोट कम मिलने को लेकर क्रॉस वोटिंग और भीतरघात की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, मतदान के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि किसने किसके पक्ष में वोट दिया। दूसरी ओर, चेतराम को मिले 14 वोट ने चुनाव को केवल पद की लड़ाई तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि नगर परिषद के भीतर राजनीतिक समीकरणों पर भी सवाल खड़े किए हैं। रायशुमारी से लेकर मतदान तक राव की पसंद पर नजर वाइस चेयरमैन का चुनाव राव इंद्रजीत सिंह और उनके विरोधी खेमे के बीच प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था। 2 अक्टूबर को राव ने रामपुरा हाउस में पार्षदों से अलग-अलग मुलाकात कर रायशुमारी की थी। बताया जा रहा है कि कई पार्षदों ने उप प्रधान के लिए युवा चेहरे को मौका देने का सुझाव दिया था। इसके बाद निखिल के नाम पर सहमति बनी। हालांकि, चेतराम सैनी ने मैदान में उतरकर इस चुनाव को सीधा मुकाबला बना दिया। चुनाव से पहले दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थन को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे थे। पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बैठकों और रणनीतिक प्रयासों का दौर भी चला। राव समर्थक खेमे की ओर से पार्षदों को बाहर भ्रमण पर ले जाने की भी चर्चा रही। मतदान के दिन दोनों प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ नगर परिषद पहुंचे। सर्वसम्मति नहीं बनने पर मतदान कराया गया और नतीजा निखिल के पक्ष में रहा। 21 के समर्थन के दावे के बीच 19 वोट ही मिले नगर परिषद में भाजपा की टिकट पर 12 पार्षद चुनाव जीते थे, जबकि बाद में 16 अन्य पार्षद भाजपा में शामिल हुए। इस तरह पार्टी से जुड़े पार्षदों की संख्या 28 बताई जाती रही है। वाइस चेयरमैन चुनाव में निखिल के समर्थन में 21 पार्षद होने की चर्चा थी, लेकिन उन्हें 19 वोट मिले। इससे दो वोटों के अंतर को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठे। हालांकि, केवल परिणाम के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दो पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की। मतदान के बाद चेतराम के पक्ष में 14 वोट आना भी अहम रहा। इससे साफ है कि निखिल की जीत के बावजूद परिषद में सभी पार्षदों का समर्थन एक ही खेमे के साथ नहीं है। शहर के विकास और समस्याओं के समाधान का दावा जीत के बाद निखिल मांढैया ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, चेयरपर्सन विनीता पिप्पल और सभी पार्षदों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी शहर के लोगों की सेवा का अवसर है। सफाई व्यवस्था, अवैध निर्माण, बेसहारा पशुओं और अतिक्रमण जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। निखिल ने कहा कि नगर परिषद के सभी पार्षदों के साथ मिलकर शहर के विकास को प्राथमिकता देंगे। चुनाव के बाद किसी से कोई गिला-शिकवा नहीं है और सभी को साथ लेकर काम किया जाएगा। 1995 से अब तक कई उप प्रधान, अब सबसे युवा चेहरे की एंट्री वर्ष 1995 में नगर परिषद के गठन के बाद पवन शर्मा, परसराम, हनुमान छावड़ी, संजय मलिक, पवन बटला और श्याम सुंदर चुघ सहित कई नेता उप प्रधान की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अब 26 वर्षीय निखिल मांढैया इस पद पर पहुंचे हैं। उनकी जीत ने नगर परिषद को सबसे युवा वाइस चेयरमैन दिया है। अब उनके सामने चुनावी समर्थन को शहर के विकास और आमजन की समस्याओं के समाधान में बदलने की चुनौती होगी।

